(आलोक तिवारी)
(मथुरा)
√ देव के उठते ही बजने वाद्यंत्र और श्रद्धा भक्ति से सराबोर भक्तों ने किये तुलसी-शालीग्राम विवाह के आयोजन
चार माह की लंबी नींद के बाद मंगलवार को ब्रज भूमि के घर-घर में देवउठनी एकादशी पर देव को उठाया गया। शाम को घर के चौक या आंगन में देव प्रतिमा उकेर कर उनकी पूजा की गई। देव उठनी एकादशी के साथ ही विवाह व अन्य शुभ कार्यों को शुरू करने का सीजन शुरू हो गया। देवउठनी एकादशी पर शहर व कस्बे ही नहीं ग्रामीण अंचल भी विवाह की शहनाई से गूंजायमान हो उठा। इससे दिन-रात में बारात निकलने की वजह से कई जगह जाम भी लग गया।
देवउठनी पर विवाह का सबसे शुभ व अबूझ मुहूर्त था ऐसे में इस दिन बड़ी संख्या में विवाह हुआ। शहर के लगभग सभी वैवाहिक स्थलों की बुकिंग फुल रही। काफी विवाह दिन में भी हुईं। बारात की वजह से लोगों को जाम का सामना करना पड़ा। इस दौरान धूमधाम से तुलसी विवाह का आयोजन किया गया। इस मौके पर कई समाजसेवी संस्थाओं द्वारा सामूहिक विवाह का आयोजन किया गया। कई जगह देवोत्थान एकादशी के उपलक्ष्य में शालीग्राम तुलसी का पाणिग्रहण संस्कार संपन्न कराया गया।
मंगलवार को देवउठनी एकादशी के पर घर-घर में देवता को उठाया गया। घरों में दीवार पर देवों की प्रतिमा को उकेर कर शाम को महिलाओं ने देवों को जगाया। उठो देवा बैठो देवा, पानी पियो देवा ,हाथ पैर फटकारो देवा भजन गाएं। इस मौके पर गन्ने, सिंघाड़े व घर में बने भोजन से देवों को भोग लगाया गया। यही प्रसाद आस-पड़ोस व अन्य लोगों में वितरित किया गया। इस अवसर पर मंदिरों में भी विशेष पूजा की गई। लोगों को तुलसी-शालीग्राम की कथा सुनाई गई।




