(मुकेश सेठ)
(मुम्बई)
सपा सरकार में दुर्दांत अपराधी फुरकान की दहशत से हुआ था कैराना से हिन्दुओं का पलायन रातों रात शहर छोड़ गए थे हिंदू व्यापारी
योगी सरकार के द्वारा अपराधियों के खिलाफ चलाए जा रहे जीरो टोलरेंस अभियान के तहत शामली पुलिस ने एक लाख के ईनामी दुर्दांत अपराधी फुरकान को मुठभेड़ में मार गिराया।
पुलिस के अनुसार यह मुठभेड़ दोपहर तीन बजे जिला मुख्यालय से क़रीब सोलह किलोमीटर दूर झिंझाना क्षेत्र के गांव रंगाना के जंगल में हुई थी। फुरकान ने पुलिस को देखते ही अपनी कार्बाइन और पिस्टल से करीब 5 राउंड ताबड़तोड़ फायरिंग कर दी थी जिससे एक सिपाही के पेट में गोली लग गई। इसके बाद पुलिस टीम ने खुद को बचाते हुए जवाब दिया,इस दौरान फुरकान को गोली लगी और वह गिर गया। फुरकान और सिपाही को तत्काल अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने फुरकान को मृत घोषित कर दिया। जबकि सिपाही को बेहतर इलाज के लिए मेरठ रेफर कर दिया गया है।
फुरकान 4 साल से फरार चल रहा था और उस पर लूट हत्या और रंगदारी के तीस केस चल रहे है।
मालूम हो कि 12 साल पहले उसने शामली जिले के कैराना में बीच बाजार व्यापारी नेता विनोद सिंघल की गोली मारकर हत्या कर दी थी।
फुरकान (50) मुकीम काला गैंग का एक्टिव क्रिमिनल था। 2016 में कैराना में तीन व्यापारियों की हत्या की गई थी। इसके बाद तमाम हिंदू परिवार पलायन कर गए थे। फुरकान और मुकीम पलायन के आरोपी थे। पुलिस के मुताबिक, ये मुठभेड़ दोपहर 3 बजे जिला मुख्यालय से करीब 16 किमी दूर झिंझाना क्षेत्र के गांव रंगाना के जंगलों में हुई।
क्या है देश में बहुचर्चित और राजनीतिक मुद्दा बन चुके कैराना का पलायन कांड…
यह खौफनाक काण्ड 30 मई, 2016 की है, अगले साल 2017 में विधानसभा चुनाव होने थे। इसलिए सभी पार्टियां चुनाव प्रचार में जुटी थीं। इसी बीच कैराना से तत्कालीन भाजपा सांसद हुकुम सिंह ने 346 हिंदूओं एक सूची जारी कर दावा किया था कि वर्ष 2014 से 2016 के बीच एक विशेष समुदाय के अपराधियों और रंगदारी के डर से ये हिंदू परिवार यहां से पलायन कर गए।
भाजपा ने इसे बड़ा चुनावी मुद्दा बनाया और आरोप लगाया कि तत्कालीन सपा सरकार तुष्टीकरण की नीति अपना रही है कानून व्यवस्था खराब है। चुनाव में खुद गृहमंत्री अमित शाह कैराना पहुंचे और गली-गली घूमकर पर्चे बांटे थे।
पुलिस जांच में सामने आया था कि स्थानीय गैंगस्टर मुकीम काला, मोहम्मद फुरकान और उसके गैंग के अपराधियों के आतंक से कैराना में पलायन हुआ था। तत्कालीन डीजीपी ने फुरकान पर 50 हजार रुपए इनाम घोषित किया, जो बाद में एक लाख कर दिया गया।
योगी जब पहुंचे थे कैराना तो फुरकान ने जमानत तुड़वाकर किया था सरेंडर
8 अप्रैल 2017 को पुलिस ने कांधला थाना क्षेत्र के गांव आल्दी के जंगल में मुठभेड़ कर फुरकान को गिरफ्तार किया। लेकिन कुछ समय बाद ही फुरकान जमानत पर जेल से छूट गया। इसके बाद 2019 में वो नशे की तस्करी करने लगा। फिर पकड़े जाने पर जेल भेजा गया। 8 नवंबर 2021 को कैराना में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के दौरे के बाद फुरकान गैंगस्टर के मुकदमे में जमानत तुड़वाकर कोर्ट में पेश हुआ था।
कुछ दिन जेल में रहा। इसके बाद जमानत लेकर फिर से फरार हो गया था। करीब चार साल से पुलिस उसे तलाश रही थी।
एसपी बोले- कैराना में आतंक के पर्याय फुरकान ने बरपाया था कहर
SP ने बताया- 2014 में फुरकान मुकीम काला गैंग से जुड़ा था। इस गैंग ने कैराना में कहर बरपाया था। 10 दिन के अंदर रंगदारी मांगने के लिए तीन व्यापारियों की हत्या की थी। इसके बाद ही कैराना से पलायन शुरू हुआ था। जब मुख्यमंत्री योगी सत्ता में आए, तो उन्हें यहां आना पड़ा। वे पीड़ित परिवारों से भी मिले थे और इसके बाद यहां पलायन रुका था।
दिनदहाड़े की थीं व्यापारी नेता की हत्या
फुरकान ने अगस्त 2014 में कैराना नगर के मुख्य चौक बाजार में दिनदहाड़े व्यापारी नेता विनोद सिंघल की रंगदारी न देने पर गोली मारकर हत्या कर दी थी। विनोद उस वक्त अपनी किराना की दुकान पर बैठे थे। इसके बाद फुरकान जेल चला गया।
करीब 6 महीने जेल में रहने के बाद वो जमानत पर छूटा। फिर फुरकान ने कोल्ड ड्रिंक एजेंसी के संचालक ईश्वरचंद उर्फ बिल्लू की दुकान पर पहुंचकर रंगदारी मांगी। पैसे न देने पर उसे भी धमकाया। विनोद सिंघल जैसा हाल करने की धमकी दी। डर के मारे ईश्वरचंद का परिवार कैराना से पलायन कर पानीपत में जाकर बस गया।
उसी दौरान गैंग लीडर मुकीम काला ने कैराना के व्यापारी राजेंद्र और शिवकुमार की रंगदारी न देने पर गोली मारकर हत्या कर दी। इसके बाद शामली के व्यापारियों ने आंदोलन कर दिया था और बाजार बंद रखकर बदमाशों की गिरफ्तारी की मांग की थी। तब से कैराना में माहौल लगातार बिगड़ता रहा और व्यापारी पलायन करते रहे। मुकीम काला 14 मई 2021 को चित्रकूट जेल में हुई एक गैंगवार में मारा गया था।
एसपी ने बताया कैसे हुई मुठभेड़
SP एनपी सिंह ने बताया बुधवार दोपहर 12 बजे थाना झिंझाना के SHO बीरेंद्र कसाना को सूचना मिली कि इनामी बदमाश फुरकान अपने साथी के साथ रंगाना गांव के बगल में पोल्ट्री फॉर्म पर आया है। तत्काल उन्होंने अपने स्वाट प्रभारी राहुल सिसौदिया और बाबरी थाने के SO को सूचना दी। पूरी टीम ने घेराबंदी की।
पुलिस को देखते ही फुरकान ने फायरिंग की, जिसमें तीन पुलिकर्मियों को गोली लगी। इनमें सिपाही हरविंदर गंभीर रूप से घायल हो गया। स्वाट टीम प्रभारी राहुल सिसौदिया, SHO झिंझाना वीरेंद्र कसाना और SO बाबरी कुलदीप के बुलेटप्रूफ जैकेट में गोली लगी, इससे वह बाल-बाल बच गए।
पुलिस ने जवाबी फायरिंग की, जिसमें एक बदमाश फुरकान गंभीर रूप से घायल हुआ और दूसरा बदमाश खेतों में भाग गया। अस्पताल में फुरकान को मृत घोषित किया गया। वह कैराना के आर्यपुरी मोहल्ले का रहने वाला था।
कोर्ट से एक मामले में उसे 10 साल की सजा हो चुकी थी, लेकिन हाईकोर्ट से जमानत पर बाहर था। उसके पास से 9 एमएम की कार्बाइन, 9 एमएम की पिस्टल, 20 से अधिक जिंदा कारतूस, कई खोखे और बिना नंबर प्लेट की बाइक बरामद हुई है।
मुठभेड़ के दौरान उसने पुलिस पर 5-6 राउंड फायरिंग की। दावा है कि वह किसी वारदात को अंजाम देने या उसकी साजिश के लिए इलाके में आया था।
ड्रग स्मगलर हैं फुरकान की पत्नी और बेटा :
फुरकान के परिवार में उसकी पत्नी रेशमा के अलावा 4 बच्चे हैं। इनमें 3 बेटे और एक बेटी है। बेटी की शादी हो चुकी है। बड़े बेटे का नाम खफील है। वह स्मैक तस्करी का आरोपी है। फुरकान की पत्नी रेशमा भी ड्रग तस्करी के आरोप में जेल जा चुकी है।




