★मुकेश सेठ★
★मुम्बई★
{तालिबान ने निर्वाचित गनी सरकार के विरुद्ध देश पर कब्ज़ा कर लिया है, और राष्ट्रपति अशरफ़ गनी इस्तीफ़ा देकर देश छोड़कर भाग चुके हैं}
[कट्टरपंथी तालिबानी नेता बरादर ने वीडियो पोस्ट में कहा कि इतने कम वक़्त में किसी भी मुल्क को जीत नसीब नही है यह अप्रत्याशित है]
(एक दशक तक छिपा था पाकिस्तान के कराची शहर में,अमेरिका के इशारे पर हुई थी रिहाई)
♂÷काबुल के कब्जे के साथ ही अफगानिस्तान में नई सरकार को लेकर कवायद तेज हो गई है। सूत्रों के मुताबिक कहा जा रहा है कि कट्टरपंथी इस्लामिक समूह तालिबान का नेता मुल्ला अब्दुल गनी बरादर देश का राष्ट्रपति बन सकता है। मुल्ला बरादर ने हाल ही में सोशल मीडिया पर अपना एक वीडियो भी पोस्ट किया है, जिसमें अफगानिस्तान पर बेहद कम वक्त में तालिबान का कब्जा हो जाने पर खुशी का इजहार किया गया है। मुल्ला बरादर ने वीडियो पोस्ट में कहा है, इतने कम वक्त में किसी भी मुल्क को जंग में जीत नसीब नहीं हुई यह अप्रत्याशित है। लेकिन अब हमारे सबसे बड़ी चुनौती अफगानिस्तान की जनता की उम्मीदों पर खरा उतरने और अफगान जनता की समस्याओं को दूर करना हमारे लिए चुनौती होगी।
इस संदेश के कयास लगाये जा रहे हैं कि मुल्ला बरादर अफगानिस्तान की कमान संभालने की तैयारी में है। 2018 में जब कतर में तालिबान और अफगान सरकार के बीच शांति वार्ता शुरू हुई तो मुल्ला बरादर को रिहा कर दिया गया था। तभी से वो पर्दे के पीछे से अफगानिस्तान में तालिबान की दोबारा हुकूमत कायम करने के मिशन को अंजाम देने में जुटा था।
मुल्ला बरादर अफगानिस्तान के उरुजगान प्रांत के देहराऊद जिले का रहने वाला एक पख्तून है। यह 1990 के दशक में इस्लामिक शरिया कानून के मुताबिक शासन चलाने वाले तालिबान की नींव रखने वालों में से एक था। उससे पहले 1980 के दशक में जब सोवियत संघ ने अफगानिस्तान पर नियंत्रण स्थापित करना चाहा तो मुल्ला बरादर ने कंधार से सोवियत फौजों के खिलाफ जेहाद का ऐलान किया। अमेरिका में 9/11 हमले के बाद जब 2001 में तालिबान को सत्ता से उखाड़ फेंका गया तो मुल्ला बरादर अमेरिकी सैनिकों के खिलाफ हमलों में शामिल रहा था। वर्ष 2001 के पहले जब अफगानिस्तान में तालिबान शासन कर रहा था तो उस सरकार में मुल्ला बरादर उप रक्षा मंत्री की हैसियत से काम कर रहा था।
बरादर तालिबान के सबसे बड़े नेता मुल्ला उमर का सबसे भरोसेमंद था। बहुत जल्द ही ये तालिबान का दूसरा सबसे बड़ा नेता बनकर उभरा। तालिबान के लिए फंडिंग जुटाने और नए रंगरूटों की भर्ती के काम में उसे महारत हासिल रही है। अमेरिकी हमले के बाद मुल्ला बरादर भूमिगत हो गया और दस साल बाद पाकिस्तान के कराची शहर में उसे पकड़ा गया। कहा यह भी जाता है कि पाकिस्तान को बरादर के उसके देश में छिपे होने की पूरी जानकारी थी। 2018 में ट्रंप प्रशासन ने उसकी रिहाई करवाई, उसके बाद से यूएस के सेक्रेटरी ऑफ स्टेट माइक पॉन्पियो कई बार उससे मुलाकात कर चुके हैं। अब वो अफगानिस्तान का राष्ट्रपति बनने जा रहा है।






















