★मुकेश सेठ★
★मुम्बई★
{चुनाव के बाद मिलेगा पूर्ण राज्य का दर्जा कहा केंद्र सरकार ने,370 व 35A ख़त्म करने के दो साल बाद पीएम मोदी ने 14 नेताओं के साथ की है अहम बैठक}
[काँग्रेस नेता गुलाम नबी आज़ाद ने कश्मीरी पण्डित पिछले तीन दशक से बाहर हैं, यह जम्मू कश्मीर के हर नेता का मौलिक कर्तव्य की कश्मीरी पण्डितो की हो वापसी]
♂÷जम्मू कश्मीर के मुद्दे पर प्रधानमंत्री द्वारा बुलाई गई बहुचर्चित सर्वदलीय बैठक आज सम्पन्न हुई ।
जिसमें सभी दलों ने एक स्वर से जम्मू कांग्रेस को राज्य का दर्जा देने व चुनाव कराने की बात की।
काँग्रेस ने जम्मू-कश्मीर को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ओर से बुलाई गई सर्वदलीय बैठक में इस केंद्रशासित प्रदेश के लिए पूर्ण राज्य का दर्जा बहाल करने, चुनाव कराने और कश्मीरी पंडितों की वापसी सुनिश्चित करने की मांग की. पार्टी के वरिष्ठ नेता गुलाम नबी आजाद के मुताबिक, कांग्रेस की ओर से यह मांग भी उठाई गई कि जमीन एवं रोजगार के मामलों में राज्य के डोमेसाइल की गारंटी दी जाए तथा राजनीतिक बंदियों को रिहा किया जाए.
इस सर्वदलीय बैठक में कांग्रेस की ओर से आजाद, प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष गुलाम अहमद मीर और पूर्व उप मुख्यमंत्री तारा चंद शामिल हुए. प्रधानमंत्री के आवास पर हुई बैठक के बाद जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री आजाद ने संवाददाताओं से कहा, ‘‘इस बैठक में हमने पांच मुद्दे उठाए हैं. पहला यह कि जम्मू-कश्मीर का पूर्ण राज्य का दर्जा बहाल किया जाए. दूसरा, वहां चुनाव कराये जाएं.’’
उन्होंने कहा, ‘‘जम्मू-कश्मीर में बहुत लंबे समय से राज्य के डोमेसाइल के नियम रहे हैं. हमारा यह कहना है कि केंद्र सरकार को गारंटी देनी चाहिए कि जमीन एवं रोजगार को लेकर डोमेसाइल होगा.’’
आजाद ने कहा, ‘‘कश्मीरी पंडित पिछले तीन दशक से बाहर हैं. यह जम्मू-कश्मीर के हर नेता का मौलिक कर्तव्य है कि कश्मीर के पंडितों की वापसी हो. हमसे जो हो सकेगा हम उसमें मदद करेंगे.’’
उन्होंने बताया, ‘‘ पांच अगस्त, 2019 के फैसले के बाद जिन राजनीतिक लोगों को बंदी बनाया गया था, उनको सबको रिहा कर दिया जाना चाहिए. यह मांग भी हमने की है.’’
कांग्रेस नेता के मुताबिक, ‘‘ गृह मंत्री अमित शाह ने कहा कि हम पूर्ण राज्य का दर्जा देने के लिए वचनबद्ध हैं, लेकिन पहले परिसीमन होने दीजिए. परिसीमन के बाद चुनाव भी होंगे और पूर्ण राज्य का दर्जा दिया जाएगा.’’
एक सवाल के जवाब में आजाद ने कहा, ‘‘हम संतुष्ट उस दिन हो जाएंगे जब चुनाव हो जाएंगे और पूर्ण राज्य का दर्जा मिल जाएगा.’’ उन्होंने कहा, ‘‘अगर चुनाव कराना है, लोकतंत्र बहाल करना है तो यह जल्द होना चाहिए. हम चाहते हैं कि लोकतंत्र बहाल होना चाहिए…हम नौकरशाही के खिलाफ नहीं हैं, लेकिन हमने कहा कि नौकरशाही नेताओं का स्थान नहीं ले सकती. जिस तरह नेता लोगों से मिलता है, उस तरह से अधिकारी नहीं मिल सकते.’’
पिछले लगभग दो सालों में पहली बार जम्मू-कश्मीर के राजनीतिक नेतृत्व के साथ वार्ता का हाथ बढ़ाते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस केंद्रशासित प्रदेश के भविष्य की रणनीति का खाका तैयार करने के लिए बृहस्पतिवार को वहां के 14 नेताओं के साथ एक अहम बैठक की.
जम्मू कश्मीर से अनुच्छेद 370 के अधिकांश प्रावधान हटाए जाने और राज्य को दो केंद्रशासित प्रदेशों में विभाजित किए जाने के बाद यह पहली ऐसी बैठक है जिसकी अध्यक्षता खुद प्रधानमंत्री मोदी ने की.






















