(मुकेश सेठ)
(मुम्बई)
वर्ष 2013 में पृथ्वीराज चव्हाण ने मुख्यमंत्री रहते इनके जन्मदिन को घोषित किया था “मराठी भाषा दिवस”
नरेंद्र मोदी सरकार ने वर्ष 2024 में मुख्यमंत्री देवेन्द्र ए के प्रस्ताव पर मराठी भाषा को घोषित किया “अभिजात् भाषा”
साहित्यकार विष्णु वामन शिरवाडकर को वर्ष 1987 ज्ञानपीठ पुरस्कार,1991 में पद्म भूषण, साहित्य अकादमी पुरस्कार हुए था प्राप्त
आज 27 फ़रवरी को मराठी भाषा दिवस महाराष्ट्र में उत्साह पूर्वक मनाया जाता है।
राज्य सरकार तथा विभिन्न संस्थाओं द्वारा कार्यक्रमों के जरिए देश की समृद्ध और अभिजात् भाषा के रूप में मान्य मराठी भाषा के उन्नयन हेतु संकल्पित रहती है।
विदित हो कि प्रत्येक वर्ष 27 फरवरी को मनाए जाने वाले इस दिन को महान मराठी कवि और साहित्यकार पद्म भूषण विष्णु वामन शिरवाडकर(कुसुमाग्रज) की जयंती के रूप में मनाया जाता है।
इस दिन विद्यालयों,महाविद्यालयों में भाषण, कविता पाठ, निबन्ध प्रतियोगिता के साथ ही मराठी साहित्य और संस्कृति पर आधारित अनेकानेक आयोजन होता है।
उनका जन्म नाशिक में 27 फरवरी को हुआ और निधन 10 मार्च वर्ष 1999 में नाशिक में ही हुआ था।
विष्णु वामन शिरवाडकर बचपन से ही साहित्य और सामाजिक विषयों में रुचि रखने लगें जिसके चलते वह मराठी भाषा के उद्भट कवि,साहित्यकार, नाटककार व उपन्यासकार माने जाते हैं।
उनके द्वारा वर्ष 1942 में लिखित कविता “विशाखा” स्वतंत्रता सेनानियों में राष्ट्र प्रेम का उबाल ला देती रही तो वहीं नाटक “नट सम्राट” और “विश्वस्त” उनकी ही नहीं अपितु महाराष्ट्र के साहित्य जगत में कालजयी रचना मानी जाती है।
मूर्धन्य कुसुमाग्रज वर्ष 1987 में साहित्य जगत में “ज्ञानपीठ” सम्मान से सुशोभित किया गया, वर्ष 1991 में भारत सरकार द्वारा “पद्म भूषण” फ़िर साहित्य अकादमी पुरस्कार से सम्मानित किया गया।
उनके जन्मदिवस को “मराठी भाषा दिवस” मनाने की राजाज्ञा वर्ष 2013 में कांग्रेस, राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी की गठबन्धन वाली पृथ्वीराज चव्हाण के मुख्यमंत्रित्व काल में महाराष्ट्र सरकार ने से उनके अमूल्य योगदान को देखते हुए आधिकारिक रूप से “मराठी राजभाषा दिवस” घोषित किया था।
वहीं वर्ष 2024 में मुख्यमंत्री देवेन्द्र फडणवीस के प्रस्ताव के पश्चात केन्द्र की नरेंद्र मोदी सरकार ने इसे देश की प्राचीन भाषा में से एक मानते हुए मराठी भाषा को अभिजात्य वर्ग की भाषा का दर्ज़ा दिया।
मालूम हो कि मराठी भाषा का महत्व भारत की प्रमुख भाषाओं में से एक है और मुख्य रूप से महाराष्ट्र राज्य में बोली जाती है। यह भाषा लगभग लगभग 9 करोड़ लोगों की मातृभाषा है। मराठी की समृद्ध साहित्यिक परंपरा संत ज्ञानेश्वर, तुकाराम, नामदेव से लेकर आधुनिक साहित्यकारों तक फैली हुई है।
मराठी भाषा में भक्ति साहित्य, सामाजिक सुधार, नाटक, कविता और उपन्यास की अनमोल धरोहर है। इस भाषा ने समाज में जागरूकता और सांस्कृतिक एकता को मजबूत किया है।
विष्णु वामन शिरवाडकर का ने अपनी रचनाओं के माध्यम से समाज में नैतिकता, समानता और शिक्षा पर जहां बल दिया है तो वहीं कुसंस्कृतियों को दूर करने की अलख भी जगाई।
सोशल मीडिया और सांस्कृतिक मंचों पर मराठी भाषा के महत्व को साझा किया जाता है।
मराठी भाषा लगभग 2 हज़ार वर्ष प्राचीन भाषा मानी जाती है और मराठी दिवस केवल एक महान शख्सियत के जन्मदिन का उत्सव नहीं, बल्कि अपनी मातृभाषा के सम्मान और संरक्षण का संकल्प भी है।




