(मुकेश शर्मा)
(भोपाल)
एम्पी हाउसिंग बोर्ड में अफसरों की कारगुज़ारी से छोटे कर्मचारियों में है भय व्याप्त!
पीड़ित असलम ने बताया कि बोर्ड की कालोनियों में अनेक भूखंडों पर कुछ अधिकारियों के दलालों का है कब्ज़ा
मुख्य प्रशासकीय अधिकारी ने नहीं उठाया फ़ोन तो PRO ने कहा कि इस संदर्भ में शिकायत आई होगी तो बड़े अफसरों के पास होगी

मध्यप्रदेश गृह निर्माण एवं अधो संरचना विकास मंडल के छोटे कर्मचारियों में इन दिनों पूरे मध्यप्रदेश में भय का माहौल बना हुआ है!मंडल के छोटे कर्मचारी इस समय घुट घुट कर नौकरी कर रहे हैँ।
कारण मंडल की मुख्य प्रशासकीय अधिकारी तृप्ती श्रीवास्तव और उनके किचन कैविनेट के सदस्य राजेश शुक्ला,उमाकांत बाथम और निकोसे द्वारा किये जारहे अवैध कार्य और बसूली?
मंडल के सूत्रों के अनुसार भोपाल के कुछ भूखंडों के रिक्त होने की सूचना समाचार पत्रों में प्रकाशित हुई उक्त सूचना/ विज्ञपत्ति संपदा अधिकारी राजेश शुक्ला के हस्ताक्षर से जारी की गई जिसमें सार्वजनिक रूप से जानकारी दी गई कि उक्त भूखण्ड मौके पर रिक्त हैं और हाऊसिंग बोर्ड में इनका कोई रिकॉर्ड नहीं है।
इस बाबत उन हितग्राहियों से सम्पर्क साधा गया जो उन भवनों,भूखंड़ों के वाजिब कब्जा धारी हैं और दशकों से निवास कर रहे हैं, जिनके पास उन भवनों, भूखंडों के वैध दस्तावेज हैं तो सनसनीखेज मामला सामने आया।
हितग्राहियो ने बताया कि हम लगभग 30 वर्षों से यहां रह रहे हैं अब 30 वर्षों बाद अचानक ऐसा क्या हुआ कि ये भूखण्ड रिकॉर्ड से गायब हो गये। हितग्राही असलम महमूद ने खुला आरोप लगाया कि श्री शुक्ला के पहले जितने भी अधिकारी और बाबू आए क्या सभी के आंख,कान बन्द थे या सभी नाकारा थे, यदि 30 वर्ष तक उक्त भूखण्ड या मकान खाली पड़ा है तो इसकी 100 प्रतिशत जिम्मेदारी तत्कालीन अधिकारियों और मौके पर पदस्थ मैदानी तकनीकी अमले की है।
श्री असलम ने कहा कि पूर्व संपदा अधिकारी एवं वर्तमान में संपदा कार्यालय 1- में पदस्थ रविन्द्र निकोसे,महाराज सिंह गोयल,अब्दुल अहमद,रमाकांत पांडेय जो पहले इसी संपदा कार्यालय में चपरासी अर्थात चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी रहे हैं इनके आलावा रिश्वत प्रकरण में सस्पेंड प्रहलाद श्रीवास्तव,सलीम खान और बोर्ड के कर्मचारियो के लिए वसूली करने वाले शकील,तौफीक,संजू, नंदकिशोर,आदि के घरों पर मंडल की सैकड़ों मूल फाइलें मिल मिल जायेंगी।
मंडल के पुख्ता सूत्र बताते हैं कि अशोका गार्डन,सोनागिरी,मंडीदीप और खासतौर से वैरसिया रोड करोंद मुल्ला कालोनी में बहुत फर्जी आबंटन, हस्तांतरण,ट्रान्सफर और नामांतरण हुए हैं। मंडल की सम्पप्ति को खुर्द बुर्द करने का कार्य रमाकांत पांडेय,संतोष इंगले मिलकर कर रहे हैं। पीड़ित हितग्राहियों, इन कर्मचारियों और तथाकथित कारखासों के साथ राजेश शुक्ला, उमाकांन्त बाथम और तृप्ती श्रीवास्तव की गहन जांच की मांग की है।पीड़ितों के अनुसार हाउसिंग बोर्ड में मामला अजीबो गरीब है, अगर आप सम्पदा अधिकारी राजेश शुक्ला की शिकायत करोगे तो उस शिकायत की जांच राजेश शुक्ला ही करेंगे क्योंकि वही जांच अधिकारी भी हैं।
शासन के नियमों के मुताबिक एक अधिकारी या सहायक बाबू एक स्थान पर 3 वर्ष तक ही रहना चाहिए परन्तु पब्लिक डीलिंग की महत्वपूर्ण जगह पर ये अधिकारी कर्मचारी 12 से 15 वर्षों से एक ही स्थान पर काम कर रहे हैं,इसीलिए भ्रष्टाचार चरम सीमा पर पहुंच गया है।
बताया जाता है कि अखिल भारतीय भ्रष्टाचार उन्मूलन के प्रदेश महासचिव डॉ नर्मदा प्रसाद सौनी ने लोकायुक्त जांच में घिरी मध्यप्रदेश गृह निर्माण एवं अधो संरचना विकास मंडल की मुख्य प्रशासकीय अधिकारी तृप्ती श्रीवास्तव,नियम विरुद्ध एक से अधिक प्रभार लिए भोपाल सम्पदा अधिकारी राजेश शुक्ला, निकोसे और फर्जी जाति प्रमाण पत्र में आरोप जांच का सामना कर रहे स्थापना बाबू उमाकांत बाथम सहित उन तमाम बाबू जो दलालों के लिए कार्य कर रहे हैं। उनके कार्यकाल में मंडल की जो सम्पप्ति खुर्द बुर्द हुई है उसकी सीबीआई से जांच कराने की मांग की है।
उक्त बाबत श्री सोनी ने मुख्यमंत्री, आवास मंत्री,नगरीय प्रशासन आयुक्त को पत्र लिखकर सूचना देदी है।
श्री सोनी ने चेतावनी दी है कि समय रहते अगर सरकार ने उचित निर्णय नहीं लिया तो हमारा संगठन न्यायलय जाने को मजबूर होगा।
विश्वस्त सूत्रों से खबर है कि इसके पूर्व में भी तृप्ती श्रीवास्तव, राजेश शुक्ला,उमाकांत बाथम और निकोसे की दर्जनों शिकायतें विभाग में लंवित हैं। मामला वहीँ आकर अटक जाता है कि जिसकी शिकायत होती है वही जांच करता है।एक अन्य जानकारी के अनुसार श्री निकोसे की पत्नी भी हाउसिंग बोर्ड में ही पदस्थ हैं और भ्रष्टाचार के आरोपों के चलते अभी निलंवित चल रहीं हैं।
पीड़ित असलम ने बताया कि हाऊसिंग बोर्ड की उक्त कॉलोनियों में अनेक भूखंडों पर इन्हीं अधिकारियों के पिछलग्गू दलालों का कब्जा है, अयोध्या नगर में ऐसे अनेक भवन हैं जिनपर बाहरी लोगों के वर्षों से कब्जे हैं,किश्तें भी हाऊसिंग बोर्ड को नहीं मिल रही हैं।
ऐसे में सवाल ये पैदा होता है कि हाउसिंग बोर्ड को चूना लगाने वाले तृप्ती श्रीवास्तव, राजेश शुक्ला, उमाकांत बाथम और निकोसे की चौकड़ी को शासन तोड़ पायेगा या……?
मध्यप्रदेश गृह निर्माण एवं अधो संरचना विकास मंडल की मुख्य प्रशासकीय अधिकारी तृप्ती श्रीवास्तव को कई बार फोन लगाया पर फोन रिसीव नहीं किया।
जबकि सहायक जनसंपर्क अधिकारी मध्य प्रदेश गृह निर्माण अधो संरचना विभाग मंडल भोपाल प्रशांत मिश्र ने कहा कि इस तरह की कोई शिकायत मेरे पास नहीं आती है, अगर शिकायत आई भी होगी तो वरिष्ठ अधिकारियों के पास होगी।
कुल मिलाकर यह देखना दिलचस्प होगा कि ईमानदार सरकार देने का दावा करने वाली भारतीय जनता पार्टी की डॉ मोहन यादव की सरकार इस घनघोर भ्रष्टाचार पर कब टेढ़ी दृष्टि डालते हुए भ्रष्टाचार में आकंठ डूबे अधिकारियों को सजा दिलाने का काम करते हैं।




