(राजेश बैरागी)
(गौतम बुद्ध नगर)
√ उच्चतम न्यायालय नें जेल रजिस्टर में जाति लिखने वाला कॉलम भी समाप्त किया
√ खोजी महिला पत्रकार सुकन्या सामंथा नें वर्ष 2023 में सुप्रीम कोर्ट में दायर की थी याचिका
सर्वोच्च न्यायालय ने आज एक अतिमहत्वपूर्ण निर्णय में देश के सभी जेलों में बंद कैदियों से जातिगत आधार पर साफ सफाई जैसे निम्न स्तरीय कार्य कराने पर रोक लगाने का आदेश दिया है। इसके साथ ही जेल रजिस्टर में कैदियों के नाम के आगे जाति लिखे जाने वाले कॉलम को भी समाप्त करने का आदेश दिया गया है।

एक खोजी पत्रकार सुकन्या सांथा की ओर से पिछले वर्ष दायर एक याचिका पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति डी वाई चंद्रचूड़ व न्यायमूर्ति जे बी पारदीवाला तथा न्यायमूर्ति मनोज मिश्र की पीठ ने अपने निर्णय में साधारण कारावास भुगत रहे तथा परीक्षण के दौर से गुजर रहे कैदियों के हित में महत्वपूर्ण और दूरगामी फैसला सुनाया। न्यायालय ने 1870 में पारित जेल अधिनियम के उन प्रावधानों पर आपत्ति जताई जिनमें कैदियों से उनकी जाति के आधार पर जेल में साफ सफाई तथा खाना बनाने जैसे कार्य कराए जाते हैं। न्यायालय ने इसे भेदभाव पूर्ण तथा संविधान के अनुच्छेद 15 में नागरिकों को दिए गए समानता के अधिकार का उल्लंघन करार दिया। अदालत ने भारत सरकार और देश के सभी राज्यों को अपनी जेलों में बंद कैदियों के जेल रजिस्टर में नाम के साथ जाति लिखने पर भी रोक लगा दी।
अदालत ने अपने निर्णय को लागू करने के लिए की गई व्यवस्थाओं पर राज्यों से आगामी सुनवाई से पहले स्टेटस रिपोर्ट पेश करने का आदेश दिया है। हालांकि जेल मेन्युअल या जेल रूल बुक में इस संबंध में जो कुछ भी लिखा है परंतु जेलों के भीतर चलने वाली व्यवस्था में अवैध धन वसूली एक महत्वपूर्ण कारक है। जेल प्रशासन द्वारा निर्धारित धनराशि भुगतान न करने वाले कैदी को गंदे नाले में घुसकर सफाई कराने से लेकर बहुत से ऐसे काम कराए जाते हैं जो या तो मशीनरी के जरिए होने चाहिएं अथवा पेशेवर श्रमिकों द्वारा किए जाने चाहिएं। सभी जेलों में कैदियों को दिए जाने वाले खाने की गुणवत्ता भी हमेशा और जानबूझकर निम्न रखी जाती है। इससे जेल में चलने वाली कैंटीन का धंधा फलता फूलता है। जेलों में चलने वाली जेल करंसी भी एक बड़ा धंधा है। यह जेल में भारतीय मुद्रा को धता बताती है।




