(मुकेश सेठ)
(मुंबई)
√ आज से सराय काले खां ISBT चौक जाना जायेगा बिरसा मुंडा चौक के नाम से- मनोहर लाल खट्टर
√ दिल्ली में गृह एवं सहकारिता मंत्री नें बाँसेरी उधान में बिरसा मुंडा की भव्य प्रतिमा का किया अनावरण
√ केंद्रीय शहरी आवास और ऊर्जा मंत्री ने चौक का किया नया नामकरण और कहा कि लोग उनके जीवन से होते रहेंगे प्रेरित
झारखंड में भगवान की तरह पूजे जाने वाले बिरसा मुंडा की 150 वीं जयंती यानी जनजातीय गौरव दिवस पर आज शुक्रवार को मोदी सरकार ने जहाँ दिल्ली के सराय काले खाँ चौक का नाम बदलकर भगवान बिरसा मुंडा चौक कर दिया तो वहीं उनकी भव्य प्रतिमा का अनावरण बाँसेरी पार्क में किया गया।
कोलकाता के दो कलाकारों द्वारा 3 हज़ार किलो वजनी बिरसा मुंडा की भव्य प्रतिमा का अनावरण केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने बाँसेरी उद्यान में किया।
इस मौके पर गृहमंत्री ने कहा कि भगवान बिरसा मुंडा नें आदिवासियों की रक्षा सुरक्षा के लिए अपना जीवन समर्पित कर अंगेजो से लंबा संघर्ष किये। भगवान बिरसा मुंडा “धरती आबा “के जीवन को दो चरणों में बाँट कर देखना होगा।
शाह नें स्पष्ट किया कि पहला, आदिवासी संस्कृति की रक्षा और उसके प्रति समर्पित प्रतिबद्धता और दूसरा मातृभूमि की स्वतंत्रता, उसकी रक्षा के लिए सर्वोच्च बलिदान का जज्बा। उन्होंने आगे कहा कि महज 25 वर्ष की आयु में बिरसा मुंडा ने अपने कर्मो से ऐसा इतिहास रचा है कि 150 साल बाद भी पूरा देश उनके समक्ष नतमस्तक है। बिरसा मुंडा नें अंग्रेजो के विरुद्ध क्रांति की मशाल जलाई और देश ही नही बल्कि पूरी दुनिया का ध्यान आदिवासियों की स्थिति की तरफ़ खींचा।
केंद्रीय गृह मंत्री ने कहा कि नरेंद्र मोदी सरकार ने आदिवासी क्षेत्रों के विकास और आदिवासी लोगों के उत्थान के लिए काफी कार्य किए हैं और किये जा रहे हैं।
उन्होंने बिरसा मुंडा को श्रद्धांजलि अर्पित की और आशा व्यक्त की कि युवा उनसे प्रेरणा लेते रहेंगे।
जबकि वहीं दूसरी तरफ केंद्रीय शहरी आवास और ऊर्जा मंत्री मनोहर लाल खट्टर ने कहा कि मैं आज घोषणा कर रहा हूँ कि सराय काले खां ISBT चौक का नाम अब भगवान बिरसा मुंडा चौक के नाम से जाना जायेगा।
उन्होंने विश्वास जताया कि बिरसा मुंडा की भव्य प्रतिमा और उनके नाम पर चौक देखकर दिल्ली के नागरिक ही नही बल्कि बाहर से आने वाले लोग भी उनके साहसिक जीवन से प्रेरित होंगे।
मूर्ति अनावरण और नामकरण के अवसर पर सांसद मनोज तिवारी, सांसद बाँसुरी स्वराज, उप राज्यपाल समेत अन्य महत्वपूर्ण हस्तियां रही उपस्थित।
विदित हो कि केंद्र की सत्ता में अपनी दूसरी पारी में मोदी सरकार ने वर्ष 2021 में बिरसा मुंडा की जयंती को जनजातीय गौरव दिवस के तौर पर मनाने का ऐलान करते हुए कहा था कि अगले 15 वर्षो तक बिरसा मुंडा की स्मृति में जनजातीय गौरव दिवस मनाया जाता रहेगा।
कुल मिलाकर वर्तमान में आदिवासी दलित बहुल माने जाने वाले झारखंड के साथ महाराष्ट्र में विधानसभा के चुनावी युद्ध में सियासी सूरमा अपने सियासी शत्रुओं को परास्त करने के लिए एक एक वोट के लिए जद्दोजहद मचाये हुए हैं।
ऐसे में आगामी 23 नवम्बर को जब EVM मशीन वोट उगलना शुरू करेंगी तो यह देखना दिलचस्प रहेगा कि बीजेपी ने आदिवासियों के भगवान की प्रतिमा और चौक के नामकरण का फ़ायदा वोट के रूप में ले पाई है कि नही।




