(संजय राय)
(नई दिल्ली)
उपराष्ट्रपति ने महामना पं. मदन मोहन मालवीय जी के संपूर्ण वांग्मय का किया लोकार्पण
पूना पैक्ट में महामना जी की थी ऐतिहासिक भूमिका: रामबहादुर राय
राष्ट्र को सशक्त बनाने के लिए महामना जी ने शिक्षा के क्षेत्र में निभाई अतुलनीय भूमिका: हरिशंकर सिंह
महामना मालवीय मिशन एवं सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय के तत्वाधान में संयुक्त रूप से आयोजित कार्यक्रम में केंद्रीय मंत्री अर्जुन राम मेघवाल, सांसद अनुराग सिंह ठाकुर, दिल्ली विस अध्यक्ष विजेंद्र गुप्ता समेत अनेक विशिष्ट लोग रहे मौजूद
भारतीय राष्ट्रचेतना, शिक्षा-संस्कृति और नैतिक मूल्यों के अमर प्रवक्ता भारत रत्न महामना पं. मदन मोहन मालवीय जी के संपूर्ण वाङ्मय का लोकार्पण एक ऐतिहासिक सांस्कृतिक अनुष्ठान के रूप में महामना मालवीय मिशन एवं भारत सरकार के सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय के प्रकाशन विभाग के संयुक्त तत्वावधान में गुरुवार को ऑडिटोरियम-1, भारत मंडपम, नई दिल्ली में अत्यंत गरिमामय वातावरण में सम्पन्न हुआ। यह लोकार्पण अंतिम श्रृंखला (12 खंड) के प्रकाशन के साथ भारतीय बौद्धिक परंपरा का एक महत्वपूर्ण अध्याय सिद्ध हुआ।

इस गौरवपूर्ण अवसर पर मुख्य अतिथि के रूप पधारे उपराष्ट्रपति श्री सी. पी. राधाकृष्णन ने कहा कि महामना पंडित मदन मोहन मालवीय जी का चिंतन आज भी भारत के वैचारिक पथ का पाथेय है लोगों को उनके द्वारा राष्ट्रनिर्माण में निभाई गई भूमिका से प्रेरणा लेनी चाहिए।
इस मौके पर उपराष्ट्रपति के कार्यक्रम में केंद्रीय विधि एवं न्याय राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) एवं संसदीय कार्य राज्य मंत्री श्री अर्जुन राम मेघवाल, सांसद लोकसभा एवं संसदीय स्थायी समिति (कोयला, खान एवं इस्पात) के अध्यक्ष श्री अनुराग सिंह ठाकुर, दिल्ली विधानसभा अध्यक्ष श्री विजेंद्र गुप्ता जी, पद्म भूषण श्री राम बहादुर राय (अध्यक्ष – इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केंद्र) तथा श्री भूपेंद्र केथेला, प्रमुख महानिदेशक, प्रकाशन विभाग की विशिष्ट उपस्थिति ने समारोह की गरिमा को और ऊँचाई प्रदान की।
कार्यक्रम की अध्यक्षता महामना मालवीय मिशन के राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री हरिशंकर सिंह ने की। राष्ट्रीय महामंत्री डॉ. वेद प्रकाश सिंह के मार्गदर्शन में मिशन की वाङ्मय समिति एवं संगठन के पदाधिकारियों ने इस ऐतिहासिक कार्य को साकार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

इस अवसर पर राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री हरिशंकर सिंह ने अपने स्वागत भाषण में कहा कि महामना जी ने राष्ट्र को सशक्त बनाने में शिक्षा के क्षेत्र में अतुलनीय भूमिका निभाई है। उन्होंने मंचासीन अतिथियों, विद्वानों, सहयोगकर्ताओं एवं देश–विदेश से पधारे सभी प्रतिनिधियों का आत्मीय भाव से सम्मान एवं अभिनंदन किया।
इस अवसर पर मिशन के संरक्षक श्री प्रभुनारायण श्रीवास्तव, कोषाध्यक्ष श्री दिनकर सिंह, श्री गोविंद राम अग्रवाल, श्री रोहित सिन्हा, डॉ. अनिमेष सक्सेना, श्री विजय तिवारी, श्रीमती अर्चना गुप्ता, श्री सी. बी. त्रिपाठी, श्री गुलाब शुक्ला, श्री शरद श्रीवास्तव, श्री ब्रजेश श्रीवास्तव, श्री प्रकाश गौतम सहित देशभर की विभिन्न शाखाओं से आए शिक्षाविद, कुलपति, चिंतक एवं समाजसेवी उपस्थित रहे।
इस गरिमामय आयोजन को अंतरराष्ट्रीय स्वरूप प्रदान करते हुए विदेशों से भी महामना मालवीय मिशन के पदाधिकारी एवं प्रतिनिधि उपस्थित रहे। साथ ही विभिन्न रियासतों एवं राजपरिवारों से जुड़े राजा-महाराजाओं की उपस्थिति ने समारोह को ऐतिहासिक गरिमा प्रदान की। इन सभी महानुभावों ने महामना जी के विचारों के संरक्षण, प्रचार-प्रसार एवं वाङ्मय प्रकाशन में अपने-अपने स्तर पर महत्वपूर्ण सहयोग प्रदान किया।
आगरा संभाग से महामना मालवीय मिशन के महासचिव श्री राकेश शुक्ला ने इस आयोजन में सहभागिता कर संभाग का प्रतिनिधित्व किया। उनके साथ आगरा संभाग के अध्यक्ष श्री हृदेश यादव, श्री श्रीकृष्ण गौतम, प्रो. डॉ. मिथिलेश सिंह, डॉ. आरती शर्मा, श्री सुरेश तिवारी, श्री मुकेश सिंह, श्री रुद्र प्रताप सिंह सहित अनेक समर्पित कार्यकर्ता एवं प्रबुद्धजन उपस्थित रहे।
इस अवसर पर पद्म भूषण श्री राम बहादुर राय ने पूना पैक्ट का विशेष उल्लेख करते हुए महामना जी की ऐतिहासिक भूमिका को सामाजिक सौहार्द एवं राष्ट्रीय एकात्मता के संदर्भ में रेखांकित किया।
समारोह के उपरांत उपराष्ट्रपति महोदय एवं अन्य विशिष्ट अतिथियों के साथ महामना मालवीय मिशन की वाङ्मय समिति के पदाधिकारियों का विशेष फोटोग्राफ सत्र सम्पन्न हुआ। इस गरिमामय क्षण में आगरा संभाग के महामंत्री श्री राकेश शुक्ला भी विशेष रूप से सम्मिलित रहे।
वक्ताओं ने एक स्वर में कहा कि महामना पं. मदन मोहन मालवीय जी का यह संपूर्ण वाङ्मय विद्यार्थियों, शोधार्थियों एवं शिक्षकों के लिए अत्यंत उपयोगी सिद्ध होगा। यह संग्रह न केवल अध्ययन-अध्यापन की दृष्टि से एक अमूल्य संदर्भ ग्रंथ है, बल्कि भारतीय शिक्षा, विचार और शोध परंपरा में एक मील का पत्थर बनकर आने वाली पीढ़ियों को दिशा और दृष्टि प्रदान करेगा।
महामना मालवीय मिशन द्वारा किया गया यह वाङ्मय-प्रकाशन कार्य भारतीय सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण, संवर्धन एवं पुनर्पाठ की दिशा में एक कालजयी एवं दूरदर्शी प्रयास के रूप में स्मरणीय रहेगा।




