लेखक~सुभाषचंद्र
फिर केंद्र क्या इन राज्यों को अनुदान देना बंद कर दे?
♂÷आज नीति आयोग की आठवीं बैठक रही, जिसकी अध्यक्षता प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी नें की, लेकिन इस बैठक का बहिष्कार करने का ऐलान सबसे पहले बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने किया और इसके बाद और 8 मुख्यमंत्री बैठक का बहिष्कार घोषणा किये।
इनमें शामिल हैं दिल्ली के सीएम केजरीवाल, बिहार के नीतीश कुमार, पंजाब के भगवंत मान, तेलंगाना के केसी राव, तमिलनाडु के एम के स्टालिन, केरल के पिनाराई विजयन, राजस्थान के अशोक गहलोत और कर्नाटक के सिद्धारमैया।
सबके अपने अपने कारण हैं मगर असली कारण इनके दिलों में नरेंद्र मोदी के लिए नफरत की आग है, ममता तो शायद ही किसी बैठक में आई हों,पंजाब के मुख्यमंत्री मान कह रहे है कि Rural Development Fund के लिए मोदी सरकार ने 3600 करोड़ रुपया नहीं दिया, इसलिए नहीं आएंगे। – KCR और केजरीवाल को आज ही हैदराबाद में मिलना है मोदी के खिलाफ रणनीति बनाने के लिए।
जबकि सत्य तो यह है कि प्रधानमंत्री मोदी के तेलंगाना में हुए 5 दौरों में राज्य के मुख्यमंत्री KCR एक बार भी उनसे नहीं मिले, एयरपोर्ट पर अगुवाई करने की बात तो छोड़ ही दीजिये।
नीतीश कुमार को कुछ काम हैं राज्य में जो आज ही करना है और नहीं हुआ तो आसमान गिर जायेगा, पिनराई विजयन और गहलोत ने कोई कारण नहीं दिया, सिद्धारमैया को कैबिनेट विस्तार करना है और स्टालिन विदेश गए है।

नीति आयोग की बैठक में राज्यों की आर्थिक स्थिति की समीक्षा ही तो होती है और यह संघीय ढांचे का ही स्वरुप है। इसी बैठक में राज्यों की जरूरतों पर विचार होता है लेकिन अपनी अकड़ में ये लोग बैठक में नहीं जाना चाहते, फिर ये लोग कैसा संघीय ढांचा चाहते हैं और आरोप लगाते हैं कि मोदी सरकार संघीय ढांचे को नष्ट कर रही है जबकि इस ढांचे पर चोट तो विपक्ष और विपक्षी दलों की सरकारें ही मार रहीं है।
ये तो प्रधानमंत्री मोदी हैं जो उनकी हरकतों के बावजूद राज्यों को उनकी जरूरतों के अनुसार केंद्रीय सहायता में कमी नहीं करते और केंद्रीय विकास प्रोजेक्ट हर राज्य में जारी रखे हुए हैं बगैर किसी भेदभाव के।
ये लोग नहीं समझते कि यदि केंद्र सहायता देना बंद कर दे तो ये लोग किसी काम के नहीं रहेंगे और न फ्री की रेवड़ियां बाँट सकेंगे।
पिछले 9 वर्षों में जो नीति आयोग की बैठक हुईं, वो ये थी वह यह है।♀
-पहली – 8 फरवरी, 2015;
-दूसरी – 15 जुलाई, 2015;
-तीसरी – 23 अप्रैल, 2017;
-चौथी – 17 जून, 2018;
-पांचवी – 15 जून, 2019;
-छठी – 20 फरवरी, 2021; और
-सातवीं – 7 अगस्त, 2022
लगभग सभी मुख्यमंत्री बस अपने अपने राज्य तक सीमित हैं और उन्हें कुएं के मेंढक कहना गलत नहीं होगा।जो अपने राज्यों में भी जनता के हितों की रक्षा करने में असमर्थ हैं परंतु नरेंद्र मोदी को हटाने के लिए मौकापरस्त ‘गठबंधन” करने में लगे हुए हैं।ये ही लोग नई संसद का विरोध कर रहे हैं लेकिन फिर भी नरेंद्र मोदी इनके विरुद्ध कोई प्रतिशोध की कार्रवाई नहीं करते, वो बात अलग है, यदि ये या इनके दलों के लोग भ्रष्टाचार में फंसे हैं तो उन्हें छोड़ते भी नहीं।
सबसे बड़े खलीफा तो केजरीवाल हैं जिसने किसी पार्टी के नेताओं को चोर कहने में गुरेज़ नहीं किया लेकिन आज सबसे मदद की भीख मांगते घूम रहे है दिल्ली का कामकाज छोड़कर साथ ही पँजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान को भी लेकर,कि सब आकर मुझे मोदी के Ordinance से बचा लो वरना मेरा मरण पक्का है।

÷लेखक विधि मामलों के ज्ञाता हैं और यह उनके निजी विचार हैं÷




