(मनोज श्रीवास्तव)
(लखनऊ)
मानसून सत्र में बीबी की कसम खाने तक बात पहुंची थी, बजट सत्र में कहां तक जायेगी!
जल जीवन मिशन को लेकर पिछली बार यूपी विधानसभा सत्र के दौरान जलशक्ति मंत्री स्वतंत्र देव सिंह और सपा विधायक फहीम इरफान के बीच सवाल-जवाब के दौर में बीवी की कसम खाने तक की बात आ गई थी, लेकिन अबकी क्या होगा? अनुमान है कि इस बार जब जलशक्ति मंत्री सदन में आयेंगे तब विपक्ष उनको उन्हीं के पार्टी से विधायक ब्रजभूषण राजपूत द्वारा महोबा में इस योजना में हुये भ्रष्टाचार और खामियों को लेकर बीच सड़क पर घेरने का मुद्दा उठाने से नहीं चूकेगा। भाजपा के जानकार बताते हैं कि स्वतंत्रदेव सिंह हमले की राजनीति से दूर रहते हैं। महोबा की घटना के बाद जितने लोग उनसे मिल कर उनको सांत्वना दिये होंगे उनमें सत्ता और विपक्ष की संख्या में बहुत अंतर नहीं होगा। अमूमन वह अखिलेश यादव पर भी हमला नहीं करते और अखिलेश यादव भी उन पर हमला नहीं करते हैं। इस लिये विपक्षी समाजवादी पार्टी के सदस्य यह विषय बहुत न बढ़ावे। कुछ लोगों ने बताया कि यह तकरार कहीं उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य या ब्रजेश पाठक से जुड़ा होता तो अपना नम्बर बढ़ाने के लिये सपा सदस्य कहीं तक जा सकते थे। कुनबे समेत स्वयं अखिलेश यादव भी मोर्चा संभालते दिख सकते थे।

बता दें कि पिछले विधानसभा सत्र में मुरादाबाद जिले की बिलारी सीट से सपा विधायक फहीम इरफान ने विधानसभा सत्र के दौरान अपनी बात रखते हुए कहा था कि, ‘जल जीवन मिशन को लेकर सदन में बैठे विधायक बहुत दुखी हैं। हालात ऐसे हैं कि कम प्रेशर की वजह से आधे घंटे में एक बाल्टी पानी मुश्किल से भरता है। जल जीवन मिशन आने के बाद हैंडपंप की व्यवस्था खत्म कर दी गई है। जिन ठेकेदारों को काम दिया गया, उन्होंने पहले रोड तोड़े और फिर पानी के टैंक बनाए। उन्होंने मुरादाबाद के साथ ही राज्य में अन्य जगहों अयोध्या, बरेली, सीतापुर, मथुरा का उदाहरण देते हुए कहा कि कई जगहों पर पानी की टंकियां गिर गईं। कुछ जगहों पर लोगों की मौत भी हुई। आखिर इसका मुआवजा कौन देगा? क्या सरकार देगी या फिर कंपनी। ट्रेंचिंग करने के बाद जो पाइपलाइन डाली गई, उसकी कंडीशन यह है कि जहां-जहां ये योजना शुरू हुई, वहां लोग बीमारियों का शिकार हो रहे हैं। जिन्हें आपने टेंडर दिए, उन्होंने बहुत मनमानी की।
इरफान ने सरकार के दावे पर सवाल उठाते हुए कहा था कि 1 लाख 96 हजार सड़कों के सापेक्ष में 1 लाख 90 हजार ठीक कर दिया गया है। यह रिपोर्ट गलत और झूठी है। इसके जवाब में जल संसाधन मंत्री स्वतंत्र देव सिंह ने कहा बताया था कि प्रदेश में कुल 5 लाख 63 हजार 992 किलोमीटर वितरण प्रणाली के सापेक्ष 5 लाख 15 हजार किलोमीटर वितरण प्रणाली बिछाई गई है। बाकी 1 लाख 90 हजार 105 किलोमीटर सड़कों की पुनर्स्थापना की गई। बोलते-बोलते मंत्री स्वतंत्रदेव सिंह बोले- मैं इरफान से कहना चाहता हूं कि अपनी बीवी की कसम खा कर कहें कि मेरे गांव में पानी नहीं पहुंचा। उन्होंने कहा था कि आप बीवी की कसम खाकर बता दें कि गांव में पानी नहीं आ रहा है। फहीम ने जवाब देते हुए कहा था कि मंत्री बीवी की कसम की बात ना करें। एक जिले की जांच करा लें। ये तो बीवी की कसम खाने की बात ही कह रहे हैं। मैं विधानसभा से इस्तीफा देने को तैयार हूं।
पार्टी में दिग्गज कुर्मी नेताओं फायरब्रांड विनय कटियार, 2014 में सरदार वल्लभ भाई पटेल की प्रतिमा (स्टेचू ऑफ यूनिटी) के निर्माण के लिये उत्तर प्रदेश के हर घर से लोहा मांग कर भेजने के लिये जिसे प्रदेश संयोजक बनाया था पूर्व प्रदेश अध्यक्ष चौधरी ओम प्रकाश सिंह, कानपुर की दिग्गज नेता कल्याण सिंह सरकार में कैबिनेट मंत्री रही प्रेमलता कटियार को टीम गुजरात ने सरेआम हाशिये पर ढकेल दिया। टीम गुजरात का ही विमर्श था कि एकमात्र अनुशासित और आज्ञाकारी कुर्मी चेहरा स्वतंत्रदेव सिंह हैं। पंकज चौधरी 2014 में 5 वीं बार के लोकसभा सांसद बने थे। तब उनको इनकी जरूरत नहीं थी, अब जब भाजपा में कुर्मी मतलब स्वतंत्रदेव से शुरू और उन्हीं पर खत्म की बात होने लगी तो उन्होंने केंद्रीय वित्त राज्यमंत्री पंकज चौधरी को उत्तर प्रदेश भाजपा का अध्यक्ष बना कर भेज दिया। इस निर्णय से स्वतंत्रदेव के मीठे वचन और पूरा न कर पाने वाले अस्वाशन से निराश कुर्मी गैर कुर्मी सबको नया प्लेटफार्म मिल गया।संगठन से निकले, वरिष्ठों द्वारा तराशे गये स्वतंत्रदेव सिंह को आगे और कठिन चुनौतियों का सामना करने का मन तैयार रखना होगा। क्योंकि प्रदेश भाजपा मुख्यालय पर आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में जब पंकज चौधरी से महोबा की घटना को लेकर अनुसाशन हीनता का सवाल हुआ तो शब्दों का अर्थ भले कुछ रहा हो लेकिन उनके चेहरे का भाव भविष्य का उत्तर तय कर दिया था। देखते जाइये अभी तो यह आरंभ है। जानकर बताते हैं कि जब से महोबा कांड हुआ है तब से जलशक्ति मंत्री दिन रात दौरे ही कर रहे हैं। वह किसी को यह मौका नहीं देना चाहते कि लोग उनकी विनम्रता पर सहानुभूति का मरहम लगा कर व्यंग का घाव दें।बहुतों के मुंह से सुना हूँ कि विभागीय कार्यो को लेकर उनसे ज्यादा चौकन्ने रहने वाले प्रमुख सचिव सिंचाई अनिल गर्ग के कठोर परिश्रम से यूपी की नहरों में पानी भरा हुआ है। जहाँ तक जल जीवन मिशन की बात है तो उसके अपरमुख्य सचिव अनुराग श्रीवास्तव हैं। उनका नाम आते ही चर्चा होने लगती है कि वह दिल्ली दरबार मे टीम गुजरात की पसंद हैं। उन पर यहां चाहते हुये भी कोई कठोर निर्णय नहीं ले पायेगा। इसी लिये मंत्री जी विभागीय अपरमुख्य सचिव को कुछ कहने के बजाय पैर में चक्कर, मुंह में शक्कर लेकर स्थलीय निरीक्षण स्वयं कर रहे हैं।जिससे इस मुद्दे पर यदि सदन में कोई सवाल करे तो उसको पर्याप्त उत्तर से निरुत्तर कर दें।




