बालिकाओं के सशक्तिकरण का प्रतीक ‘सुकन्या समृद्धि योजना’लेखक-ओ.पी. पाल

भारत में एक बालिका को सशक्त बनाने की दिशा में भारत सरकार की ‘सुकन्या समृद्धि योजना’ ने 11 साल पूरे कर लिये हैं। बालिकाओं के सशक्तिकरण के साथ परिवार, समुदाय और राष्ट्र को सशक्त के लिहाज से ‘सुकन्या समृद्धि योजना’ आज एक राष्ट्रव्यापी आंदोलन बनती नजर आ रही है। इन 11 सालों में भारत सरकार द्वारा अधिसूचित एक लघु बचत योजना के तहत अब तक 4.53 करोड़ से अधिक खाते खोले जा चुके हैं, जिनमें 3.33 लाख करोड़ रुपये से अधिक राशि जमा हो चुकी है। मसलन सुकन्या समृद्धि योजना (एसएसवाई) देश भर में लाखों युवा लड़कियों के लिए आशा और सशक्तिकरण का एक सशक्त प्रतीक बन रही है, जो उनके सपनों को संजोने और उनके भविष्य को सुरक्षित करने की दिशा में जमीनी स्तर पर आत्मविश्वास, समावेश और दीर्घकालिक प्रगति की भावना के मार्ग को प्रशस्त कर रही है। यही नहीं सुकन्या समृद्धि योजना, वित्तीय समावेशन, लैंगिक समानता और दीर्घकालिक सामाजिक प्रगति को बढ़ावा देकर परिवारों को अपनी बेटियों के भविष्य में निवेश करने के लिए प्रोत्साहन को बढ़ावा दे रही है।
भारत सरकार ने वैसे तो बालिकाओं की सुरक्षा, शिक्षा और सशक्तिकरण के लिए अनेक लक्षित योजनाएं लागू की हुई हैं, लेकिन ‘बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ’ अभियान के तहत 22 जनवरी 2015 को शुरु की गई सुकन्या समृद्धि योजना ऐसी है, जिसने 22 जनवरी 2026 को 11 साल का सफर तय कर लिया है और आज यह योजना देश के लाखों परिवारों में अपनी बेटियों के उज्ज्वल भविष्य में सामूहिक विश्वास का प्रमाण बन चुकी है। यही नहीं, सरकार की यह योजना महज़ बचत के लिए की गई पहल से कहीं अधिक वित्तीय सुरक्षा और सामाजिक परिवर्तन के बीच एक सेतु के रूप में साबित होती दिख रही है। यानी परिवारों को अपनी बेटियों की शिक्षा और कल्याण के लिए जल्दी योजना बनाने के लिए प्रोत्साहित करके उनकी आर्थिक स्थिति के संतुलन को भी नियंत्रित करने का काम कर रही है। एक दशक से अधिक का सफर कर चुकी इस योजना का आर्थिक और सामाजिक महत्व है, क्योंकि यह मात्र एक वित्तीय निवेश नहीं है, बल्कि बालिकाओं के उज्ज्वल और समृद्ध भविष्य को सुरक्षित करने का उत्प्रेरक है। इसका मकसद बालिकाओं की शिक्षा और विवाह के खर्चों को पूरा करना है। शिक्षा, आर्थिक सुरक्षा और आत्मनिर्भरता को बढ़ावा देकर, यह पहल महिला सशक्तिकरण को मजबूत करती है और भविष्य में आत्मनिर्भरता की परिकल्पना में योगदान देती है। खास बात यह है कि बालिकाओं के लिए दीर्घकालिक वित्तीय सुरक्षा के मकसद से बनाई गई सुकन्या समृद्धि योजना उच्च रिटर्न, कर लाभ और शिक्षा तथा भविष्य की जरूरतों के लिए सरल निकासी विकल्प भी प्रदान करती है, जो बालिकाओँ के वित्तीय भविष्य को सुरक्षित करने के लिए कई अन्य लाभ प्रदान करने का विकल्प भी प्रदान करती है।

बालिका की बचत सुरक्षित वृद्धि

इस योजना के तहत माता-पिता और कानूनी अभिभावक एसएसवाई खाते में न्यूनतम 250 रुपए की प्रारंभिक जमा राशि से शुरुआत कर सकते हैं और बाद की जमा राशि 50 रुपए के गुणकों में की जा सकती है, बशर्ते कि एक वित्तीय वर्ष में कम से कम 250 रुपए जमा किए जाएं। कुल वार्षिक जमा सीमा 1,50,000 रुपए है, इससे अधिक राशि पर ब्याज नहीं मिलेगा और उसे वापस कर दिया जाएगा। खाता खोलने की तारीख से अधिकतम 15 वर्षों की अवधि के लिए जमा राशि जमा की जा सकती है। ब्याज की गणना हर महीने की जाती है और प्रत्येक वित्तीय वर्ष के अंत में इसे खाते में जमा कर दिया जाता है। यदि खाता वर्ष के दौरान किसी अन्य बैंक या डाकघर में स्थानांतरित भी कर दिया जाता है, तब भी वित्तीय वर्ष के अंत में ब्याज जमा कर दिया जाता है, जिससे बालिका की बचत में स्थिर और सुरक्षित वृद्धि सुनिश्चित होती है।
ऐसे निकाली जा सकती है राशि
खाताधारक पिछले वित्तीय वर्ष के अंत में उपलब्ध शेष राशि का 50 प्रतिशत तक शैक्षिक उद्देश्यों के लिए निकाल सकता है। यह सुविधा खाताधारक के अठारह वर्ष की आयु प्राप्त करने या दसवीं कक्षा उत्तीर्ण करने पर, जो भी पहले हो, उपलब्ध हो जाती है। आवेदन करने के लिए, खाताधारक को ज़रुरी दस्तावेजों, जैसे कि प्रवेश का पुष्ट प्रस्ताव या शैक्षणिक संस्थान द्वारा जारी शुल्क पर्ची जिसमें ज़रुरी खर्चों का ज़िक्र हो, के साथ एक औपचारिक आवेदन जमा करना होगा। धन की निकासी एकमुश्त या किश्तों में की जा सकती है, लेकिन अधिकतम पाँच वर्षों की अवधि के लिए प्रति वर्ष एक बार निकासी की जा सकती है। सभी मामलों में निकाली गई राशि जमा किए गए दस्तावेजों में दर्शाए गए वास्तविक शुल्क से अधिक नहीं होनी चाहिए।
क्या हैं एसएसवाई खाता खोलने के नियम
एक बालिका का केवल एक एसएसवाई खाता खोला जा सकता है और एक परिवार अधिकतम दो बालिकाओं के लिए खाते खोल सकता है। हालांकि जुड़वां या तीन जुड़वां बच्चों के मामले में, संबंधित जन्म प्रमाण पत्र के साथ शपथ पत्र जमा करने पर दो से अधिक खाते खोलने की अनुमति है। यह खाता भारत में किसी भी स्थान पर स्थानांतरित किया जा सकता है। खास बात यह है कि जब तक बालिका 18 वर्ष की नहीं हो जाती, तब तक खाता माता-पिता अथवा अभिभावक द्वारा प्रबंधित किया जाता है। इससे अभिभावक बचत की निगरानी कर सकते हैं और यह सुनिश्चित कर सकते हैं कि धनराशि का उपयोग बालिका की शिक्षा और भविष्य की ज़रुरतों के लिए प्रभावी ढंग से किया जा रहा है। लेकिन 18 वर्ष की आयु होने पर, खाताधारक लड़की ज़रुरी दस्तावेज जमा करके स्वयं खाते का नियंत्रण अपने हाथ में ले सकती है। भारत सरकार द्वारा अधिसूचित एक लघु बचत योजना के तहत जमा पर सरकार द्वारा समय-समय पर अधिसूचित दरों पर 8.2 प्रतिशत की दर से ब्याज मिलता है और राशि का भुगतान योजना के नियमों के अनुसार किया जाता है। यानी एक कम जोखिम वाली जमा योजना में सरकार मूलधन की गारंटी देती है और ब्याज का भुगतान प्रत्येक तिमाही में निर्धारित दरों के अनुसार वार्षिक रूप से किया जाता है।
योजना की अहम भूमिका
सुकन्या समृद्धि योजना भारत में लड़कियों के लिए एक सुरक्षित और सशक्त भविष्य के निर्माण की दिशा में एक सार्थक कदम साबित हो रहा है। दीर्घकालिक बचत को प्रोत्साहित करके और शिक्षा तथा वित्तीय स्वतंत्रता को सर्वोपरि रखकर, यह योजना परिवारों के भीतर आर्थिक जिम्मेदारी और व्यापक सामाजिक प्रगति दोनों को बढ़ावा दे रही है। पिछले 11 सालों में सुकन्या समृद्धि योजना खातों की संख्या में लगातार हो रही वृद्धि इस पहल पर बढ़ते विश्वास और इसके प्रभाव की तस्वीर पेश कर रही है। मसलन जैसे-जैसे भारत लैंगिक समानता और समावेश की ओर सुदृढ़ हो रहा है, वैसे ही सुकन्या समृद्धि योजना हरेक लड़की को विकास, सफलता और अपनी पूरी क्षमता का एहसास करने के लिए ज़रुरी संसाधन और आत्मविश्वास पैदा करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती नजर आ रही है।

(लेखक स्वतन्त्र पत्रकार हैं)

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