(मुकेश शर्मा)
(ग्वालियर)
सुशासन का दावा करने वाली बीजेपी की सरकार में चल रहा MPHB डिपार्टमेंट में भ्रष्टाचार का खुला खेल!
वर्षों से जमे सेटिंगबाज अफसर,कर्मचारी के नियम विरुद्ध कार्यों से लोग हैं त्रस्त
मध्य प्रदेश हाऊसिंग बोर्ड में फर्जीवाड़े सहित कई केसों में फंसे अधिकारी भी हैं वर्षों से कुर्सी पर
मध्यप्रदेश में भारतीय जनता पार्टी की डॉ मोहन यादव की सरकार होने के बाद भी वर्षों से गृह निर्माण एवं अधो संरचना विकास मंडल में भ्रष्टाचार में लिप्त अफसर, कर्मचारी नियम विरुद्ध कार्य कर जहां जमकर लूट मचाए हुए हैं तो वहीं इससे सरकारी संपत्ति और राजस्व को भी बर्बाद करने में लगे हुए हैं। जिससे कि मोहन सरकार की भ्रष्टाचार से लड़ने कि इच्छाशक्ति और उसकी मंशा पर जनता में नाराजगी व्याप्त हो रही हैं।
मध्य प्रदेश गृह निर्माण एवं अधो संरचना विकास मण्डल में पदस्थ प्रदेश की मुख्य प्रशासकीय अधिकारी तृप्ति श्रीवास्तव,संभाग क्रमांक 1 में पदस्थ सम्पदा अधिकारी रविन्द्र निकोसे,स्थापना बाबू उमाकांत बाथम एवं ग्वालियर उपायुक्त एनके वर्मा की चर्चा इस समय जोरों पर है।
तृप्ती श्रीवास्तव के बारे में आम चर्चा है कि श्रीवास्तव बोर्ड के कर्मचारियों पर बे वजह दबाव बना कर अनुचित कार्य करवा रहीं हैं और अनैतिक रूपसे धन संग्रहित कर रही हैं। वैसे मैडम श्रीवास्तव का विवादों से पुराना नाता रहा है फिर चाहे बो मध्यप्रदेश वेयर हाउसिंग कारपोरेशन में एमडी रहते हुए करोड़ों का घोटाला करने का मामला हो या रीवा न्यायलय में 420 सहित विभिन्न धराओं में चल रहा मामला लेकिन श्रीवास्तव मैडम को इन सभी बातों से कोई फर्क नहीं पड़ता। क्योंकि श्रीवास्तव मैडम ने मध्यप्रदेश गृह निर्माण एवं अधो संरचना विकास मंडल में तो वेयर हाउस कोरपोरेशन से भी बुरा हाल कर रखा है। हाउसिंग बोर्ड में सरकार के नियम खूटी पर टंगे हुए हैं। शासन के नियमानुसार एक सीट पर कोई व्यक्ति 3 वर्ष तक ही रह सकता है परन्तु हाऊसिंग बोर्ड में तृप्ती श्रीवास्तव के चहेतों को 12 से 15 वर्ष तक हो गए हैं,यह तो एक उदाहरण मात्र है।
बोर्ड में ऐसे हजारों काम गलत तरीके से हो रहे हैं जैसे ग्वालियर की दर्पण कालोनी के भूखंड नीलामी में प्लाट आबंटन हुआ जिसमे कोई गड़बड़ी हुई तो उसे विभागीय मंत्री द्वारा निरस्त कर संचालक मंडल की अनुसंसा के लिए भेज दिया।भूखंड निरस्त होने के बाद दूसरी पार्टी ने हाईकोर्ट की शरण ले ली।अब सवाल ये पैदा होता है कि भूखंड की नीलामी में अनियमितता करने वाले ग्वालियर प्रक्षेत्र उपायुक्त एन के वर्मा और अपर आयुक्त मध्यप्रदेश हाऊसिंग बोर्ड शैलेन्द्र वर्मा सहित सभी अधिकारी और कर्मचारियों के विरुद्ध कोई कार्यवाही हुई?
क्या इस मामले से जुड़े सभी अधिकारी, कर्मचारियों से नीलामी प्रक्रिया और न्यायलय में होनेवाले खर्चे की बसूली होगी? दूसरी तरफ ग्वालियर में कुछ महीनों पहले नियम विरुद्ध बनाये गये संभागीय लेखा अधिकारी सुरेश गौर को लापरवाही बरतने के कारण सस्पेंड कर उनका मुख्यालय रीवा कर दिया गया था। जिस पर वह न्यायालय चले गए तो न्यायलय से उसका ट्रांसफर आर्डर निरस्त हो गया। अब ट्रांसफर निरस्त हुआ है अर्थात संस्पेंशन यथावत ही रहेगा परन्तु एन के वर्मा ने तो सुरेश गौर का सस्पेंसन ऑर्डर कैंसिल कर दिया।
सबसे ज्यादा चौंकाने वाला निर्णय तो यह है कि जिन्होंने सस्पेंड किया उन्हीं ने सुरेश गौर को संभागीय लेखा पाल बनाकर उपकृत कर दिया है और जांच पड़ताल चलती रहेगी यह तो खुलेआम भ्रष्टाचार दिख रहा है!यह हाउसिंग बोर्ड मुख्यालय द्वारा बड़े ही अचंभित करने वाली हरकत है।
एक अन्य मामले में किसी तिवारी नामक अधिकारी द्वारा एक अस्पताल का एस्टीमेट दिया है यदि वह अस्पताल इंपैनल्ड नहीं है तो उन्हें यह अवगत कराया जाना चाहिए कि आप हाऊसिंग बोर्ड में इंपैनल्ड अस्पताल का एस्टीमेट प्रस्तुत करें लेकिन हाउसिंग बोर्ड के अधिकारी तो समाधान निकालने की जगह ज्ञान देते हैं ।
ज्ञान से कैंसर जैसी बड़ी बीमारी का इलाज नहीं होता और हाऊसिंग बोर्ड में भ्रष्टाचार ला इलाज बीमारी कैसर बन चुका है।
भोपाल शहर की अशोका गार्डन कॉलोनी में भूखंड क्रमांक 180, बी, 15/30 का ,भूखंड शकील,लईक,नंदू,तौफीक, दिनेश साहू चक्की और लीला होटल वाला इन सब दलालों/भूमाफिया और हाउसिंग बोर्ड के बाबू /अधिकारियों की सांठ गांठ करके कूट रचित दस्तावेज तैयार कर कोई फर्जी समी नाम का आदमी खड़ा करके समी को सलीम बनाकर 38 लाख में उक्त भूखंड को चंद्रा सुइट्स को बेच दिया इस सारे खेल में दलाल तो शामिल हैं ही इसके अलावा हाउसिंग बोर्ड के सम्पदा अधिकारी रविन्द्र निकोसे,संतोष इंगले,महाराज सिंह गोयल, बाबू लाल,संजय सोनवाने, रविन्द्र निकोसे की पत्नी निर्मला निकोसे,अब्दुल अहमद और एक पाण्डेय नामक बाबू की मिली खुली मिली भगत है।




