(मुकेश सेठ)
(मुम्बई)
सायं अस्पताल प्लास्टिक बोतल क्रशिंग मशीन लागू करने वाला बृहन्मुंबई नगर निगम का पहला अस्पताल बना
प्लास्टिक की रीसाइक्लिंग के साथ बेहतर अपशिष्ट प्रबंधन हो सकेगा सम्भव- डॉ जोशी
बृहन्मुंबई नगर निगम के अन्तर्गत वाले अस्पतालों में आने वाले अधिकतर लोग प्लास्टिक की बोतल बंद पानी का उपयोग करते हैं और बोतलबंद पानी खत्म होने के बाद बोतलें कूड़े में चली जाती हैं लेकिन इन बोतलों की विशिष्ट आकृतियों के कारण ये बोतलें कूड़े में एक बड़ी जगह घेर लेती हैं। इससे कचरे का पृथक्करण भी अपेक्षाकृत कठिन हो जाता है।
ऐसे में पश्चिमी उपनगर उप आयुक्त डॉ. सुधाकर शिंदे द्वारा दिए गए निर्देशों के अनुसार, हाल ही में लोकमान्य तिलक अस्पताल में प्लास्टिक बोतल क्रशिंग मशीन चालू की गई।
इस क्रशिंग मशीन में जैसे ही पानी की इस्तेमाल की गई खाली बोतल डाली जाएगी, वह दब जाएगी और उस कचरे को अलग करना और उसका प्रबंधन करना आसान हो जायेगा। साथ ही, चूंकि मशीन द्वारा उपयोग की जाने वाली प्लास्टिक की बोतलों का उपयोग रीसाइक्लिंग के लिए किया जाएगा, इसलिए यह पर्यावरण के लिए भी अनुकूल होगा, डॉ.मोहन जोशी ने दी।
इस बारे में अधिक जानकारी देते हुए डॉ. मोहन जोशी ने कहा कि अस्पताल में पेयजल की सुविधा उचित स्थान पर उपलब्ध करायी गयी है लेकिन अक्सर मरीज और उनके परिजन बोतलबंद पानी पीना पसंद करते हैं। इस वजह से, ये प्लास्टिक की पानी की बोतलें अस्पताल के कुल कचरे का एक महत्वपूर्ण हिस्सा बन जाती है। इन बोतलों के विशिष्ट आकार के कारण ये कूड़े में बड़ी जगह घेरती हैं इससे बचने और बेहतर अपशिष्ट प्रबंधन हासिल करने के लिए, हाल ही में अस्पताल में एक प्लास्टिक बोतल क्रशिंग मशीन चालू की गई है। अस्पताल के सफाईकर्मियों द्वारा प्रतिदिन एकत्र किए जाने वाले कचरे से अब प्लास्टिक की बोतलों को अलग किया जा रहा है।
बीएमसी स्वच्छ भारत अभियान के लक्ष्यों को प्राप्त करने की दिशा में आगे बढ़ रही है, और अब कचरे का प्रबंधन और उसके बाद निपटान आसान हो जाएगा। साथ ही, यह मशीन अधिक कुशल अपशिष्ट पुनर्चक्रण में योगदान देने और प्लास्टिक कचरे के पर्यावरणीय प्रभाव को कम करने में भी प्रभावी होगी। इस कचरे का पुन: उपयोग करके कपड़े, टोपी, जूते, फोम, रिफ्लेक्टर जैकेट, मोल्डेड फर्नीचर आदि बनाना भी संभव है बताया डॉ. मोहन जोशी ने।




