(संजय राय)
(नई दिल्ली)
इंडिया इंटरनेशनल सेंटर में संकासा फाउंडेशन की तरफ़ से आयोजित “अर्थ संवाद सीरीज 1.0” में आर्थिक सुधारों और समावेशी विकास पर दिया गया जोर
भारत को 2047 तक विकसित राष्ट्र बनाने के लक्ष्य को हासिल करने के लिए आर्थिक सुधारों के साथ स्थानीय अर्थव्यवस्थाओं को मजबूत करने, वित्तीय समावेशन बढ़ाने और रोजगार के अवसर पैदा करने की जरूरत है।
नयी दिल्ली स्थित इंडिया इंटरनेशनल सेंटर में मंगलवार को आयोजित ‘अर्थ संवाद सीरीज 1.0’ में अर्थव्यवस्था और विकास से जुड़े विशेषज्ञों ने यह विचार व्यक्त किए।
कार्यक्रम का आयोजन संकासा फाउंडेशन की ओर से किया गया। इस श्रृंखला की परिकल्पना श्रीमती विनीता हरिहरन ने की है, जो पुरस्कार विजेता लोक नीति विशेषज्ञ और भारत सरकार की पूर्व मिशन प्रमुख भी रह चुकी हैं।

संवाद में पूर्व केंद्रीय मंत्री डॉ. संजय पासवान, पूर्व केंद्रीय मंत्री के. जे. अल्फोंस, क्लेस ग्रुप के संस्थापक विनोद थेक्करन, रिसर्च एंड इन्फॉर्मेशन सिस्टम फॉर डेवलपिंग कंट्रीज के प्रतिष्ठित फेलो डॉ. अमिताभ कुंडू तथा ईजीआरओ फाउंडेशन के सीईओ डॉ. चरण सिंह ने भाग लिया।
कार्यक्रम का संचालन विनिता हरिहरन ने किया। उन्होंने भारत की मजबूत आर्थिक बुनियाद का उल्लेख करते हुए कहा कि देश की अर्थव्यवस्था तेजी से आगे बढ़ रही है। उन्होंने कहा कि विकसित भारत 2047 के लक्ष्य के लिए अगले दो से तीन दशकों तक सात से दस प्रतिशत की निरंतर आर्थिक वृद्धि, रोजगार सृजन, समावेशी विकास और सतत आर्थिक विकास जरूरी है। उन्होंने विनिर्माण और बुनियादी ढांचे के साथ-साथ युवाओं को सशक्त बनाने और बाहरी क्षेत्र को मजबूत करने पर भी जोर दिया।
पूर्व केंद्रीय मंत्री डॉ. संजय पासवान ने स्थानीय अर्थव्यवस्थाओं और क्षेत्रीय कौशल को विकसित करने की आवश्यकता बताई। उन्होंने कहा कि देश के विकास के लिए स्थानीय संसाधनों और पारंपरिक ज्ञान का बेहतर इस्तेमाल किया जाना चाहिए। उन्होंने दीनदयाल उपाध्याय की अंत्योदय की अवधारणा को विकसित भारत के लक्ष्य से जोड़ते हुए कहा कि नागरिकों को बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराने के साथ उनकी खुशहाली और आध्यात्मिक चेतना को भी विकास के एजेंडे में शामिल किया जाना चाहिए।
पूर्व केंद्रीय मंत्री के. जे. अल्फोंस ने भारत की मजबूत आर्थिक स्थिति और सरकार के कार्यक्रमों के प्रदर्शन का उल्लेख करते हुए प्रशासनिक सुधार और नौकरशाही में जवाबदेही बढ़ाने पर बल दिया। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री के नेतृत्व में भारत वैश्विक स्तर पर अपनी भूमिका मजबूत कर रहा है और विकसित भारत के लक्ष्य को हासिल करने की दिशा में आगे बढ़ रहा है।

विनोद थेक्करन ने भारत की मुद्रा आपूर्ति, बैंकिंग व्यवस्था और छोटे कारोबारों के लिए ऋण की उपलब्धता पर चर्चा की। उन्होंने कहा कि छोटे कारोबारियों और स्वरोजगार करने वालों के लिए ऋण व्यवस्था को और मजबूत किए जाने की जरूरत है। उनका कहना था कि सहकारी बैंकिंग ढांचे का बेहतर इस्तेमाल कर वित्तीय समावेशन को बढ़ाया जा सकता है।
वहीं, डॉ. अमिताभ कुंडू ने मानव विकास और क्षेत्रीय असमानताओं का मुद्दा उठाया। उन्होंने संयुक्त राष्ट्र के मानव विकास सूचकांक का हवाला देते हुए कहा कि भारत में मानव विकास के क्षेत्र में सुधार हुआ है, लेकिन राज्यों और क्षेत्रों के बीच असमानताओं को कम करना अभी भी बड़ी चुनौती है। उन्होंने कहा कि विकास के लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाना विकसित भारत की दिशा में महत्वपूर्ण कदम होगा।
डॉ. चरण सिंह ने भारतीय बैंकिंग व्यवस्था की मजबूती का उल्लेख करते हुए कहा कि भारत में बैंकिंग क्षेत्र ने वैश्विक संकटों के बावजूद उल्लेखनीय मजबूती दिखाई है। उन्होंने छोटे और मध्यम उद्यमों तक ऋण की पहुंच बढ़ाने तथा उत्पादक क्षेत्रों में वित्तीय संसाधनों के बेहतर इस्तेमाल की आवश्यकता बताई।
कार्यक्रम के अंत में सभी वक्ताओं ने कहा कि विकसित भारत के लक्ष्य को हासिल करने में सरकार के साथ नागरिकों, मीडिया और नागरिक समाज की भी समान भूमिका है। वक्ताओं ने प्रधानमंत्री के नेतृत्व और मार्गदर्शन में सभी हितधारकों के सामूहिक प्रयास से 2047 तक विकसित भारत के लक्ष्य को वास्तविकता में बदलने का विश्वास जताया।





