(मुकेश सेठ)
(मुम्बई)
विधायक रोहित पवार ने स्क्रीन प्रेजेंटेशन के साथ कहा लैंडिंग से एक मिनट पहले ट्रांसपोंडर का बन्द होना खड़े करता है गम्भीर प्रश्न
पार्थ पवार को भी है इस हादसे पर शंका, इसकी निष्पक्ष, पारदर्शी और अंतर्राष्ट्रीय स्तर की हो जांच मांग की रोहित पवार ने
सुनेत्रा काकी की इच्छा के बिना ही उनको उपमुख्यमंत्री पद की दिलवाई गई शपथ भतीजे पवार ने किया दावा
महाराष्ट्र की सियासत में दिवंगत उपमुख्यमंत्री अजीत दादा पवार की विमान दुर्घटना में हुई मौत हादसा है साज़िश इन दो वाक्यों में झूल रही है।
आज एनसीपी अजित पवार की पार्टी के विरोधी दल एनसीपी शरद पवार दल के विधायक और अजित पवार के भतीजे रोहित पवार ने आईबी चह्वाण सेन्टर में आयोजित प्रेस कांफ्रेंस में सवालों की बारिश के साथ हादसे को साजिशन घटना की आशंका को बलवती करने का प्रयास किया है।
ऐसे में अजित पवार से जुड़े उन सवालों की, जिन पर अब सियासी और सार्वजनिक बहस तेज होती जा रही है।
रोहित पवार ने इस मामले को लेकर कई गंभीर दावे किए हैं और इसे सिर्फ एक हादसा मानने से इनकार किया है।
रोहित पवार ने मीडिया के सामने करीब एक घंटे की एलईडी स्क्रीन पर डेटा पेश करते हुए कहा कि अजीत दादा पवार की मौत से जुड़ी परिस्थितियां कई तरह के संदेह पैदा करती हैं। उनका कहना है कि यह मामला सामान्य एक्सीडेंट नहीं लगता, बल्कि हर पहलू की गहराई से जांच जरूरी है।
रोहित पवार ने सबसे पहले पायलट सुमित कपूर की ट्रेनिंग और उनके रिकॉर्ड पर सवाल उठाए। उन्होंने दावा किया कि लियरजेट उड़ाने का प्रशिक्षण पूरा नहीं था और पायलट को कई बार अल्कोहल के प्रभाव में भी पाया गया था, जिसके चलते उनका लाइसेंस तीन साल के लिए रद्द किया गया था।
इसके साथ ही उन्होंने फ्लाइट के तकनीकी पहलुओं की ओर ध्यान दिलाया। रोहित पवार के मुताबिक लैंडिंग से ठीक एक मिनट पहले ट्रांसपोंडर का बंद होना बेहद गंभीर सवाल खड़ा करता है। आखिर उड़ान पूरी तरह सामान्य होने के बावजूद अंतिम क्षणों में ट्रांसपोंडर क्यों बंद हुआ, इसका जवाब अब तक साफ नहीं है।
रनवे को लेकर भी रोहित पवार ने सवाल उठाए। शुरुआत में रनवे 29 की अनुमति मांगी गई, फिर रनवे 11 की और उसके बाद दोबारा 29 की मांग की गई। जबकि रनवे 29 को सबसे सुरक्षित माना जाता है, इसके बावजूद रनवे 11 पर उतरने की परमिशन क्यों ली गई, इसे लेकर रोहित पवार ने संदेह जताया है।
उन्होंने बताया कि सुबह 8 बजकर 31 मिनट पर बारामती एटीसी ने 3 किलोमीटर विजिबिलिटी में उड़ान के लिए हरी झंडी दी। 8 बजकर 43 मिनट पर रनवे 11 पर लैंडिंग की अनुमति मिली और ठीक 8 बजकर 44 मिनट पर पायलट की ओर से “ओ शीट–ओ शीट” की आवाज आई, जिसके बाद आखिरी कुछ सेकंड में मुख्य पायलट की ओर से कोई प्रतिक्रिया नहीं मिली।
रोहित पवार का कहना है कि को-पायलट को मुख्य पायलट की तुलना में लियरजेट उड़ाने का ज्यादा अनुभव था, ऐसे में अंतिम फैसले कैसे लिए गए, यह भी जांच का अहम मुद्दा है।
रोहित पवार ने साफ तौर पर कहा कि उन्हें और कई लोगों को आशंका है कि यह महज एक्सीडेंट नहीं, बल्कि साजिश भी हो सकती है। उन्होंने डीजीसीए पर भरोसा जताते हुए कहा कि एक्सपर्ट ओपिनियन जरूरी है, इसलिए जांच में एक अनुभवी भारतीय एजेंसी के साथ-साथ एक विदेशी एजेंसी को भी शामिल किया जाना चाहिए। उनका कहना है कि इस जांच के लिए सीआईडी सक्षम नहीं है।
उन्होंने पायलट सुमित कपूर, वीएसआर कंपनी और मेंटेनेंस से जुड़ी कंपनियों पर भी शंका जाहिर की। रोहित पवार का आरोप है कि वीएसआर कंपनी मेंटेनेंस में शॉर्टकट अपनाती है और इसकी गहन जांच जरूरी है। साथ ही उन्होंने मेंटेनेंस कंपनी एरो के संबंधों पर भी सवाल उठाए।
पूर्व एविएशन मिनिस्टर प्रफुल्ल पटेल का नाम लेते हुए रोहित पवार ने कहा कि उन्हें इस पूरे मामले पर सामने आकर जवाब देना चाहिए था, लेकिन उस वक्त उनकी प्राथमिकताएं कुछ और थीं। उन्होंने यह आरोप भी लगाया कि सुनेत्रा काकी की इच्छा के बिना ही शपथ दिलवाई गई।
रोहित पवार ने यह भी बताया कि पार्थ पवार को भी अजीत दादा पवार के इस हादसे को लेकर शंका है।
कुल मिलाकर रोहित पवार की मांग है कि इस पूरे मामले की निष्पक्ष, पारदर्शी और अंतरराष्ट्रीय स्तर की जांच हो, ताकि अजीत दादा पवार की मौत से जुड़ी सच्चाई देश के सामने आ सके।
मालूम हो कि उपमुख्यमंत्री अजित पवार के विमान हादसे में हुए मौत के बाद से ही पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी, जम्मू और कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला, राजद अध्यक्ष व बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री लालू प्रसाद यादव, सपाध्यक्ष व पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव, शिवसेना उद्धव बाला साहब ठाकरे दल के सांसद संजय राउत, सांसद प्रियंका चतुर्वेदी, कांग्रेस पार्टी सहित तमाम सियासी लोगों ने हादसे पर प्रश्नचिन्ह खड़े करते हुए विस्तृत जॉच की माँग की है।
उधर मुख्यमंत्री देवेन्द्र फडणवीस ने जहां प्रधानमंत्री, गृहमंत्री को तुरन्त जानकारी देते हुए उड्डयन मंत्री से जांच की मांग करने के साथ ही सीआईडी इन्वेस्टिगेशन के आदेश दे दिए थे तो वहीं पर इस हादसे की जांच DGCA सहित केन्द्र सरकार की अन्य एजेन्सी भी कर रही हैं।
फ़िलहाल एक उपमुख्यमंत्री की मौत पर चल रहे राजनीतिक घटनाक्रम आगे क्या सियासी सन्देश देने में सफल होती है यह तो आगामी वक्त ही निर्णय करेगा।




