(मुकेश सेठ)
(मुम्बई)
धनखड़ ने अपने ऑफिस में सर्विस रिवॉल्वर से ख़ुद को गोली मारकर दी जान पुलिस ने केस दर्ज कर शुरु की जाँच
उत्तर प्रदेश के बागपत जिले के बड़ौत के निवासी धनकड़ 1994 बैच के त्रिपुरा कैडर के थे आईपीएस
लंबे समय तक CBI में रहते नीरव मोदी बैंक घोटाले समेत कई चर्चित मामलों की जाँच का किया नेतृत्व तो वहीं 1984 सिख विरोधी दंगों की जांच के लिए गठित SIT के रहे चेयरमैन
पुलिस मेडल फॉर मेरिटोरियस सर्विस और राष्ट्रपति पुरस्कार से सम्मानित पुलिस महानिदेशक अनुराग धनकड़ की मौत से विभाग के साथ ही बागपत में भी लोग हैं ग़मजदा
किसी भी परिस्थितियों की वजह से मानसिक तनाव होने पर छुपाने की बजाय तुरंत मानसिक चिकित्सक की लें सेवा: डॉ संजय गुप्ता
अपनी विशिष्ट सेवा के लिए राष्ट्रपति पुलिस पदक से सम्मानित देश के तेज़ तर्रार और काबिल पुलिस अफसरों में शुमार त्रिपुरा के पुलिस महानिदेशक अनुराग धनखड़ ने अगरतला स्थित राज्य पुलिस मुख्यालय में ख़ुद को गोली मारकर आत्महत्या कर ली है। शुरुआती जांच में आशंका जताई गई है कि उन्होंने अपनी सर्विस पिस्टल से आत्महत्या की है हालांकि, पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है और पोस्टमार्टम रिपोर्ट व फॉरेंसिक जांच का इंतजार है।
उत्तर प्रदेश के बागपत जिले के बड़ौत निवासी अनुराग धनखड़ वर्ष 1994 बैच के भारतीय पुलिस सेवा (IPS) अधिकारी और त्रिपुरा कैडर के अधिकारी थे।
उनके त्रिपुरा सरकार ने 17 मई 2025 को राज्य के पुलिस महानिदेशक के पद पर तैनाती दी थी जबकि इसके पूर्व डीजीपी (इंटेलिजेंस) और एडीजीपी (लॉ एंड ऑर्डर) का अतिरिक्त प्रभार संभाल चुके थे।
अनुराग धनकड़ इसके पहले राज्य में डीजीपी (इंटेलिजेंस),
अतिरिक्त डीजीपी (कानून-व्यवस्था) व वर्तमान में डीजीपी के पद पर कार्यरत थे।
इससे पहले लंबे समय तक केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) में प्रतिनियुक्ति पर रहे।
सीबीआई में उन्होंने नीरव मोदी बैंक घोटाला सहित कई चर्चित मामलों की जांच का नेतृत्व किया।
1984 सिख विरोधी दंगों की जांच के लिए गठित विशेष जांच दल (SIT) के अध्यक्ष भी रहे।
वर्ष 2003-04 में संयुक्त राष्ट्र (UN) के कोसोवो मिशन में भी सेवाएं दीं।
उन्हें पुलिस मेडल फॉर मेरिटोरियस सर्विस और राष्ट्रपति पुलिस पदक (विशिष्ट सेवा) से सम्मानित किया गया था।
डीजीपी के द्वारा आत्मघाती क़दम उठाए जाने पर देश के सुप्रसिद्ध मनोचिकित्सक व बीएचयू के हेड ऑफ डिपार्टमेंट मेडिसिन प्रो संजय गुप्ता ने कहा कि आए दिन आत्महत्या की करने कि घटनाएं बेहद चिंताजनक है और इस तरह के दुर्भाग्यपूर्ण घटनाओं से डिप्रेशन का इलाज़ कराकर बचा जा सकता है।
उन्होंने कहा कि किसी भी परिस्थितियों से मानसिक तनाव यानि डिप्रेशन उत्पन्न होते ही तुरंत मनोचिकित्सक से मिलकर अपनी परेशानी और मानसिक स्वास्थ्य के बारे में जानकारी लेकर उचित ईलाज शुरू करना चाहिए जिससे कि डिप्रेशन में रहने वाले लोग वक्त रहते पूर्ण रूप से मानसिक स्वस्थ हो सके।
तनावग्रस्त लोगों को अपनी परेशानी परिवार, मित्रों को अवश्य बतानी चाहिए जिससे कि उनको मानसिक मजबूती मिलने के साथ ही ईलाज शुरू होने में आसानी हो सके।


