लेखक~सुभाषचंद्र
जो G20 के महापर्व में देश की साख को कर रहे हैं कलंकित
♂÷राहुल गांधी और कांग्रेस के नेता प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के प्रति “ईर्ष्या की आग में जलते हुए” G20 के महापर्व में देश की साख को कलंकित करने में लगे हैं और बेवजह के मामले उठा रहे हैं, बिना अपने गिरेबान में झांके।
राहुल गांधी ने कहा है कि जिसके साथ 60% जनता का समर्थन है, उस मल्लिकार्जुन खड़गे को राष्ट्रपति ने Dinner में नहीं बुलाया गया। जबकि कांग्रेस के तमिलनाडु के नेता मोहन कुमारमंगलम ने कहा है कि राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद को अयोध्या के राम मंदिर पूजन नहीं बुलाया गया और राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को नए संसद भवन के उद्घाटन में नहीं बुलाया,अब खड़गे को डिनर पर न बुलाने के लिए प्रधानमंत्री मोदी पर जातिगत भेदभाव का आरोप लगाते हुए कहा कि “मोदी है तो मनु” है।
ये लोग ऐसे अनर्गल आरोप लगाने से पहले कुछ अपने गिरेबान में झाँक लेते तो अच्छा था।
60% जनता के समर्थन की बात किस आधार पर कर रहे है राहुल गांधी ?
अगर सभी I.N.D.I.A गठबंधन के सदस्यों के 60% समर्थन की बात कर रहे है राहुल गाँधी तो क्या सभी दलों ने खड़गे को अपना नेता “घोषित” कर दिया है ? वैसे 60% वाले कुछ CM dinner में आ रहे हैं शायद यह राहुल गाँधी को किसी कांग्रेसी ने नही बताया क्या?
तमिलनाडु से मोहन कुमारमंगलम कह रहे है कि“मोदी है तो मनु” है लेकिन वह भूल गए कि तमिलनाडु का ही उनका सहयोगी DMK सनातन धर्म को समाप्त करने को उतारू है, जिसमें देश के 100 करोड़ लोगों की आस्था है और दुनियाभर के सनातनियों की भी आस्था है, वो कौन सा “मनुवाद” है भाई।
कांग्रेस की कुछ अपनी ही मनुवादी सोच देखिए।
राहुल गांधी को बताना चाहिए कि उनके दादा फिरोज गांधी को कभी गांधी परिवार और कांग्रेस का कोई नेता कभी याद क्यों नहीं करता, न उनकी जयंती पर और न उनकी पुण्यतिथि पर, ये कैसा “मनुवाद” है कांग्रेस का।
प्रधानमंत्री नेहरू ने राष्ट्रपति राजेंद्र प्रसाद को सोमनाथ मंदिर के उद्घाटन में जाने से मना कर दिया था।
राहुल गांधी और कांग्रेस के लोगों को याद रखना चाहिए कि नेहरू ने डॉ राजेंद्र प्रसाद और अपनी कैबिनेट के मंत्रियों को सरदार पटेल के अंतिम संस्कार में जाने से मना कर दिया था।
नेहरू ने राष्ट्रपति डॉ राधाकृष्णन को पूर्व राष्ट्रपति डॉ राजेंद्र प्रसाद के अंतिम संस्कार में बिहार जाने से मना कर दिया था।
सोनिया गांधी ने काँग्रेस अध्यक्ष सीताराम राम केसरी को धक्के मरवा का कांग्रेस कार्यालय से धक्के मरवाकर बाहर करा दिया था और तो औऱ सोनिया गांधी ने पूर्व प्रधानमंत्री नरसिम्हा राव के शव को कांग्रेस कार्यालय में लोगों के दर्शनों के लिए रखने से मना कर दिया था।
सोनिया गांधी यूपीए की सरकार के मुखिया प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह को पीछे रखती थी और विदेशी राष्ट्राध्यक्षों से ऐसे मिलती थीं जैसे वही देश और सरकार की मुखिया हो।
काँग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे को जब 15 अगस्त को लालकिले पर आने का निमंत्रण केन्द्र सरकार ने दिया था तो वह वहां क्यों नहीं गए, क्योंकि उन्होंने खुद कहा था कि वो देर तक बैठ नहीं सकते।
आज अपने नेताओं को न बुलाने पर परेशान हो, जबकि कांग्रेस के मुख्यमंत्रियों को बुलाया गया है लेकिन वे आने को तैयार नहीं हैं। कांग्रेस ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को कितना अपमानित किया है, यह याद होगा जब अधीर रंजन ने तो प्रधानमंत्री मोदी को “गंदी नाली” तक कह दिया था वह भी लोकसभा में।
कांग्रेस के एक और खलीफा हैं जयराम रमेश, वो तड़प रहे है कि अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन से भारतीय मीडिया को सवाल नहीं करने दिए गए।
अभी तो सब कांग्रेसी मिलकर देश के महापर्व की बनी हुई खीर में नमक डालने को तड़प रहे हैं लेकिन उन्हें याद रखना चाहिए कि अनेक देशों की ख़ुफ़िया एजेंसियां इस समय भारत में सक्रिय हैं और कुछ भी गड़बड़ करने की कोशिश की तो बहुत महंगा पड़ेगा!

(लेखक उच्चतम न्यायालय के प्रसिद्ध अधिवक्ता और राजनीतिक विश्लेषक हैं)




