(आलोक तिवारी)
(मथुरा)
*डायरेक्टर हायर एजुकेशन ने आरटीआई में कहा – “यह पत्र हमारे विभाग से जारी नहीं हुआ था”
*बीएसए कॉलेज मथुरा की लगभग 14.5 एकड़ भूमि को अवैध रूप से अलग करके “इंजीनियरिंग कॉलेज” के नाम पर उपयोग करने का मामला गंभीर मोड़ ले चुका है।अब यह सिद्ध हो गया है कि जिस सरकारी पत्र का हवाला देकर जमीन अलग की गई थी, वह पत्र पूरी तरह फर्जी था।यह खुलासा उच्च शिक्षा विभाग द्वारा प्रदान किए गए दो महत्वपूर्ण आधिकारिक पत्रों से हुआ है, जिनकी कॉपियाँ अब सामने आई हैं।बीएसए कॉलेज को केवल फैकल्टी के रूप में इंजीनियरिंग कॉलेज चलाने की अनुमति थी।वर्ष 1999–2000 के इस पत्र में स्पष्ट लिखा है कि—बीएसए कॉलेज की भूमि और भवन का स्वामित्व महाविद्यालय का ही रहेगा,केवल “बीएसए कॉलेज के अंतर्गत फैकल्टी के रूप में” इंजीनियरिंग कॉलेज संचालित किया जा सकता है,भूमि अलग करने या स्वतंत्र इंजीनियरिंग कॉलेज बनाने की कोई अनुमति नहीं थी।इससे स्पष्ट है कि जमीन अलग करना नियमविरुद्ध था।दिनांक 19.09.2025 के पत्र में संयुक्त निदेशक (उ.शि.) ने RTI के उत्तर में साफ लिखा है कि “28.10.1999 का पत्र संख्या 10050/52 हमारे अभिलेखों में उपलब्ध नहीं है और न ही हमारे कार्यालय से निर्गत हुआ है।

”यह आधिकारिक टिप्पणी सीधे संकेत करती है कि—जिस पत्र को आधार बनाकर 14.5 एकड़ भूमि अलग की गई, वह पत्र फर्जी था।दस्तावेजों से यह भी स्पष्ट है कि फर्जी पत्र दिखाकर जमीन को “अलग परिसर” के रूप में दर्ज कराया गया,इंजीनियरिंग कॉलेज को स्वतंत्र संस्था की तरह संचालित करना शुरू किया गया,जबकि अधिकृत अनुमति केवल फैकल्टी के रूप में संचालन की थी।विशेषज्ञों के अनुसार यह भूमि हस्तांतरण कानूनी रूप से भ्रष्टाचार की श्रेणी,और भूमि कब्जा (Land Misappropriation) माना जाएगा।पत्रों से यह तो सिद्ध हो गया कि दस्तावेज फर्जी था,अब सबसे बड़ा प्रश्न यह है कि—फर्जी पत्र किसने बनाया,भूमि अलग करने की अनुमति किसने दी,विभागीय जांच वर्षों तक क्यों नहीं की गई?यह मामला अब प्रशासन और विश्वविद्यालय के लिए गंभीर चुनौती बन गया है।शिक्षक समुदाय और अभिभावकों का कहना है कियह सामान्य प्रशासनिक त्रुटि नहीं, बल्कि सुनियोजित फर्जीवाड़ा है,जिसमें कॉलेज की करोड़ों की भूमि अवैध रूप से अलग की गई।

यह पूरा खेल “श्री अग्रवाल शिक्षा मंडल” से जुड़े लोगों द्वारा किया गया।उन्होंने शासन और मुख्यमंत्री से उमाशंकर अग्रवाल ,किशोर कुमार कोयलेवाला एवं अन्य के खिलाफSIT / STF जाँच,भूमि पुनर्स्थापन और फर्जी पत्र तैयार करने पर FIR की माँग की ।




