(राजेश बैरागी)
(गौतम बुद्ध नगर)
हरियाणा विधानसभा का चुनाव परिणाम क्या रहने वाला है?आज शाम मतदान के तत्काल बाद आए सर्वेक्षणों में वहां कांग्रेस की बहुमत की सरकार बनती नजर आ रही है। कांग्रेस के भूपेंद्र सिंह हुड्डा या उनके पुत्र दीपेंद्र हुड्डा में से कौन मुख्यमंत्री बनेगा या फिर मनोहर लाल खट्टर की तर्ज पर कुमारी शैलजा के हाथ बाजी लग सकती है,ये प्रश्न आगामी आठ अक्टूबर को चुनाव परिणाम आने के बाद के लिए छोड़ देते हैं। हरियाणा में जातीय समीकरणों के अलावा एक डेरा समीकरण भी है। पिछले लगभग तीन दशक से डेरा समीकरण हरियाणा की राजनीति को भरपूर प्रभावित करता रहा है।
माना जाता है कि हरियाणा के एक तिहाई से अधिक विधानसभा चुनाव क्षेत्रों में डेरा सच्चा सौदा का निर्णायक प्रभाव है। डेरा प्रमुख गुरमीत सिंह उर्फ इंसा उर्फ राम रहीम यौन शोषण, हत्या जैसे जघन्य अपराधों में दोषी पाए जाने पर 25 अगस्त 2017 से रोहतक की सुनारिया जेल में जन्मभर की सजा काट रहा है। परंतु उसकी चुनावी उपयोगिता उसे बार बार जेल से पैरोल और फरलो पर बाहर ले आती है। मतदान से चार दिन पहले ही उसे हरियाणा सरकार ने संभवतः छठी बार फरलो पर जेल से आजाद किया है। उसने निस्संदेह भाजपा के पक्ष में अपने अनुयायियों को मतदान करने का आदेश दिया होगा।
हरियाणा के एग्जिट पोल बता रहे हैं कि वहां भाजपा की नहीं कांग्रेस की सरकार बनने जा रही है।तो क्या फरलो बाबा के राजनीतिक प्रभाव का अंत हो गया है? लगता है,एक दशक से एक डमी मुख्यमंत्री के द्वारा चलाई जा रही भाजपा सरकार से राज्य की जनता का मोह भंग हो गया है। दसवें वर्ष के अंतिम कुछ महीनों के लिए मुख्यमंत्री बदलने का भी कोई लाभ संभवतः नहीं मिला है। तो क्या फरलो बाबा केवल अनुकूल परिस्थितियों में ही जीत दिलाने का गारंटी कार्ड है? ऐसे दुष्ट और अधर्मी के सहयोग से प्राप्त की गई सत्ता का कल्याणकारी होना कैसे संभव है।
सत्य तो यही है कि सत्ता चाहे इस हाथ रहे या उस हाथ, उससे कल्याणकारी होने की अपेक्षा करना समझदारी नहीं है!




