★मुकेश सेठ★
★मुम्बई★
{विवादास्पद बयानों से चर्चा में रहने वाले रिज़वी ने पीएम को लिखा ख़त, कहा 26 विवादित आयतों को सही किये गए कुरान-ए-मज़ीद को देशभर में किया जाए लागू}
[शिया वक़्फ़ बोर्ड यूपी के पूर्व चेयरमैन रिज़वी ने कहा कि इन आयतों से पूरे विश्व में मुस्लिम आतंकवाद फ़ैल रहा है]
(रिज़वी ने कहा मौजूदा कुरान-ए-मज़ीद के अध्ययन से मुस्लिम समुदाय के लोग दूसरे ग़ैर मुस्लिम धर्म के लोंगो को काफ़िर मानते हुए गलत समझते हैं)
♂÷कुरान-ए-मज़ीद को लेकर एक बार फिर विवादास्पद चर्चा में आ गए हैं उत्तर प्रदेश के शिया वक़्फ़ बोर्ड के पूर्व चेयरमैन सैयद वसीम रिजवी।
आज उन्हें प्रधानमंत्री को पत्र लिखते हुए कहा कि उनके द्वारा कुरान-ए-मजीद में से 26 उन आयतों को हटाकर सही करते हुए फिर से लिखी गई कुरान ए मजीद की किताब को देशभर के मदरसों में पढ़ाए जाने को लेकर निर्देशित किया जाए।जिससे कि मुस्लिमों और गैर मुस्लिमों में धार्मिक असहिष्णुता ना बढ़े। वक़्फ़ बोर्ड के निर्वाचित सदस्य सैयद वसीम रिजवी ने कहा कि मुसलमानों के आखिरी रसूल मोहम्मद(स.अ.व.) के बाद कुरान-ए-मज़ीद को आखरी बार इस्लाम के तीसरे खलीफा उस्मान द्वारा तैयार कराया गया, जिसको आज तक अल्लाह की किताब मानकर पढ़ा जाता है।
रिजवी ने कहा कि मेरे द्वारा कुरान का अध्ययन किया गया जिसमें पाया गया कि कुरान-ए-मज़ीद में 26 लेख(आयतें) ऐसे हैं जो कि अल्लाह का कथन नहीं हो सकता। क्योंकि वह आयत आतंकवाद, चरमपंथी, कट्टरपंथी मानसिकता को बढ़ावा देती हैं, जिससे इन आयतों के कारण मुस्लिम समाज में आतंकी विचारधारा पैदा हो रही है।
वसीम रिजवी ने आगे कहा कि यही कारण है कि पूरे विश्व में मुस्लिम आतंकवाद चरम पर है। उन्होंने आगे कहा गहन अध्ययन के बाद मेरे द्वारा पूर्व में लिखे गए व लिखवाए गए कुरान मजीद के शुरू को सही क्रम में लगाया गया है और आतंकवाद को बढ़ाना देने वाली 26 आयतों को कुरान ए मजीद से हटा दिया गया है। प्रधानमंत्री से आग्रह करते हुए वसीम रिजवी ने मांग की है कि सही किए गए कुरान ए मजीद को देशभर के सभी मदरसों में पढ़ाया जाना सुनिश्चित किया जाना चाहिए और पूर्व में मुस्लिम समाज में कुरान ए मजीद जो कि सही नहीं है को पढ़ना, पढ़ाया जाना प्रतिबंधित किया जाना चाहिए। पूर्व चेयरमैन ने कहा ऐसी धार्मिक किताब पढ़ी जाना जिससे इंसानों में मतभेद, धार्मिक फसाद हो, दूसरों के धर्म से नफरत पैदा हो, अपने धर्म को सही बता कर दूसरे धर्म का अपमान किया जाए राष्ट्र हित में उचित नहीं है और यह गैर संवैधानिक है।भारत को इस मामले में पहल करना इसलिए जरूरी है क्योंकि भारत में मुस्लिम समेत अन्य धर्म के लोग भी रहते हैं, मौजूदा कुरान ए मजीद के अध्ययन से मुस्लिम समुदाय के लोग दूसरे गैर मुस्लिम धर्म के लोगों को काफिर मानते हुए गलत समझते हैं।
मालूम हो कि इसके पूर्व वसीम रिजवी के द्वारा कुरान मजीद के विवादास्पद आयतों को लेकर सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल की गई थी जिसे कोर्ट ने कुछ हफ़्ते पूर्व ख़ारिज कर दिया है।
अब कुरान-ए-मज़ीद को नए सिरे से लिखने व प्रधानमंत्री के द्वारा उसको देशभर के मदरसों में पढ़ाए जाने की मांग को लेकर इतना तो तय है कि इस पर मुस्लिम धर्मगुरुओं, समाज में इसको लेकर तीखी प्रतिक्रिया और राजनीति होने निश्चित है। आने वाले दिनों में यह देखना यह देखना समीचीन होगा कि इस पर मुस्लिम समुदाय के धर्मगुरु क्या रुख अख्तियार करते हैं, सरकार का क्या रुख रहता है और सैयद वसीम रिजवी अपने इस मत पर कितना दिन तक अड़े रहते हैं।






















