लेखक~सुभाषचंद्र
अभी तो काँग्रेस को अपनों के साथ-साथ मुस्लिम तुष्टिकरण का परिणाम भी पड़ेगा झेलना
♂÷कांग्रेस की जीत के बाद भाजपा को ज्ञान देने वालों की कमी नहीं है।
एक वरिष्ठ पत्रकार ने विवेचना करते हुए कहा है कि कांग्रेस द्वारा बजरंग दल पर बैन लगाने की चाल में भाजपा कब फंस गई, उसे पता ही नहीं चला क्योंकि भाजपा कांग्रेस के मुस्लिमों के वोट साधने का शिगूफा नहीं समझ सकी और उसे लगा कि हिन्दू वोट उसके साथ हो जायेगा जो नहीं हुआ।
हार के बाद विवेचना कुछ भी की जा सकती है लेकिन यह भी हो सकता था कि कांग्रेस का बजरंग दल पर बैन का प्लान Counterproductive हो जाता और आज जिस स्थिति में कांग्रेस है, उसमे भाजपा हो सकती थी और ऐसा होता तो आप क्या विवेचना करते?
कांग्रेस का प्लान इतना ही दमदार था तो अगले ही दिन वीरप्पा मोइली और कांग्रेस के अन्य नेता यह न कहते कि बजरंग दल पर बैन लगाने की कोई योजना नहीं है और कांग्रेस तो राज्य भर में हनुमान जी के मंदिर बनवाएगी। मंदिर बनवाना तो दूर की बात है, जो मंदिर हैं, उन्हें ही कांग्रेस सरकार बचा लेगी तो बहुत बड़ी बात होगी।

हिन्दू वोट भाजपा को जो अपेक्षित था, वह नहीं मिला क्योंकि वोक्कालिगा समुदाय जो JDS के साथ रहता था वह कांग्रेस के साथ चला गया लेकिन हिन्दू समुदाय ने कांग्रेस के सामने समर्थन देने की एवज में कोई मांग नहीं रखी है।
दूसरी तरफ मुस्लिम संगठन,सुन्नी पर्सनल लॉ बोर्ड ने ताल ठोक कर दावा किया है कि मुस्लिमों के समर्थन से ही कांग्रेस को बहुमत मिला है और इसलिए कोई मुस्लिम उपमुख्यमंत्री होना चाहिए और उसके अलावा 5 मुस्लिम मंत्री भी बनाए जाएं। जिनके पास गृह, राजस्व और स्वास्थ्य जैसे बड़े मंत्रालय हों, “खुदा का शुक्र है कि बोर्ड ने मुख्यमंत्री नहीं मांगा”।
हर टी वी चैनल पर दिखाई देने वाला डॉ शोएब जमुई कह रहा है कि“अब से कर्नाटक में जो भी स्कूल टीचर या प्रबंधक़ हिज़ाब पहनने वाली बेटियों के साथ बदतमीजी करे तो बिलकुल बर्दाश्त नहीं करना;
“सबसे पहले तो बहादुर बेटी मुस्कान के पीछे भागने वाले लंपटों का पता लगाओ – उन्हें जेल भेजने का प्रबंध किया जाएगा”Team MWPF उनके खिलाफ FIR दर्ज करेगा”।
यानी यह कथित मौलाना दिल्ली से बैठ कर कर्नाटक की सरकार चलाएगा।
उधर प्रदेश अध्यक्ष डीके शिवकुमार और और पूर्व मुख्यमंत्री सिद्धारमैया भिड़े हुए हैं मुख्यमंत्री बनने के लिए, परंतु काँग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे खुद ही घोड़ी चढ़ने को आतुर हो रहै है।
चर्चा है राहुल गांधी ने डीके शिवकुमार और सिद्धारमैया को ढाई-ढाई साल घोड़ी पर बैठने के लिए कहा है मगर दोनों मानने को तैयार नहीं हैं,छत्तीसगढ़ में उनका यह फार्मूला फेल हुआ देख कर।
मुख्यमंत्री कर्नाटक में वही बनेगा जिससे 10 जनपथ को धन बटोरने की सबसे ज्यादा उम्मीद होगी।
समस्या यह भी है कि जिस DGP प्रवीण सूद को डीके शिवकुमार ने “नालायक” कहा था और सत्ता में आने पर जेल में डालने की धमकी दी थी, उसे नरेंद्र मोदी ने सीबीआई निदेशक बना दिया और मुख्यमंत्री की कुर्सी पर बैठे शिवकुमार को गिरफ्तार कर ले प्रवीण सूद, यह तो शोभा नहीं देगा।
बस इसलिए डीके शिवकुमार का मुख्यमंत्री बनना संभव नहीं लग रहा लेकिन वह नहीं बने तो वो अपने समर्थक भाजपा में घुसा कर सरकार भी पटक सकते हैं।
तात्कालिक लाभ तो कांग्रेस को हो गया परंतु सरकार कितने दिन चलेगी, यह तो समय ही बताएगा।
(ये लेखक के अपने विचार हैं)




