(मुकेश सेठ)
(मुम्बई)
भारतीय संविधान के 75 वर्षों पर आधारित प्रदर्शनी भी की गई है
उच्चतम न्यायालय के पूर्व न्यायाधीश बीएन कृष्णा समेत तमाम कानूनविदों ने लॉ स्टूडेंट्स को बताए तकनीकी ज्ञान
मुंबई के अगस्त क्रांति मैदान में आयोजित ‘वसुधैव कुटुंबकम की ओर’ कॉन्क्लेव और प्रदर्शनी का तीसरा दिन बहुत ही फलदायी रहा। कानूनी क्षेत्र के विशेषज्ञों ने विधायी चर्चा की, इसके अलावा छात्र केंद्रित गतिविधियों में भी युवाओं ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। साथ ही सार्वजनिक चर्चा के मंच पर उपस्थित लोगों की सक्रिय भागीदारी देखी गई।
‘वसुधैव कुटुंबकम’ प्रदर्शनी पूरे दिन खुली रही और आगंतुकों की संख्या भी उत्साहजनक रही। आगंतुकों ने न्याय और शाश्वत विश्व व्यवस्था के लिए प्राचीन भारतीय ज्ञान में निहित परिवार के 12 शाश्वत सिद्धांतों की प्रस्तुति देखी। इसके साथ ही भारतीय संविधान के 75 वर्षों पर आधारित प्रदर्शनी भी आयोजित की जा रही है, जिसमें संयुक्त परिवार की संगठन क्षमता, संवैधानिक संतुलन, सामाजिक जिम्मेदारी और नैतिक शासन जैसे विषयों को प्रस्तुत किया गया।
इस कॉन्क्लेव के दौरान छात्रों की भागीदारी मुख्य केंद्र बिंदु रही। इसके लिए विशेष रूप से तैयार किए गए ‘स्टूडेंट एंगेजमेंट ज़ोन’ में मूट कोर्ट के सेमी-फाइनल और फाइनल राउंड आयोजित किए गए। विधि (Law) के छात्रों ने वकालत, कानूनी तर्क और प्रक्रिया की सटीकता का उत्कृष्ट प्रदर्शन किया। फाइनल राउंड के बाद प्रतिभागियों के प्रयासों और उत्कृष्टता की सराहना करने के लिए एक औपचारिक सम्मान समारोह भी आयोजित किया गया, जिससे प्रतिभागियों का उत्साह बढ़ा।
कॉन्क्लेव स्थल के मथुरादास हॉल में ‘मौलिक अधिकारों’ (Fundamental Rights) विषय पर पैनल-3 के साथ कानूनी चर्चा अधिक व्यापक और फलदायी रही।
इस सत्र में बॉम्बे हाई कोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ताओं- रफीक दादा, ज़ाल अंध्यारुजिना, प्रदीप संचेती तथा चेतन कपाड़िया ने मौलिक अधिकारों के उद्भव, व्याख्या और वर्तमान चुनौतियों पर विस्तृत और मार्गदर्शक विचार प्रस्तुत किए। इस चर्चा में न्यायिक संतुलन, नागरिक स्वतंत्रता और संवैधानिक सुरक्षा कवच जैसे विषयों को शामिल किया गया।
दोपहर बाद के सत्र में ‘संविधान और जीवन के अन्य क्षेत्र’ विषय पर पैनल-4 आयोजित किया गया। जिसमें भारत के सर्वोच्च न्यायालय के पूर्व न्यायाधीश बी.एन. श्रीकृष्णा, सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ता संजय उपाध्याय, वरिष्ठ अधिवक्ता नौशाद इंजीनियर, बीसीएमजी के उपाध्यक्ष उदय वारुंजीकर और बॉम्बे हाई कोर्ट के अधिवक्ता मयूर खांडेपरकर उपस्थित रहे। इस पैनल ने कानून और उभरते क्षेत्रों के बीच अंतर्संबंध, पर्यावरणीय और संस्थागत दृष्टिकोण पर चर्चा की।
शाम के समय राजनीति, बिजनेस, कीमती धातुओं और पर्यावरण-जलवायु जैसे विषयों पर पॉडकास्ट सत्र आयोजित किए गए। इस चर्चा के माध्यम से व्यापक जनसमुदाय को सटीक और उपयोगी जानकारी प्राप्त हुई, इतना ही नहीं बल्कि इस सत्र ने कॉन्क्लेव में परस्पर चर्चा का एक नया आयाम जोड़ा।




