(लव जांगिड़)
(बाड़मेर)
प्रभारी मंत्री को IFWJ जैसलमेर ने कलेक्टर के खिलाफ जांच की मांग का सौपा ज्ञापन मंत्री ने कहा इस प्रकरण में मिलूंगा सीएम से
IFWJ के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष/प्रदेश अध्यक्ष उपेन्द्र सिंह राठौड़ के दो दशक पुराने रेस्टोरेंट को नियम विरुद्ध जेसीबी के जरिए तोड़ा
जैसलमेर कलेक्टर की मनमानी, हठधर्मिता एवं वरिष्ठ पत्रकार उपेंद्र सिंह राठौड़ के साथ हुए प्रशासनिक अन्याय की निष्पक्ष जांच कर दोषियों के विरुद्ध कार्रवाई एवं कलेक्टर को निलंबित करने की मांग को लेकर गुरुवार को प्रभारी मंत्री जोराराम कुमावत को इंडियन फेडरेशन ऑफ वर्किंग जर्नलिस्ट बाड़मेर इकाई द्वारा ज्ञापन सौंपा गया। बाड़मेर ईकाई जिलाध्यक्ष लव जागिंड़ ने बताया कि प्रदेश सोशल मिडिया प्रभारी प्रवीण बोथरा एवं प्रदेश कार्यसमिति सदस्य प्रेमदान देथा ने प्रभारी मंत्री से बात करते हुए निष्पक्ष जांच की मांग की। इस पर प्रभारी मंत्री की ओर से आश्वस्त किया गया कि पूरे मामले की जांच करवाने की बात मुख्यमंत्री से करेंगे एवं जो भी इसमें दोषी होगा उनके खिलाफ कानुनी कार्यवाही अमल में लाई जाएगी। ज्ञापन में बताया गया कि जैसलमेर में वरिष्ठ पत्रकार एवं इंडियन फैडरेशन ऑफ वर्किंग जर्नलिस्ट्स (आईएफडब्ल्यूजे) के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष एवं राजस्थान प्रदेश अध्यक्ष उपेंद्र सिंह राठौड़ के साथ जिस प्रकार प्रशासनिक स्तर पर द्वेषपूर्ण, एकपक्षीय एवं दमनात्मक कार्यवाही की गई है, वह न केवल पत्रकारिता की स्वतंत्रता पर हमला है, बल्कि प्रशासनिक निरंकुशता का भी स्पष्ट उदाहरण है।
राठौड़ वर्ष 2004 से विधिवत अनुमति के आधार पर जैसलमेर में “डेजर्ट“ क्लब के समीप आवंटित भू-खंड पर अपना रेस्टोरेंट संचालित कर रहे थे। उन्होंने अपने निजी व्यय से सभी आवश्यक व्यवस्थाएं विकसित कीं तथा विगत लगभग 22 वर्षों से नियमित रूप से किराया एवं अन्य देयकों का भुगतान किया। किन्तु वर्ष 2025 के नवंबर माह में बिना किसी लिखित आदेश एवं स्पष्ट कारण बताए मात्र मौखिक रूप से तीन दिवस में रेस्टोरेंट खाली करने के निर्देश दिए गए, जो पूर्णतः असंवैधानिक एवं मनमाने थे। न्यायालय से स्थगन आदेश प्राप्त होने के बावजूद प्रशासन द्वारा लगातार प्रताड़नात्मक कार्यवाहियां जारी रखी गईं, जिसमें 23 दिसम्बर को पूरी प्रशासनिक मशीनरी को झोंक कर कमर्शियल गैस सिलेंडरों की जब्ती, किचन सील करना, लाइसेंस नवीनीकरण रोकना एवं पर्यटकों को हतोत्साहित करना शामिल है।
सबसे गंभीर तथ्य यह है कि 18 फरवरी को जैसलमेर कलेक्टर की हठधर्मिता एवं मनमानी के चलते भारी बंद रेस्टोरेंट का सारा सामान बड़ी ही बेकद्री से जब्त कर लिया गया और फिर 17 मार्च को भारी पुलिस बल की मौजूदगी में रेस्टोरेंट के पीछे की दीवार को तोड़कर चोरी-छिपे दो जेसीबी मशीनों की सहायता से “स्वाद रेस्टोरेंट” को अंदर से जबरन तोड़ दिया गया, जिससे तकरीबन सवा करोड़ रुपए का आर्थिक नुकसान हुआ। यह कार्रवाई न केवल न्यायालय की भावना के विपरीत प्रतीत होती है, बल्कि एक स्थापित व्यवसाय को सुनियोजित तरीके से समाप्त करने का प्रयास भी दर्शाती है।
ज्ञापन में कहा गया कि पूरी कार्यवाही एक स्वतंत्र एवं निर्भीक पत्रकार की आवाज को दबाने एवं उन्हें आर्थिक व मानसिक रूप से प्रताड़ित करने के उद्देश्य से की गई है। यह लोकतंत्र में अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता एवं निष्पक्ष प्रशासन के सिद्धांतों के विपरीत है।




