(मुकेश शर्मा)
(ग्वालियर)
भिण्ड कलेक्टर के स्टेनो का है मामला जो कि नियम विरुद्ध तरीके से 18 वर्षों से जमे हैं एक ही स्थान पर
जी यहां हम चर्चा कर रहे हैं अंचल के भिण्ड जिले में सरकारी कर्मचारियों और अधिकारियों के दूसरे विभागों में अनुलग्न यानि अटैचमेंट की।अंचल के भिंड जिले में सरकार के नहीं बाबुओं के स्वयं के बनाए नियम और कानून चलते हैं! यहां पदस्थ बाबू इतनी मनमानी करते हैं कि अधिकारियों को गुमराह कर जनता को रक्त के आंसू रोने को मजबूर कर देते हैं।
हम प्रश्न खड़ा कर रहे हैं भिंड कलेक्टर के स्टेनो राजकुमार गुप्ता की कलेक्ट्रेट में पदस्थपना/अटैचमेंट पर जो विगत 18 वर्षों से भिण्ड कलेक्टर के यहां बतौर स्टेनो पदस्थ हैं इस दौरान कई कलेक्टर आये और गये पर गुप्ता जी..?
वैसे तो भिण्ड जिला कलेक्टर भू माफिया और रेत माफिया पर अंकुश लगाने का कलेक्टर प्रयास कर रहे हैं और कुछ हद तक सफल भी हो रहे हैं पर ऐसा प्रतीत हो रहा है कि जिलाधीश एक स्टेनो के सामने बेवस नजर हैं।
जिले की लहार तहसील के सिचाई विभाग के स्टेनो राजकुमार गुप्ता 18 वर्षो से लगातार नियम विरुद्ध कलेक्टर के स्टेनो बने हुए हैं।अब सवाल यह खड़ा होता है कि शासन की ऐसी क्या मजबूरी है जो राजकुमार गुप्ता ही जरूरी है?जबकि राजस्व विभाग में राजकुमार गुप्ता से सीनियर और योग्य स्टेनो मौजूद हैं फिर सिचाई विभाग के स्टेनो पर प्रशासनिक बरदहस्त और खुलेदिल मेहरबानी क्यों।
राजकुमार गुप्ता को शासन प्रशासन के दर्जनों आदेशों के बाद सिचाई विभाग लहार को जिला प्रशासन ने वापस नहीं किया है ,इस बात से लगता है कि मामले में कुछ न कुछ तो है।स्टेनो राजकुमार गुप्ता को शासन मूल विभाग में वापिस भेजेगा या अपनों पर मेहरबानी जारी रहेगी क्योंकि राजकुमार गुप्ता एक भाजपा नेता के रिश्तेदार होने के साथ साथ पूर्व नेता प्रतिपक्ष डॉ गोविंद सिंह के भी खास हैं तभी तो गुप्ता के सिचाई विभाग से राजस्व विभाग में संविलियन के लिए पत्र लिखा था।
अब जब मामला मुख्यमंत्री डॉक्टर मोहन यादव के संज्ञान में पहुंच चुका है और बीते विधानसभा सत्र में चंबल संभाग में अन्य विभागों में अटैच कर्मचारियों को उनके मूल विभाग में वापस भेजने और संख्या बताने के लिए कांग्रेस विधायक डॉ सतीश सिकरवार विधानसभा में प्रश्न भी लगाया था लेकिन तत्कालीन कलेक्टर संजीव श्रीवास ने विधानसभा को गलत जानकारी देकर प्रदेश के उच्च सदन को गुमराह कर गुप्ता को बचा लिया और स्वयं बलि चढ़ गए।
अब देखना महत्त्वपूर्ण हो जाता है कि विधानसभा और मुख्यमंत्री के आदेशों,निर्देशों का पालन होता है या नहीं।

कलेक्टर, निर्वचन यातायात जिला भिंड के आदेश क्यू/निर्वाचन/याता०/2008/1717 दिनांक 6.10.2008 द्वारा यातायात शाखा में 7 कर्मचारियों को अटैच किया गया था। जिसमें से 6 कर्मचारियों को चुनाव बाद विभाग में वापिस कर दिया गया वहीं राजकुमार को अटैच बनाए रखा गया है। इसके बाद इन्हें नियम विरुद्ध तरीके से स्टेनो तो कलेक्टर के पद पर पदस्थ किया गया। बाद में 1 वर्ष के लिए री डिप्लॉयमेंट किया गया तथा इसके बाद निर्वाचन कार्य में संयोजित किया गया। वर्तमान में इनका स्टेनो पद के लिए कोई आदेश भी नही है इसके बाद भी इनके द्वारा कार्य किस आधार पर किया जा रहा है। जबकि वर्तमान आदेश अनुसार राजकुमार 3 निर्वाचन कार्य के लिए संयोजित हैं स्टेनो के लिए नहीं।
इस बाबत कलेक्टर भिण्ड किरोड़ी लाल मीणा का कहना है कि विधानसभा में क्या प्रश्न लगा था और उसका तत्कालीन कलेक्टर ने क्या जवाब दिया या राजकुमार गुप्ता कबसे अटैच हैं मुझे कोई जानकारी नहीं है।




