★मुकेश सेठ★
★मुम्बई★
एक्स चेयरमैन वसीम रिज़वी वर्तमान में जितेन्द्र नारायण त्यागी नें बोर्ड अध्यक्ष अली जैदी पर लगाये मृत माफ़िया अतीक अहमद के खास मो.जौहर के साथ रिश्ते होने के आरोप
ऑफिस में सीएम का नाम लेते नोट गिनने व मो.जौहर के साथ फ़ोटो, वीडियो वायरल होने के बाद त्यागी ने बताया गम्भीर प्रकरण
बोर्ड अध्यक्ष से उनका पक्ष जानने के लिए दिन के 2 बजकर 11 मिनट पर उनको फोन किया तो कॉल रिसीव नही हुआ जिससे उनका पक्ष जाना नही जा सका
♂÷उत्तरप्रदेश शिया सेंट्रल वक्फ बोर्ड के चेयरमैन अली ज़ैदी पर मारे गए माफ़िया अतीक अहमद के खास आदमी मोहम्मद जौहर के साथ सम्बन्ध होने व सांठगाठ कर मोटी रक़म लेकर वक्फ़ सम्पत्तियों में गड़बड़ी करने व माफियाओं के द्वारा कब्ज़े करने के गम्भीर आरोप पूर्व चेयरमैन सैयद वसीम रिज़वी अब वर्तमान में जितेन्द्र नारायण सिंह त्यागी ने चेयरमैन अली पर लगाए है।
जितेन्द्र नारायण ने वक्फ एक्ट को ही दोषी मानते हुए इसे समाप्त करने की सिफारिश की, इसके साथ ही उन्होंने कहा कि चेयरमैन अली जैदी के साथ जिस मोहम्मद जौहर नाम के शख्स की फोटो सोशल मीडिया में वायरल हो रही है,उसे माफिया अतीक अहमद का बेहद खास आदमी बताया जा रहा है।

इसके साथ ही जितेन्द्र नारायण त्यागी ने बताया कि अगर वर्तमान चेयरमैन भ्रष्टाचारी नहीं हैं तो बीते दिनों एक वीडियो सोशल मीडिया में फ़ैल रहा है,जिसमें वह वक्फ बोर्ड की कुर्सी पर बैठकर मुख्यमंत्री का नाम लेकर खुलेआम नोट गिन रहे हैं।
एक्स चेयरमैन का कहना है कि पूछने पर उन्होंने सफ़ाई दी कि कर्मचारियों की सैलरी देने के लिए वह रुपये गिन रहे थे।
जबकि पूर्व चेयरमैन के मुताबिक वहां सारे कर्मचारियों को सैलरी अकाउंट से दी जाती है कैश नहीं, हर कर्मचारी का अकाउंट बैंक में खुला हुआ है, और एक बात यह भी है कि चेयरमैन सैलरी नहीं देता है ऑफिस के अकाउंट से सैलरी की चेक दी जाती है।
उन्होंने प्रश्न उठाया कि यह सब भ्रष्टाचार नहीं तो और क्या है ?
इनके आरोप पर जब “तहलका न्यूज़” ने आज दोपहर 2 बजकर 11 मिनट पर चेयरमैन अली ज़ैदी से उनका पक्ष जानने के लिए फोन किया तो उन्होंने न तो कॉल रिसीव किया न ही बाद में ही कॉल बैक किया जिससे कि जितेन्द्र नारायण त्यागी के गम्भीर आरोपों पर उनका भी पक्ष रखा जा सके।

उधर जितेन्द्र नारायण त्यागी उर्फ़ सैयद वसीम रिज़वी नें प्रेस विज्ञप्ति के माध्यम से कहा कि देश मे मुग़लो व अंग्रेजों के समय में ताकतवर मुस्लिमों ने जो जमीनें हिंदुओ से छीनी थी उसको उनके पास रहने देने के लिए अंग्रेजों ने पहला वक़्फ़ एक्ट वर्ष 1930 में बनाया था।
उन्होंने आगे बताया कि चूंकि काँग्रेस हमेशा से मुसलमानों को वोटबैंक के रूप में इस्तेमाल करती आई है तो उसने इस एक्ट को उनके हित मे बहुत बदलाव करके अधिक शक्तिशाली बना दिया।
एक्स चेयरमैन ने केन्द्र सरकार से अपील की है कि वक्फ़ एक्ट को समाप्त करके वक्फ़ सम्पत्तियों को कब्ज़े में लेकर जनहित में उनका उपयोग करना चाहिए।
वक़्फ़,शरीयत का सिविल क़ानून है और इस तरह के क़ानून के लिए संविधान इजाज़त नही देता है।
उन्होंने कहा कि पूर्व में भी वह भारत सरकार से इस एक्ट को समाप्त करने की अपील किये थे और एक बार पुनः करेंगे।




