★दीपनारायण सिंह★
★केराकत★
{पुलिस कार्रवाई के बजाय कर रही टालमटोल}
♂÷हाईकोर्ट की टिप्पणी के बाद पीएम और सीएम का भी ऐलान आया है कि, पत्रकारों से अभद्रता करने वालों पर लगेगा 50,000 का जुर्माना एवं पत्रकारों से बदसलूकी करने पर हो सकती है,3 साल की जेल पत्रकार को धमकाने वाले को तो 24 घंटे के अंदर जेल भेज दिया जाएगा।पत्रकारों को धमकी के आरोप में गिरफ्तार लोगों को आसानी से नहीं मिलेगी जमानत। सीएम योगी का कहना है कि पत्रकारों को परेशानी होने पर तुरंत संपर्क कर सहायता प्रदान करें और पत्रकारों से मान-सम्मान से बात करें वरना आप को पड़ेगा महंगा लेकिन इस एलान या बयान को केराकत पुलिस लगता है गम्भीरता से नही ले रही।इसी लिए तो दबंगों द्वारा एक पत्रकार को खेत मे गिराकर जान से मारने के प्रयास पर भी पुलिस मौन बैठी है। जानकारी के अनुसार पत्रकार रामशरण यादव के अनुसार उनकी खेतिहर जमीन पर दबंगों द्वारा अवैध कब्जा की मंशा से खेत को जोता जा रहा था जिस पर मना करने पर दबंगों ने पत्रकार रामशरण यादव को बुरी तरह से पीट कर घायल कर दिया और मनबढ़ सरवन कुमार ने तो उनपर असलहा तान लिया जिसपर ग्रामीणों के दौड़ाने पर भाग गए। इस वाक्या की शिकायत पत्रकार ने केराकत कोतवाली पुलिस को तुरंत घायल अवस्था में ही पहुंच कर दी। रामशरण यादव के अनुसार सरवन कुमार व उसके सहयोगी पंकज व फतेहबहादुर भी उस दैरान शामिल रहें।पत्रकार का कहना है कि एक सप्ताह पहले ही दबंगों की मंशा भांपते हुए रामशरण ने कोतवाली व क्षेत्राधिकारी महोदय को प्रार्थना पत्र दिया पर कोई सुनवाई नही हुई।और अब जब दबंगों द्वारा जान से मारने की प्रयास का प्रार्थना पत्र दिया गया तो केराकत पुलिस मामले में काफी टालमटोल कर रही है।आरोप यह भी है कि पुलिस ने एफआईआर तो दर्ज किया पर ना ही असलहे की बात पुलिस सुनने को राजी नही हो रही है नाही कोई कार्यवाही करने का प्रयास हो रहा है।क्या कोई अप्रिय घटना से ही केराकत पुलिसकी निद्रा टूटेगी या फ़िर वक़्त रहते हरकत में आएगी?






















