(आलोक तिवारी)
(मथुरा)
जनपद के माध्यमिक शिक्षा विभाग में सरदार पटेल इंटर कॉलेज, देवनगर मथुरा से जुड़े कथित वित्तीय अनियमितता प्रकरण ने एक बार फिर तूल पकड़ लिया है। मामले में जांच पूरी होने और उच्च अधिकारियों द्वारा कई बार पत्राचार किए जाने के बावजूद दोषी अधिकारियों एवं कर्मचारियों के विरुद्ध कार्रवाई प्रस्ताव अब तक राघवेंद्र सिंह जिला विद्यालय निरीक्षक (डीआईओएस) मथुरा द्वारा न भेजे जाने के कारण आला शिक्षा अधिकारियों द्वारा गहरी नाराजगी प्रकट की है। इस पूरे प्रकरण को लेकर राघवेंद्र सिंह जिला विद्यालय निरीक्षक मथुरा की कार्यप्रणाली, प्रशासनिक पारदर्शिता और जवाबदेही पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं ओर वह संदेह के घेरे मे आ रहे हैं आखिर क्या कारण है जिस कारण वह दोषी अधिकारी ओर कर्मचारियों को बचा रहे हैं लंबे समय से इस मामले में वित्तीय अनियमितताओं की शिकायत की जा रही थी। आरोप है कि सरदार पटेल इंटर कॉलेज, देवनगर में नियमों की अनदेखी करते हुए सरकारी धन का अवैध तरीके से भुगतान किया गया। शिकायत मिलने के बाद उच्च अधिकारियों के निर्देश पर मामले की जांच कराई गई। जांच रिपोर्ट में कथित रूप से अनियमितताओं की पुष्टि होने के बाद संयुक्त शिक्षा निदेशक (माध्यमिक), आगरा मंडल ने संबंधित अधिकारियों एवं कर्मचारियों के विरुद्ध विभागीय कार्रवाई प्रारंभ करने के लिए जिला विद्यालय निरीक्षक मथुरा से कार्रवाई प्रस्ताव उपलब्ध कराने को कहा। आरोप है कि संयुक्त शिक्षा निदेशक कार्यालय की ओर से अनेकों पत्र भेजने के बावजूद जिला विद्यालय निरीक्षक की ओर से दोषियों पर कार्रवाई प्रस्ताव उपलब्ध नहीं कराया गया। शिकायतकर्त का कहना है कि यदि जांच पूरी हो चुकी है और आरोप प्रथम दृष्टया सही पाए गए हैं तो कार्रवाई प्रस्ताव भेजने में इतनी देरी क्यों हो रही है। उनका आरोप है कि इस देरी से यह संदेश जा रहा है कि दोषियों को बचाने का प्रयास किया जा रहा है। मामले को लेकर शिक्षा विभाग के भीतर भी तरह-तरह की चर्चाएं हैं कि सरकारी कार्यालयों में किसी भी वित्तीय अनियमितता के मामले में समयबद्ध कार्रवाई होना आवश्यक है। यदि जांच रिपोर्ट आने के बाद भी विभागीय कार्रवाई आगे नहीं बढ़ती है तो इससे पूरी व्यवस्था की विश्वसनीयता प्रभावित होती है ओर संबंधित अधिकारी पर प्रश्नचिन्ह उठता है दोषियों के हौसले बुलंद होते जाते है शिकायतकर्त का यह भी कहना है कि जिला विद्यालय निरीक्षक स्वयं को ईमानदार और पारदर्शी अधिकारी बताते रहे हैं, लेकिन इस प्रकरण में उनकी भूमिका को लेकर लगातार सवाल उठ रहे हैं। उनका आरोप है कि यदि कोई अधिकारी पूरी ईमानदारी से कार्य कर रहा है तो उसे जांच रिपोर्ट के अनुरूप कार्रवाई प्रस्ताव भेजने में कोई हिचकिचाहट नहीं होनी चाहिए। ऐसे में कार्रवाई प्रस्ताव लंबित रहने से संदेह की स्थिति स्वतः उत्पन्न हो रही है। बताया जा रहा है कि यह मामला केवल एक विद्यालय तक सीमित नहीं माना जा रहा, बल्कि इससे पूरे शिक्षा विभाग की प्रशासनिक कार्यशैली पर प्रश्न उठ रहे हैं। इस प्रकार के मामलों में जिम्मेदारी तय नहीं होगी तो भविष्य में वित्तीय अनुशासन बनाए रखना कठिन हो जाएगा। सूत्रों के अनुसार, संयुक्त शिक्षा निदेशक कार्यालय ने जिला विद्यालय निरीक्षक मथुरा को कई पत्र भेजते हुए स्पष्ट किया कि दोषी अधिकारियों एवं कर्मचारियों के विरुद्ध कार्रवाई प्रस्ताव तत्काल उपलब्ध कराया जाए, ताकि नियमानुसार विभागीय कार्रवाई शुरू की जा सके। इसके बावजूद अपेक्षित कार्रवाई न होने पर अब उच्च स्तर पर भी नाराजगी जताई जा रही है। इस पूरे मामले में संयुक्त शिक्षा निदेशक (माध्यमिक), आगरा मंडल राकेश कुमार ने स्पष्ट कहा है कि जांच में दोषी पाए जाने वाले किसी भी अधिकारी या कर्मचारी को किसी भी कीमत पर नहीं बख्शा जाएगा। उन्होंने कहा कि जिला विद्यालय निरीक्षक मथुरा से कई बार कार्रवाई प्रस्ताव मांगा जा चुका है। यदि इसके बाद भी प्रस्ताव उपलब्ध नहीं कराया जाता है तो जिला विद्यालय निरीक्षक की भूमिका की भी समीक्षा की जाएगी तथा शासन को आवश्यक कार्रवाई के लिए प्रस्ताव भेजा जाएगा। सरकारी धन से जुड़े मामलों में पारदर्शिता सर्वोपरि होती है। यदि किसी अधिकारी या कर्मचारी के विरुद्ध जांच रिपोर्ट में अनियमितता का उल्लेख है तो विभागीय नियमों के अनुसार शीघ्र कार्रवाई होना आवश्यक है। कार्रवाई में अनावश्यक विलंब न केवल प्रशासनिक प्रक्रिया को प्रभावित करता है बल्कि आम जनता का विश्वास भी कमजोर करता है। शिकायतकर्ता ने मांग की है कि पूरे प्रकरण की निष्पक्ष निगरानी कराई जाए तथा यह स्पष्ट किया जाए कि कार्रवाई प्रस्ताव भेजने में आखिर किस स्तर पर देरी हुई। उनका कहना है कि यदि किसी अधिकारी ने जानबूझकर कार्रवाई रोकने का प्रयास किया है तो उसके विरुद्ध भी नियमानुसार विभागीय कार्रवाई होनी चाहिए। मामले को लेकर यह मांग भी उठ रही है कि जांच रिपोर्ट और उससे संबंधित पत्राचार को सार्वजनिक किया जाए, ताकि पूरे घटनाक्रम की वास्तविक स्थिति सामने आ सके। इससे यह भी स्पष्ट हो सकेगा कि किस स्तर पर फाइल लंबित रही और किस अधिकारी की क्या जिम्मेदारी थी।शिकायतकर्त ने चेतावनी दी है कि यदि दोषियों के विरुद्ध समयबद्ध कार्रवाई नहीं हुई तो वे शासन, माध्यमिक शिक्षा निदेशालय, मुख्यमंत्री कार्यालय और अन्य सक्षम प्राधिकारियों से हस्तक्षेप की मांग करेंगे। साथ ही आवश्यकता पड़ने पर न्यायालय का दरवाजा खटखटाने पर भी विचार किया जाएगा। फिलहाल पूरे मामले पर शिक्षा विभाग की नजर बनी हुई है। अब सभी की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि जिला विद्यालय निरीक्षक कार्यालय कब तक कार्रवाई प्रस्ताव भेजता है और शासन स्तर पर इस प्रकरण में आगे क्या निर्णय लिया जाता है।




