(मुकेश शर्मा)
(ग्वालियर)
मुख्य प्रशासनिक अधिकारी तृप्ती श्रीवास्तव के विशेष कृपा पात्र हैं बाथम और तृप्ती श्रीवास्तव पर है मंत्री के OSD अंशुल खरे का वरदहस्त
मध्यप्रदेश गृह निर्माण एवं अधो संरचना विकास मंडल प्रदेश की मुख्य प्रशासनिक अधिकारी तृप्ति श्रीवास्तव की नाक का बाल बने स्थापना बाबू उमाकांत बाथम ओबीसी वर्ग से आते हैं या आदिवासी से विभाग में ये चर्चा का विषय बन गया है।
उमाकांत बाथम जो वरिष्ठ अधिकारियों की गणेश परिक्रमा करके वर्षों से नियम विरुद्ध स्थापना जैसी महत्वपूर्ण सीट संभाल रहे हैं उनके दस्तावेजों पर सवाल खड़े हो गये हैं, क्योंकि उमाकांत बाथम की परिवार आईडी में जाति बाथम लिखी है और उन्होंने हासिंग बोर्ड में नौकरी आदिवासी कोटे से प्राप्त की है।
मध्यप्रदेश गृह निर्माण एवं अधो संरचना विकास मंडल द्वारा जारी भर्ती सूची में उमाकांत बाथम का नाम दूसरे नंबर पर दर्ज है और जाति के कॉलम में एसटी लिखा हुआ है।अब यहां सवाल यह पैदा होता है कि बाथम की परिवार आईडी सही है या हाउसिंग बोर्ड की भर्ती सूची?
उमाकांत बाथम को हाउसिंग बोर्ड में 11.09.1996 भर्ती किया गया और उनकी परिवार आईडी वर्ष 2011 या 12 में बनी है,वैसे भी बाथम की दर्जनों शिकायतें हैं बावजूद इसके स्थापना जैसी महत्वपूर्ण पद संभाल रहे हैं।
कारण है कि बाथम को हाउसिंग बोर्ड की चर्चित एवं अपनी कार्यशैली से चर्चित मुख्य प्रशानिक अधिकारी तृप्ती श्रीवास्तव का खुला संरक्षण है और तृप्ती श्रीवास्तव पर विभागीय मंत्री कैलाश विजयवर्गीय के ओएसडी अंशुल खरे की कृपा बरस रही है!हाउसिंग बोर्ड के सूत्र बताते हैं कि बोर्ड में ऊपर तक जो भी लेनदेन होता है उसमें अंशुल खरे और तृप्ती श्रीवास्तव महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

तृप्ति श्रीवास्तव के बारे में आम चर्चा है कि श्रीवास्तव बोर्ड के कर्मचारियों पर बे- वजह दबाव बना कर अनुचित कार्य करवा रहीं हैं और अनैतिक रूपसे धन संग्रहित कर रही हैं। वैसे मैडम श्रीवास्तव का विवादों से पुराना नाता रहा है फिर चाहे वो मध्यप्रदेश वेयर हाउसिंग कारपोरेशन में एमडी रहते हुए करोड़ों का घोटाला करने का मामला हो या रीवा न्यायलय में 420 सहित विभिन्न धाराओं में चल रहा मामला लेकिन श्रीवास्तव मैडम को इन सभी बातों से कोई फर्क नहीं पड़ता। क्योंकि तृप्ति पर अंशुल खरे की कृपा जो है!
श्रीवास्तव ने मध्यप्रदेश गृह निर्माण एवं अधो संरचना विकास मंडल में तो वेयर हाउस कॉरपोरेशन से भी बुरा हाल कर रखा है। हाउसिंग बोर्ड में सरकार के नियम नहीं मैडम के मौखिक नियम चलते हैं?
शासन के नियमानुसार एक सीट पर कोई व्यक्ति 3 वर्ष तक ही रह सकता है परन्तु हाऊसिंग बोर्ड में तृप्ति श्रीवास्तव के चहेतों को 12 से 15 वर्ष तक पदों पर हो गए हैं,यह तो एक उदाहरण मात्र है।
हाउसिंग बोर्ड में भ्रष्टाचार कैंसर जैसी बड़ी बीमारी बन चुका है जिसका इलाज संभव नहीं दिख रहा है फिर भी नए आयुक्त गौतम सिंह की तरफ लोग आशा भरी निगाहों से देख रहे हैं क्योंकि श्री गौतम की छवि साफ और स्वक्ष अधिकारी की है।
इस बाबत स्थापना बाबू हाउसिंग बोर्ड मध्यप्रदेश उमाकांत बाथम का कहना है कि हम पहले ओबीसी में हुआ करते थे बाद मे सरकार ने एसटी में शामिल कर दिया है.पर इस बात का कोई जबाब नहीं दिया कि नौकरी पहले लगी या परिवार आईडी पहले बनी।
मुख्य प्रशासनिक अधिकारी हाउसिंग बोर्ड मध्यप्रदेश तृप्ति श्रीवास्तव ने कहा कि उमाकांत बाथम ओबीसी हैं या एसटी इससे आपको क्या करना है,इतना कहकर मोबाईल काट दिया।
कलेक्टर भोपाल कौशलेंद्र विक्रम सिंह ने कहा कि भोपाल में बाथम ओबीसी वर्ग में आते हैं या एसटी में आप जिनके बारे में जानना चाहते हैं उनके दस्तावेज भेजिए में चैक करके बताता हूं।
कुल मिलाकर यह देखना दिलचस्प होगा कि इतने बड़े मामले में शासन प्रशासन क्या कदम उठता है।




