लेखक -अरविंद जयतिलक
आज देश के प्रधान सेवक नरेंद्र मोदी का जन्मदिन है। देश आज उन्हें ढ़ेरों बधाईयां और शुभकामनाओं से नवाज रहा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 2014 में देश का कमान संभालने के बाद जिस अंदाज में राजनीति के सामंती ढांचे को उखाड़ फेकने के साथ एक समृद्ध भारत की मजबूत नींव रखी, वह आज 12 वर्षों बाद एक बुलंद भारत की शानदार व शक्तिशाली तस्वीर के तौर पर सामने है। कहा जाता है कि अगर देश के किसान समृद्ध और स्वस्थ होंगे तो राष्ट्र के चेहरे पर मुस्कान होगा। अर्थव्यवस्था कुलांचे भरेगी। कल-कारखाने के पहिए नाच उठेंगे और रोजगार का सृजन होगा। विगत 12 वर्षों के कालखंड में प्रधानमंत्री मोदी ने यह कमाल कर दिखाया है। देश के किसानों की आमदनी तेजी से बढ़ी है। वर्ष 2014 में नरेंद्र मोदी के प्रधानमंत्री बनते ही कृषि क्षेत्र में आमूलचुल परिवर्तन का युग प्रारंभ हुआ। कृषि और किसान सरकार की शीर्ष प्राथमिकता में शामिल हुए। किसान कल्याण की भावना सरकार की रीति-नीति व नीयत का हिस्सा बन गया। सरकार किसानों के प्रति संवेदनशील हुई और कल्याणकारी योजनाओं के जरिए उनके विकास में जुट गयी। सरकार ने सबसे पहले देश का भाग्य संरचनात्मक रुप से कृषि और किसानों से जोड़ा और उसके सकारात्मक परिणाम सामने हैं। सरकार ने न्यूनतम समर्थन मूल्य की गणना करते समय ए2$ एफएल फॉर्मूला को अपनाया। सरकार ने कृषि उत्पादन के नकद व अन्य सभी खर्चों समेत किसान परिवार के श्रम के मूल्य को भी जोड़ दिया। इस पहल से किसानों की आमदनी बढ़नी शुरु हो गयी। मोदी सरकार ने कृषि और किसानों की जरुरतों को पूरा करने के लिए ऋण से लेकर सब्सिडी, इंसेटिव और फसल बीमा का लाभ देना शुरु कर दिया। वर्ष 2014 तक जो कृषि बजट 25000 करोड़ से भी कम हुआ करता था सरकार के प्रयास से बढ़कर 1.40 लाख करोड़ तक पहुंच गया। वर्ष 2014 से पहले जो कृषि क्षेत्र संकटग्रस्त और घाटे का सौदा हुआ करता था वह आज मुनाफे के सौदे में तब्दील होने लगा है। किसानों की दशा सुधारने के लिए वर्ष में 6000 रुपए दिए जा रहे हैं। अब राष्ट्रीय आय का लगभग 28 प्रतिशत भाग कृषि आय से प्राप्त होने लगा है। कृषि कार्य हेतु भूमि उपयोग बढ़कर लगभग 44 प्रतिशत हो गया है। सरकारी कामकाज में पारदर्शिता और बिचौलियों की भूमिका समाप्त होने से किसानों को उनके उत्पादों की अच्छी आय मिलने लगी है और उत्तम कृषि उत्पादन ने अर्थव्यवस्था और उद्योग-धंधों का विस्तार किया है। दूसरी ओर भारत तेजी से डिजिटल भारत बन रहा है। आधार और भीम जैसे दो डिजिटल कदमों ने भारत में कामकाज और जीने के तौर-तरीके को आसान किया है। आज देश में 145 करोड़ से अधिक आधार कार्ड धारक और 55 करोड़ से अधिक यूपीआई यूजर्स हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के एक दशक के कालखंड में भारत दुनिया में सर्वाधिक तेजी से बढ़ती हुई अर्थव्यवस्था वाला देश बन गया है। 2014 से पहले औंधे मुंह पड़ी विकास दर, कमरतोड़ महंगाई और उत्पादन में कमी से निपटते हुए मोदी सरकार ने मैक्रो-इकनॉमिक फंडामेंटल्स को मजबूत करते हुए अर्थव्यवस्था को नई उर्जा और ऊंचाई दी है। आज उसी का परिणाम है कि भारत आज दुनिया की चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था का तमगा हासिल कर चुका है। अब भारत से आगे सिर्फ अमेरिका, चीन और जर्मनी की अर्थव्यवस्था है। ब्लुमबर्ग समेत कई आर्थिक संस्थाओं की रिपोर्ट से उद्घाटित हो चुका है कि भारतीय अर्थव्यवस्था ने ऊंची छलांग लगायी है। चालू वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही में भारत की जीडीपी वृद्धि दर 7.8 फीसदी रही है। गत वर्ष भारतीय स्टेट बैंक के आर्थिक अनुसंधान विभाग की रिपोर्ट से भी उद्घाटित हो चुका है कि भारत 2029 तक दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था के रुप में उभर सकता है। यह प्रधानमंत्री मोदी के सतत पयास और ईमानदार नेतृत्व का ही कमाल है। गौर करें तो 2014 में भारत आर्थिक रुप से दसवें पायदान पर था। लेकिन उपभोक्ता खर्च में आई तेजी, घरेलू स्तर पर बढ़ी मांग और सेवा क्षेत्र में लगातार विस्तार ने भारतीय अर्थव्यवस्था को नए मुकाम पर पहुंचा दिया है। आज उसी का नतीजा है कि भारत जी-20 देशों में सबसे तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था वाला देश बन चुका है। आंकड़ों पर गौर करें तो आज भारत में सबसे ज्यादा स्मार्टफोन डेटा उपभोक्ता हैं। सबसे ज्यादा इंटरनेट यूजर्स के मामले में भारत दूसरे स्थान पर है। भारत तीसरा सबसे बड़ा उपभोक्ता बाजार है। इनोवशन इंडेक्स में भारत की रैंकिंग लगातार सुधर रही है। देश में यनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस यानी यूपीआइ के जरिए लेन-देन बढ़ा है। एसबीआई के वर्ष 2024 में यूपीआइ से कुलमिलाकर 228.5 बिलियन से अधिक का लेन-देन हुआ है जिसकी कुल राशि लगभग 299.74 लाख करोड़ रुपए रहा। यह परिदृश्य एक सशक्त और आत्मनिर्भर भारत का प्रकटीकरण है। एक ताकतवर अर्थव्यवस्था और कुशल नेतृत्व का परिणाम है कि आज वैश्विक जगत में भारत की विश्वसनीयता, स्वीकार्यता और मान-सम्मान में चार चांद लगा है। प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में आज भारत की अर्थव्यवस्था 4 ट्रिलियन डॉलर के पार पहुंच चुकी है। प्रति व्यक्ति आय भी एक लाख रुपए से पार है। यह भारत की समृद्धि, ताकत और तरक्की की पहचान है। सच कहें तो आज भारत हर रोज तरक्की की नई इबारत लिख रहा है। कल-कारखाने, उद्योग ध्ंाधें और औद्योगीकरण से विकास का पहिया तेजी से घूम रहा है। औद्योगीकरण और वैश्वीकरण ने भारतीय शिक्षा, विज्ञान व संचार के क्षेत्र को एक नया आयाम दिया है जिसके जरिए वह नए-नए इनोवेशन के जरिए दुनिया को अचंभित कर रहा है। आज देश में कई विश्वस्तरीय विश्वविद्यालय और तकनीकी संस्थान हैं। इनके जरिए आज भारतीय छात्र दुनिया भर में अपनी प्रतिभा का लोहा मनवा रहे हैं। कभी भारत अपने उपग्रह को स्थापित करने के लिए अमेरिका और रुस की मदद लेता था लेकिन आज भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन-इसरो हर रोज नया कीर्तिमान रच रहा है। इसरो के जरिए स्वदेशी उपग्रहों के साथ कई विदेशी उपग्रह एक साथ भेजे जा रहे हैं। प्रधानमंत्री मोदी की सफल कुटनीति से आज अमेरिका, ब्रिटेन, फ्रांस, जापान, जर्मनी, आस्टेªलिया, रुस, यूएई और सऊदी अरब सरीखे देश भारत के करीब आए हैं वहीं चीन और पाकिस्तान को अंतर्राष्ट्रीय मोर्चे पर करारी शिकस्त मिल रही है। किसी भी राष्ट्र की विदेशनीति को प्रभावित करना या अपने अनुकूल बनाना आसान नहीं होता। विशेष रुप से तब जब अमेरिका जैसे ताकतवर देश की विदेशनीति को प्रभावित करना हो अथवा उसे अपने अनुकूल बनाना हो। लेकिन प्रधानमंत्री मोदी ने यह कमाल भी कर दिखाया है। भले ही टैरिफ को लेकर भारत-अमेरिका के बीच तनातनी बनी है लेकिन आज भी भारत का अमेरिका के साथ उतना ही मजबूत संबंध है जितना कि उसके प्रतिद्वंदी रुस के साथ है। भारत अमेरिका के साथ मिलकर सामरिक साझेदारी की नई मिसाल पेश कर रहा है। अमेरिका-भारत रक्षा सौदे का बजट जो पिछले एक दशक में 2008 तक शुन्य था वह आज बढ़कर 20 बिलियन डॉलर के पार पहुंच चुका है। अगर दोनों देशों के बीच इसी तरह सामरिक सामंजस्य और भरोसा बना रहा तो वर्ष 2026 के अंत तक दोनों देशों के बीच रक्षा सौदा 30 बिलियन डॉलर के पार पहुंच सकता है। गौर करें तो आज अमेरिका भारत के साथ मिलिट्री टू मिलिट्री संबंध व सहयोग बढ़ाने की दिशा में काम कर रहा है। रुस के साथ भी भारत का ऐतिहासिक और शानदार संबंध हैं। अमेरिका और चीन के लाख ऐतराज व मनाही के बावजूद भी रुस ने भारत को एस-400 एयर डिफेंस सिस्टम देने की प्रतिबद्धता जताकर साफ कर दिया है कि दोनों देश सदाबहार और भरोसेमंद साथी हैं। प्रधानमंत्री मोदी ने जी-20 समिट, ब्रिक्स समिट और एससीओ समिट के दौरान अपने कुशल नेतृत्व के जरिए अमेरिका, रुस और चीन समेत दुनिया के सभी देशों के साथ गजब की केमेस्ट्री स्थापित की है। सच कहें तो आज भारत राष्ट्र प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में नित-नई ऊंचाइयों को छू रहा है जिससे दुनिया भर में भारत का गौरव-गान बढ़ा है।

(लेखक राजनीतिक व सामाजिक विश्लेषक हैं)





