(मुकेश शर्मा)
(ग्वालियर)
वसूली की बात मेरी जानकारी मे नही है जॉच कर करूंगा कार्यवाही: डीके शर्मा
तीन दशकों से कृषि उपज मण्डी समिति आलमपुर में जमे हैं कर्मी पर कार्रवाई है सिफर
मध्यप्रदेश के भिण्ड जिले की लहार तहसील के अंतर्गत आनेवाली कृषि उपज मंडी समिति आलमपुर एवं उप मंडी दबोह में पदस्थ लिपिक नरेंद्र कौरव पर कृषि विपड़न बोर्ड कबतक अपनी कृपा बरसाता रहेगा।
यह बात अब क्षेत्र तो छोड़ो भोपाल मुख्यालय में भी जन चर्चा का विषय बन चुकी है।
बीते लगभग तीन दशकों से कृषि उपज मंडी समिति आलमपुर जमे लिपिक नरेन्द्र कौरव ने कृषि उपज मंडी समिति आलमपुर एवं अधीनस्थ उप मंडी दबोह को भ्रष्टाचार का नरक कुंड बना रखा है जिसमें उनकी चौकड़ी जमकर गोते लगा रही है।
खबर है कि कुछ वर्ष पहले लिपिक नरेंद्र कौरव का स्थानांतरण भी हुआ था परंतु पैसों और राजनैतिक पहुंच के आगे मध्यप्रदेश कृषि विपड़न बोर्ड विवश हो गया और तीन महीने से पहले कौरव की स्थानीय कृषि उपज मंडी में वापसी हो गई।दशकों जमे लिपिक नरेंद्र कौरव के कुकृत्ययों से आलमपुर मंडी एवं उप मंडी दबोह में भय एवं आतंक का माहौल है।
क्योंकि कौरव एक तो स्थानीय हैं दूसरे उनके कांग्रेस के स्थानीय वरिष्ठ नेता से मधुर संबंध हैं, इसलिए दर्जनों शिकायतों के बाद भी कृषि विपड़न बोर्ड नरेंद्र कौरव का स्थानांतरण करने में बेबस नजर आ रहा है। अब देखना यह है कि शासन,प्रशासन, विभागीय मंत्री, अप्रत्यक्ष रूपसे प्रदेश की मंडियां संभाल रहे मंत्री पुत्र, उप संचालक ग्वालियर चंबल संभाग डी के शर्मा या मंडी बोर्ड के एमडी कुमार पुरुषोत्तम की आलमपुर कृषि उपज मंडी एवं उप मंडी दबोह में दशकों से पदस्थ लिपिक कौरव को हटा पाएंगे या…?
कृषि उपज उपमंडी दबोह में अनियमित ताओं का आलम यह है कि डाक बोली लगाने बाले कर्मचारी की ड्यूटी कौन लगाता है तथा बो कर्मचारी किस पद पर पदस्थ है कोई जबाब देने को तैयार नहीं है।इसके अलावा कृषि उपज आलमपुर एवं उपमंडी दबोह का गेट पास प्रभारी कौन है इसकी भी जानकारी मंडी सचिव के पास नहीं है। आलमपुर मंडी एवं उपज उप मंडी दबोह में फ़सल बेचने बाले किसान व्यापारियों से इतने परेशान हैं कि व्यापारी आढ़त काटकर किसानों को नगद भुगतान कर रहे हैं ।नकद भुगतान का आदेश व्यपारियों को किसने दिया इस सवाल पर व्यापारी बगले झांकने लगते हैं। निश्चित तौर पर नकद भुगतान करने में मंडी अधिकारियों की सांठ गांठ होगी।
आलमपुर दबोह मंडियों मैसे मंडी कर्मचारियों की मिली भगत से रात में बगैर गेट पास के कृषि उपज से भरे सैकड़ों वाहन चोरी से निकल रहे हैं।सूत्र बताते हैं इन वाहनों को निकलवाने में लिपिक नरेंद्र कौरव का व्यापारियों को सीधा संरक्षण है?
इतना ही नहीं कृषि उपज उप मंडी दबोह में कच्ची रसीदों पर व्यापारी भुगतान कर रहे हैं। उप मंडी दबोह में अनियमितताओं का आलम यह है कि व्यापारी सीधे तौर पर बिना डाक बोली के कृषि उपज की खरीदी कर रहे हैं क्या वरिष्ठ अधिकारियों को इस बात की भनक नहीं होगी?
क्या मंडी सचिव और अन्य वरिष्ठ अधिकारियों द्वारा आलमपुर मंडी एवं दबोह उप मंडी का नियमित निरिक्षण है किया जाता है।
एक गंभीर सवाल ये भी है कि उप मंडी दबोह में अधिकतर उत्तरप्रदेश के व्यापारी नियम विरुद्ध खरीदी कर रहे हैं जिसके संवाददाता के पास वीडियो फोटो हैं,परंतु यह मामला मंडी सचिव और वरिष्ठ अधिकारियों के संज्ञान में शायद नहीं है?
सूत्र बताते हैं कि लिपिक नरेन्द्र कौरव द्वारा इसकी व्यवस्था की जाती है और व्यवस्था के नाम पर 50 हजार रु उप संचालक एवं 50 हजार रु संचालक के नाम से वसूली की जाती है।अब यह वसूली अधिकारियों तक पहुंचती है या कौरव की जेब में जाती है ये बात तो संबंधित व्यक्ति ही जानें पर वसूली होती है ये बात सच है!
आलमपुर कृषि उपज मंडीनिरीक्षक/प्रभारी सचिव ब्रजेन्द्र शाक्य ने सच
मंडी प्रांगण में बने मीटिंग हॉल को ही अपना आशियाना बना रखा है जिससे मीटिंग और अन्य विषयों पर चर्चा करने के लिए बहुत समस्या का सामना करना पड़ता है।
अब ऐसे में सवाल और जन चर्चा दोनों हैं क्या प्रभारी मंडी सचिव को गृह भाड़ा भत्ता नहीं मिलता है तो इसलिये उन्होंने मीटिंग हॉल को अपना निवास बना रखा है।
इस बाबत पूछने पर उपसंचालक कृषि विपणन बोर्ड ग्वालियर चम्बल संभाग डीके शर्मा ने कहा कि कितने बाबू गृह मंडियों में अटैच हैं मैं दिखबाता हूं, इनका ट्रांसफर और अटैच मेंट भोपाल स्तर से होता है,रही बात वसूली की तो यह बात मेरी जानकारी में नहीं है, इसकी जांच कर कार्रवाई करूंगा।




