★मुकेश सेठ★
★मुम्बई★
{मुख्यमंत्री की घोषणा से शिवसेना, एनसीपी काँग्रेस में तनातनी बढ़ना तय,धरना प्रदर्शनों के ज़रिए CAA-NPR का विरोध कर रही है एनसीपी काँग्रेस}
[यलगार परिषद मामले की जांच भी एनसीपी काँग्रेस के विरोध के बाद भी उद्धव ठाकरे ने केंद्र सरकार के कहने पर जांच सौंपी है NIA को]
♂÷मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे के यह ऐलान करते ही कि आगामी 1 मई से 15 जून तक
जनगणना के कार्य प्रारम्भ होगा से एक बार फिर सरकार में शामिल तीनो दलों के बीच जबरदस्त मतभेद उभर कर सामने आए हैं।
महाराष्ट्र में सत्ताधारी गठबंधन सरकार में शामिल दलों शिवसेना, कांग्रेस और एनसीपी के बीच तनातनी का माहौल देखने को मिल रहा है। शिवसेना के मुख्यमंत्री और शिवसेना प्रमुख उद्धव ठाकरे ने एक ऐसा कदम उठाया है, जिसके बाद दलों के बीच ऐसा माहौल देखने को मिल रहा है।
दरअसल, उद्धव ठाकरे महाराष्ट्र में 1 मई से नेशनल पॉपुलेशन रजिस्टर (एनपीआर) लागू करना चाहते हैं।
महाराष्ट्र में 1 मई से जनगणना का काम शुरू होगा, जो कि 15 जून तक चलेगा। वहीं कांग्रेस और एनसीपी इसका खुलेआम विरोध कर रही है। एक तरफ कांग्रेस का कहना है कि एनपीआर, एनआरसी का मुखौटा है तो वहीं दूसरी ओर एनसीपी ने भी एनपीआर को लेकर सार्वजनिक रूप से अपनी आपत्तियां दर्ज कराई है।
CAA,NPR को लेकर काँग्रेस एनसीपी सड़को पर उतर कर आंदोलनकारियों के समर्थन में आवाज़ बुलंद कर रही है व कह रही है कि इसको हम महाराष्ट्र में किसी भी कीमत पर लागू नही होने देंगे।इसके बाद भी मुख्यमंत्री व शिवसेना प्रमुख उद्धव ठाकरे ने जनगणना कराने की बात कहकर अपने सहयोगी एनसीपी काँग्रेस को भड़का दिया है।
महाराष्ट्र सरकार ने यह फैसला ऐसे समय में लिया है जब कांग्रेस और एनसीपी एनपीआर, एनआरसी और सीएए का खुलेआम विरोध कर रही है। कांग्रेस और एनसीपी ने पिछले दिनों कहा था कि महाराष्ट्र में वो एनआरसी लागू करने की अनुमति नहीं देंगे। बता दें कि एनसीपी और कांग्रेस ने लगातार एनआरसी, सीएए और एनपीआर का विरोध कर रही है। लिहाजा उद्धव सरकार के इस फैसले के बाद गठबंधन सरकार में शामिल तीनों दलों में एक बार फिर से असमंजस देखने को मिल रहा है।
कांग्रेस ने कहा था कि महाराष्ट्र में नेशनल पॉपुलेशन रजिस्टर (एनपीआर) लागू नहीं किया जाएगा। उद्धव सरकार, एनसीपी और कांग्रेस के समर्थन से सत्ता में बनी हुई है जो एनपीआर का खुलकर विरोध कर रहे हैं। अब ऐसे में सवाल ये खड़ा होता है कि अगर उद्धव ठाकरे एनसीपी और कांग्रेस के खिलाफ जाकर राज्य में एनपीआर लागू करती है तो उद्धव सरकार कैसे चलेगी। क्योंकि शिवसेना के 56 विधायक और एनसीपी के 54 और कांग्रेस के 44 विधायकों को मिलाकर उद्धव सरकार को कुल 169 विधायकों का समर्थन हासिल है। ऐसे में उनके द्वारा लिया गया ये फैसला महाराष्ट्र की राजनीति में एक बार फिर सियासी हलचल को तेज कर सकता है।
हालांकि यह पहला मौका नहीं है जब तीनों दलों में मतभेद देखने को मिला हो। इससे पहले एनसीपी प्रमुख शरद पवार ने एल्गार परिषद मामले की जांच महाराष्ट्र पुलिस से लेकर राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) को सौंपे जाने को लेकर उद्धव ठाकरे सरकार की शुक्रवार को आलोचना की थी। शरद पवान ने पत्रकारों से बातचीत के दौरान कहा कि केंद्र ने मामले की जांच पुणे पुलिस से लेकर NIA को सौंपकर ठीक नहीं किया, क्योंकि कानून-व्यवस्था राज्य सरकार का विषय है।






















