★मुकेश शर्मा★
★भोपाल★
{भाजपा अनुसूचित जाति मोर्चा के राष्ट्रीय अध्यक्ष लालसिंह है आर्य}
[एक बहुआयामी व्यक्तित्व जिन्होंने अपनी काबलियत के दम पर राष्ट्रीय छितिज पर बनाई पहचान]
♂÷मध्यप्रदेश के भिंड जिले में कुछ चुनिंदा ही नेता ऐसे हैं जिन्होंने अपना सफर बहुत नीचे से शुरू किया और अपनी काबिलियत के बल पर बहुत कम समय में अर्श तक पहुंच गए। भारतीय जनता पार्टी के नेता लाल सिंह आर्य की कहानी कुछ इसी तरह की है। 15-06-1964 को प्रदेश के भिण्ड जिले में दैनिक मजदूरी करने वाले दलित परिवार में जन्मे श्री आर्य को भाजपा आलाकमान ने अनुसूचित जाति मोर्चा के राष्ट्रीयअध्यक्ष की जिम्मेदारी के साथ 23 राज्यों का प्रभार भी सौंपा है। संगठन में राष्ट्रीय स्तर पर इतनी बड़ी जिम्मेदारी प्राप्त करने वाले संभवत भिण्ड जैसे पिछड़े जिले के एक मात्र नेता हैं ।
किशोरावस्था में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से जुड़कर राजनीति का सफर शुरू करने वाले लाल सिंह आर्य 57वर्ष के हैं और प्रदेश के भिंड जिले की गोहद सुरक्षित विधानसभा सीट से तीन बार विधायक और एक बार प्रदेश सरकार में सामान्य प्रशासन एवं नर्मदा घाटी विकास राज्य मंत्री स्वतंत्र प्रभार का दायित्व भी संभाल चुके हैं। BA, LLB तक शिक्षित आर्य बहुत अच्छे वक्ता, अच्छे संगठक एवं मिलन सार व्यकितत्व के धनी हैं । उनका व्यक्तित्व बहुआयामी है। प्रदेश के भिंड शहर में पले बढ़े लाल सिंह ने अपनी कर्म भूमि गोहद को बना लिया है। पहली बार 1996-97 में जब वह गोहद से चुनाव लड़े तो वहां की जनता के लिए पूरी तरह अपरिचित थे, लेकिन बाद में उन्होंने अपने कार्य और व्यवहार से लोगों के दिलों में जगह बना ली। नतीजतन वहां के लोगो ने उन्हें तीन बार विधायक बनाया। उन्होंने भी गोहद विधानसभा क्षेत्र को विकास के रथ पर चढ़ा कर खूब दौड़ाया 2018 में चुनाव हारने के बाद से वह संगठन का कार्य कर रहे थे।
श्री आर्य से विभिन्न मुद्दों पर हमारे ब्यूरो चीफ मुकेश शर्मा में विस्तृत बातचीत की उसी बातचीत के कुछ अंश- भिण्ड से गौहद,गौहद से भोपाल और भोपाल से दिल्ली तक के सफर में आर्य को किन किन चुनोतियों का सामना करना पड़ा?
निश्चित तौर पर कोई भी क्षेत्र हो संघर्ष तो करना ही पड़ता है फिर राजनीति में तो और अधिक है।
भाजपा अनुसूचित जाति के राष्ट्रीय अध्यक्ष होने के नाते देश में आप किस समस्या को सबसे अधिक गंभीरता से लेते हैं
देखिये मोदी जी के नेतृत्व में हम आत्मनिर्भर भारत की और बढ़ रहे जिसके सकारात्मक परिणाम आपको बहुत जल्द देखने को मिलेंगे।
किसान आंदोलन औऱ कृषि बिल पर आप क्या कहेंगे
जो लोग आंदोलन कर रहे हैं बो कह रहे हैं कि कृषि कानून काला कानून है अरे काला कानून है तो बताओ उसमें काला क्या है?मेरी नजर में वों किसान हैं ही नहीं, कांग्रेस, ममता,अखिलेश के बहकावे में आकर चंद लोग मोदी जी की सरकार को बदनाम कर रहे हैं।






















