स्मृति शेष लेखक: डॉ के विक्रम राव यह लेख डॉ के विक्रम राव जी की आत्मकथा : “तूफ़ान तो आए कई, झुका न सके!” में से उद्घाटित है। प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी द्वारा भारत पर थोपी गई फासिस्ट इमर्जेंसी के इक्यावंवे वर्ष (51वें) हो गए हैं। कालिखभरी तारकोल से भी ज्यादा काली थी।वह सुबह (बृहस्पतिवार, 26 […] Read more
लेखक-अरविंद जयतिलक 25 जून, 1975, वह काला दिन जब देश की तत्कालीन प्रधानमंत्री श्रीमती इंदिरा गांधी ने लोकतंत्र और अभिव्यक्ति की गर्दन मरोड़कर देश में आपातकाल थोप दिया था। श्रीमती गांधी ने सिर्फ संविधान की धज्जियां ही नहीं उड़ायी बल्कि जनतांत्रिक मूल्यों को भी नजरअंदाज कर मानवीय मूल्यों को निर्ममता से रौंद डाला। देश कराह […] Read more
लेखक -अरविंद जयतिलक आज अंतर्राष्ट्रीय विधवा दिवस है।यह दिन दुनिया भर में लाखों विधवाओं और उनके आश्रितों द्वारा सामना की जाने वाली गरीबी और अन्याय को संबोधित करने के लिए संयुक्त राष्ट्र की कार्यवाही का दिन है। यह दिन विधवाओं के लिए पूर्ण अधिकार और मान्यता प्राप्त करने के लिए कार्यवाही का अवसर का भी […] Read more
(मुकेश सेठ)(मुम्बई) अदालत में रेत जब्ती के केस चल रहे हैं और इसी दौरान रेत चोरी होने से विभाग में मचा हड़कंप जब तक मैं वहां था रेत सुरक्षित थी कहा पूर्व क्षेत्रीय अधिकारी जोन 8 अजय शर्मा ने प्रकरण पुराना है केस में क्या हुआ है देखकर ही बता पाऊंगा क्योंकि अभी मैं यहां […] Read more
लेखक-ओ.पी. पाल दुनियाभर में मानव सभ्यता ने 21वीं सदी में जहां एक ओर तकनीकी और वैज्ञानिक मोर्चे पर अभूतपूर्व प्रगति की है, वहीं दूसरी ओर मानसिक तनाव, जीवनशैली से जुड़ी बीमारियां और आंतरिक अशांति जैसी गंभीर चुनौतियों का सामना भी किया है। भौतिकता की अंधी दौड़ में हांफती हुई मानवता को जब एक ऐसे संबल […] Read more