(राजेश बैरागी)
(गौतम बुद्ध नगर)
यह बिल्डिंग वास्तव में अवैध थी क्योंकि इसमें प्राधिकरण के अधिकारी की भी हिस्सेदारी है
11 सितंबर को नोएडा प्राधिकरण ने हाजीपुर गांव के खसरा संख्या 412 पर अधूरे बने खड़े जिस पांच मंजिला कॉमर्शियल कॉम्प्लेक्स को तोड़ा है, उसमें खास क्या है? इस बिल्डिंग पर 12 अप्रैल 2023 से चला आ रहा सिविल जज सीनियर डिवीजन कोर्ट का एकपक्षीय स्थगनादेश गत 17 अगस्त को प्राधिकरण की प्रभावी पैरवी के फलस्वरूप निरस्त हो गया था। यह समाचार सर्वप्रथम नेक दृष्टि ने गत 18 अगस्त को “सेक्टर 104 गांव हाजीपुर की लगभग आठ हजार वर्गमीटर भूमि पर स्थगनादेश खारिज,अब होगी ध्वस्तीकरण की कार्रवाई” शीर्षक से प्रकाशित किया था। इसके बावजूद अपनी ही भूमि पर अवैध रूप से बने इस पांच मंजिला अधूरे कॉमर्शियल कॉम्प्लेक्स को ढहाने की कार्रवाई करने में प्राधिकरण को पच्चीस दिन लगे। इस बीच उच्च न्यायालय से स्थगनादेश या यथास्थिति का आदेश न लाने के लिए प्राधिकरण को इस भवन को बनाने वाले भूमाफियाओं निश्याम बिल्डकॉन प्राइवेट लिमिटेड तथा हिमश्री हिमालय बिल्डटेक प्राइवेट लिमिटेड का धन्यवाद ज्ञापित करना चाहिए। हालांकि सूत्रों का दावा है कि प्राधिकरण की अर्जित कब्जा प्राप्त इस 7950 वर्गमीटर भूमि पर एक मॉल नुमा इमारत बनाने में प्राधिकरण के ही सिविल इंजीनियरिंग विभाग के कुछ अधिकारी शामिल रहे हैं। अवैध बिल्डर के माध्यम से प्राधिकरण की भूमि पर अवैध कब्जा कर अपनी अवैध आमदनी खपाने और प्राधिकरण में रहकर उसे संरक्षण देने का यह कोई अकेला मामला नहीं है। करोड़ों अरबों रुपए की प्राधिकरण की अनेक भूमि पर पर्दे के पीछे से प्राधिकरण के अधिकारियों के ही कब्जे बने हुए हैं।खोड़ा से शुरू हुआ यह सिलसिला सदरपुर,बरोला,छलेरा,भंगेल,गेझा और फेज दो व तीन के गांवों में बदस्तूर जारी है। हालांकि इस इमारत पर बुलडोजर कार्रवाई करने वाले प्राधिकरण के मुख्य कार्यपालक अधिकारी से लेकर महाप्रबंधक सिविल तक की बहादुरी प्रशंसनीय है। आमतौर पर प्राधिकरण अधिकारी ऐसी कार्रवाई करने से बचते हैं।





