(आलोक तिवारी)
(मथुरा)
हाइवे पर एक ट्रक चालक द्वारा वाहन को साइड न देने पर चार हमलावरों ने उतारा था मौत के घाट
हाईवे पर एक ट्रक चालक को साइड न देने की कीमत जान देकर चुकानी पड़ी, और सवाल यह है कि यदि वीडियो वायरल न होता तो क्या यह मामला भी फाइलों में दबा रह जाता? जयगुरूदेव आश्रम के पास हुई यह सनसनीखेज वारदात सिर्फ एक हत्या नहीं, बल्कि कानून-व्यवस्था की असलियत उजागर करने वाला मामला है।
दिनदहाड़े सड़क पर दबंगों ने ट्रक चालक को केबिन से घसीटकर लाठी-डंडों और लोहे के पाइप से पीटा। तमाशबीन बने लोग देखते रहे, और हमलावर बेखौफ होकर मौत का तांडव मचाते रहे। अंततः घायल चालक की मौत हो गई और मामला सीधे हत्याकांड में बदल गया।
अब हरकत में पुलिस, लेकिन सवाल बाकी
थाना हाईवे पुलिस ने मु0अ0सं0 117/2026 के तहत चार अभियुक्तों को गिरफ्तार कर लिया है। घटना में प्रयुक्त कार, डंडा और लोहे का पाइप बरामद किए गए हैं। यह कार्रवाई सराहनीय है, लेकिन केवल गिरफ्तारी से न्याय पूरा नहीं होता।
सबसे बड़े सवाल अब भी कायम हैं—क्या इस मामले में लगाई गई धाराएं अपराध की गंभीरता के अनुरूप हैं?,क्या पुलिस यह सुनिश्चित करेगी कि मामला कानूनी दांवपेच में कमजोर न पड़े?
क्या अन्य हमलावरों पर भी उतनी ही तेजी से शिकंजा कसेगा?
पुलिस प्रशासन की जवाबदेही तय हो
यह वारदात सार्वजनिक हाईवे पर हुई।
उस वक्त पुलिस गश्त कहां थी?
इतनी देर तक हिंसा कैसे चलती रही?
दबंग इतने निडर क्यों थे कि कानून का नाम भी नहीं लिया?
ये सवाल केवल खबर के नहीं, जनविश्वास के सवाल हैं।
दबंगई पर निर्णायक प्रहार जरूरी
रोड रेज अब मामूली अपराध नहीं रहा। यह दबंगई से उपजी हिंसा है। यदि इस मामले में
चार्जशीट कमजोर हुई,
गवाहों को सुरक्षा नहीं मिली,
या आरोपियों को जल्द राहत मिल गई,
तो यह संदेश जाएगा कि सड़क पर ताकतवर ही कानून तय करता है।
अब नजरें पुलिस की अगली कार्रवाई पर
पुलिस प्रशासन के पास मौका है कि वह इस हत्याकांड को नज़ीर बनाए। ऐसी नज़ीर, जिससे सड़क पर दबंगई करने से पहले लोग कानून को याद करें। अब जरूरत है कड़ी धाराओं, मजबूत विवेचना और समयबद्ध कार्रवाई की।
क्योंकि अगर आज कानून ने पूरी ताकत नहीं दिखाई, तो कल किसी और सड़क पर फिर वही खून बहेगा।
अब सवाल साफ है—क्या पुलिस इस बार सिर्फ गिरफ्तारी पर रुकेगी, या सख्त सजा तक पहुंचेगी?




