लेखक-संजय राय
आज जब संसद की कार्यवाही मोबाइल फोन, टीवी और इंटरनेट के माध्यम से देश-दुनिया में कहीं भी लाइव देखी और सुनी जा सकती है, लेकिन यह बात बहुत कम लोगों को पता होगी कि स्वतंत्र भारत के प्रथम राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद ने सात दशक पहले ही ऐसी व्यवस्था का उपयोग शुरू कर दिया था, जिसे आधुनिक दौर की “लाइव ऑडियो स्ट्रीमिंग” का प्रारंभिक रूप कहा जा सकता है।
राष्ट्रपति भवन से 4 अगस्त 1952 को मद्रास राज्य (तमिलनाडु) के राज्यपाल श्री प्रकाश जी को लिखे एक पत्र में डॉ. राजेंद्र प्रसाद ने बताया था कि उन्होंने राष्ट्रपति भवन में ऐसा यंत्र लगवाया है, जिसके माध्यम से लोकसभा और राज्य परिषद (वर्तमान राज्यसभा) की कार्यवाही सीधे सुन सकते हैं। दरअसल, संसद भवन में लगे लाउडस्पीकर सिस्टम से तार जोड़कर यह व्यवस्था राष्ट्रपति भवन तक पहुंचाई गई थी।
डॉ. प्रसाद ने पत्र में लिखा कि इस यंत्र की मदद से वे अपनी इच्छा के अनुसार संसद की कार्यवाही सुन सकते हैं और आवश्यकता पड़ने पर उसे बंद भी कर सकते हैं। उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि पहले वे स्वयं संसद जाकर कार्यवाही सुनने का विचार करते थे, लेकिन सलाह मिलने पर उन्होंने तकनीक का सहारा लिया। परिणामस्वरूप वे राष्ट्रपति भवन में बैठे-बैठे संसद की बहसें अधिक प्रभावी ढंग से सुन पाते थे।
उस दौर में यह व्यवस्था अत्यंत आधुनिक सोच का परिचायक थी। आज जिस प्रकार वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग, वेबकास्टिंग और लाइव स्ट्रीमिंग के जरिए शासन और लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं को लोगों तक पहुंचाया जा रहा है, उसकी शुरुआती झलक डॉ. राजेंद्र प्रसाद की इस पहल में दिखाई देती है।
पत्र में उन्होंने यह भी सुझाव दिया था कि ऐसी व्यवस्था अन्य स्थानों पर भी संभव है और संबंधित तकनीकी विभाग इसके बारे में पूरी जानकारी दे सकता है। यह दर्शाता है कि वे तकनीक को केवल सुविधा का साधन नहीं, बल्कि प्रशासनिक कार्यकुशलता और संवाद को मजबूत करने का माध्यम मानते थे।
इतिहास के पन्नों से सामने आई यह जानकारी बताती है कि डिजिटल इंडिया की अवधारणा भले ही आधुनिक युग की देन हो, लेकिन शासन में तकनीक के उपयोग की दूरदर्शी सोच देश के प्रथम राष्ट्रपति के नेतृत्व काल में भी स्पष्ट रूप से मौजूद थी। 1950 के दशक में संसद की कार्यवाही को दूरस्थ स्थान से सुनने की यह व्यवस्था उस समय की तकनीकी नवाचार भावना का अद्भुत उदाहरण मानी जा सकती है।

(लेखक आज अख़बार के नेशनल ब्यूरो हैं)




