लेखक~मुकेश सेठ
वर्षो पूर्व डीके शिवकुमार से जेल में जाकर मिलने वाली श्रीमती सोनिया गाँधी व परिवार के किसी कमज़ोर नस को दबा सिद्धारमैया की दावेदारी ख़त्म कर सीएम बनना चाहते हैं डीके शिवकुमार
♂÷कर्नाटक में काँग्रेस की जीत में सर्वाधिक महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले प्रदेश अध्यक्ष व नवनिर्वाचित विधायक डीके शिवकुमार ने कहा कि वह पार्टी को ब्लैकमेल नहीं करेंगे और पीछे भी नही हटेंगे।
मालूम हो कि कर्नाटक में काँग्रेस को तगड़ा बहुमत मिला है और मुख्यमंत्री की कुर्सी के लिए पूर्व मुख्यमंत्री सिद्धारमैया व डीके शिवकुमार के बीच जमकर रार मची हुई है।
गाँधी परिवार नें दोंनो दिग्गज़ों को दिल्ली बुलाया है।
सिद्धारमैया जहाँ पीछे हटने को तैयार नही तो डीके शिवकुमार नें सीधे-सीधे पार्टी के माई-बाप माने जाने वाले गाँधी परिवार को ही यह कहकर चेतावनी देने की कोशिश की है कि वह पार्टी को ब्लैकमेल नही करेंगे।
यह एक लाइन यह बताने के लिए काफ़ी है कि वह रिमोट कंट्रोल से पार्टी को चलाने वाले नेतृत्व की कमज़ोर नस को दबा देंगे अगर इस बार उनको मुख्यमंत्री पद नही मिला तो।
इसके पहले भी कर्नाटक में काँग्रेस की सरकार बनने पर गाँधी परिवार द्वारा उनको फ़िर से सत्ता में आने पर मुख्यमंत्री बनाये जाने का वादा किया गया था।
राजस्थान में जिस प्रकार ज़मीनी मेहनत व जुझारूपन दिखाकर बीजेपी की विजयाराजे सिंधिया सरकार को धूल चटा कांग्रेस को बहुमत दिलाने वाले प्रदेश अध्यक्ष सचिन पायलट को जिस तरह से गाँधी परिवार नें किनारे लगा राहुल-प्रियंका को जादू दिखाने वाले अशोक गहलोत को मुख्यमंत्री बनाकर हांसिये पर डाल दिया कि वह आज तक मुख्यमंत्री बनने के लिए तड़प रहे हैं।
कर्नाटक प्रदेश अध्यक्ष डीके शिवकुमार दूसरे सचिन पायलट नही बनने के मूड में है।अबकी बार वह पहले वाली गलती नही दोहराना चाहते हैं और अपने तरकश के सारे तीर आजमा रहे हैं।

मालूम हो कि कई वर्ष पूर्व जब डीके शिवकुमार के निवास स्थल पर रेड पड़ी थी,करोड़ो करोड़ की मोटी रकम बरामद कर उनको जाँच एजेंसी ने जेल में डाला था तब काँग्रेस की सर्वेसर्वा श्रीमती सोनिया गाँधी जेल में अपने बच्चों के साथ गयी थी डीके शिवकुमार से मिलने,कहीं कुछ तो सनसनीखेज राज है डीके शिवकुमार के पास जो कि देश की राजनीति में काँग्रेस के ख़िलाफ़ बवण्डर मचा सकता है,अन्यथा पी चिदम्बरम जिन्हे सोनिया गाँधी का सर्वाधिक ख़ास व विश्वास पात्र माना जाता है उनसे भी मिलने श्रीमती सोनिया गाँधी दिल्ली के ही तिहाड़ जेल में नही गयी थी।चिदम्बरम पार्टी के दिग्गज नेता पूर्व गृहमंत्री, पूर्व वित्तमंत्री भी रहे मनमोहन सिंह की सरकार में।
उधर कर्नाटक की जातीय समीकरण में काँग्रेस के लिए बड़े मुफ़ीद नेता व पूर्व मुख्यमंत्री सिद्धारमैया भी हैवीवेट नेता साबित होते आये हैं पार्टी के लिए,क्योंकि इनको गाँधी परिवार का वरदहस्त मिलता रहा है।
ऐसे में सिद्धारमैया की सीएम चेयर की दावेदारी भी दमदार मानी जा रही है क्योंकि यह इसी से समझा जा सकता था है कि अभी एक दिन पहले बंगलुरू में बैठकर डीके शिवकुमार वहीँ से पार्टी नेतृत्व को धमकाने के अंदाज़ में बयान दे रहे थे कि उनके पास पूरे 135 विधायक है और वह दिल्ली नही जाएंगे।
मगर वह दिल्ली भी पहुँचते हैं और पहुँचते ही पहले क़दम बयान भी दे डालते हैं कि उनके पास एक भी विधायक नही है।
फ़िलहाल यह राजनीतिक का खेल है कब कौन पहलवान दूसरे पहलवान को अपने धोबीपाट दाव से चित्त कर दे कुछ कहा नही जा सकता।
÷लेखक स्वतंत्र पत्रकार हैं÷
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