(संजय राय)
(नई दिल्ली)
पूर्व राष्ट्रपति ने भारतीय विद्या भवन के दिल्ली केंद्र में किया आईआईएफआर का उद्घाटन
पूर्व राष्ट्रपति राम नाथ कोविंद ने नई दिल्ली में भारतीय विद्या भवन के दिल्ली केंद्र में इंटरनेशनल इंस्टीट्यूट फॉर फैकल्टी एंड रिसर्च (आईआईएफआर) का उद्घाटन किया। यह भारत का पहला संस्थान है जो विशेष रूप से फैकल्टी उत्कृष्टता, अनुसंधान क्षमता और शैक्षणिक नेतृत्व के लिए समर्पित है।
आईआईएफआर का लक्ष्य शिक्षकों और विद्वानों की आने वाली पीढ़ियों को प्रेरित करना और भारत को ज्ञान के वैश्विक केंद्र के रूप में स्थापित करना है।
इस अवसर पर अपने संबोधन में राम नाथ कोविंद ने अपने जीवन का उदाहरण देते हुए बताया कि कैसे एक छोटे से गाँव का बच्चा शिक्षा के माध्यम से राष्ट्रपति भवन तक पहुँच सकता है। उन्होंने कहा कि भारतीय परंपरा में गुरु का स्थान ईश्वर से भी ऊपर है। वे चरित्र निर्माण और जिज्ञासा को प्रोत्साहित करने वाले मार्गदर्शक हैं।

कोविंद ने कहा कि सीखना जीवन भर चलने वाली प्रक्रिया है। शिक्षकों को भी तेजी से बदलती दुनिया में खुद को अपडेट रखना अनिवार्य है। उन्होंने कहा कि ‘वसुधैव कुटुंबकम’ की भावना के साथ, आईआईएफआर ग्लोबल साउथ के देशों के विद्वानों को एक मंच प्रदान करेगा।
वहीं, भारतीय विद्या भवन के उपाध्यक्ष एवं पूर्व राज्यपाल बी. एल. पुरोहित ने प्रधानमंत्री मोदी के ‘विश्व गुरु’ के सपने को पूरा करने के लिए समर्थन का आह्वान किया। उद्योग जगत के अनुभवी पेशेवरों को शिक्षा के क्षेत्र में लाने के लिए कई अन्य वक्ताओं ने इस पहल की सराहना की ताकि, छात्रों को व्यावहारिक अनुभव मिल सके।

बता दें कि यह संस्थान राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के व्यावहारिक कार्यान्वयन, विशेष रूप से बहु-विषयक शिक्षा और अनुसंधान पर ध्यान केंद्रित करेगा। साथ ही आईआईएफआर अंतरराष्ट्रीय संगठनों जैसे यूरोपीय फाउंडेशन फॉर मैनेजमेंट डेवलपमेंट के साथ मिलकर शिक्षा के स्तर को वैश्विक मानकों तक ले जाएगा।




