★मुकेश सेठ★
★मुम्बई★
{सँयुक्त राष्ट्र संघ के उपप्रवक्ता फ़रहान हक़ ने कहा नेटवर्क ब्लैकआउट्स मुख्य लोकतांत्रिक सिद्धान्तों को करता है कमजोर}
[बख्तरबंद वाहनों के साथ गश्त का मतलब है कि वे लोंगो को धमका रहे हैं कह रहे हैं 46 वर्षीय नागरिक नायिन मो ने]
(1 फ़रवरी को सेना द्वारा आंग सांग सू की की पार्टी की सरकार का तख़्तापलट करते हुए देश में लागू कर दिया है सैन्य शासन)
♂÷गत 1 फ़रवरी को म्यांमार में सेना द्वारा लोकतांत्रिक सरकार का सैन्य तख्तापलट करते हुए देश मे सैन्य शासन लागू करने के बाद से ही लोकतंत्र समर्थक नागरिक सड़कों पर उतर कर सैन्य शासन का जमकर विरोध कर रहे हैं।
उनकी मांग है कि स्टेट काउंसलर आंग सांग सू की के साथ ही बन्दी बनाये गए सभी नेताओं को रिहा करते हुए लोकतंत्र की स्थापना हो।
आज मंगलवार को एक औऱ कम्पनी ने इंटरनेट बन्द कर दिया तो वहीं सँयुक्त राष्ट्र संघ ने इसकी कड़ी आलोचना की है।

सेना ने ये देश भर में अतिरिक्त सैनिकों को तैनात किया है और लगातार दूसरी रात इंटरनेट बंद रहा, जिसने तख्तापलट विरोधी प्रदर्शनों में और भी तेजी ला दी। प्रदर्शनकारी बड़ी तादाद में सोमवार,मंगलवार को फिर सड़कों पर उतर आए।
सेना ने लगातार दो सप्ताह पहले सत्ता को अपने कब्ते में लिया, जिसके बाद देश में विरोध प्रदर्शन शुरू हो गए हैं। सेना ने नेता आंग सान सू समेत सैकड़ों लोगों को हिरासत में लिया है, जिसमें लोकतांत्रिक रूप से चुनी हुई सरकार के सदस्य भी शामिल हैं।
सू की और राष्ट्रपति विन म्यिंट से इस सप्ताह देश की राजधानी नैपीडॉ में “वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से” अदालत द्वारा पूछताछ हो सकती है। वकील खिन माउंग ज़ॉ ने कहा कि वह किसी से भी संपर्क नहीं कर पा रहे हैं। क्योंकि उन्हें तख्तापलट के दिन 1 फरवरी को सुबह में हिरासत में लिया गया था।
जनरलों ने सोमवार सुबह एक घंटे का इंटरनेट बंद किया और देश भर में सैन्य उतार दिए थे। ब्रिटेन स्थित निगरानी समूह नेटब्लॉक के अनुसार, मंगलवार को एक अन्य इंटरनेट कंपनी को बंद कर दिया गया, जिससे संपर्क सामान्य स्तर से 15 प्रतिशत तक गिर गया।
संयुक्त राष्ट्र के उप प्रवक्ता फरहान हक ने कहा कि संयुक्त राष्ट्र के सदस्य क्रिस्टीन श्रानेर बर्गनर ने म्यांमार की सेना के उप-कमांडर सोइ विन के साथ बात की और चेतावनी दी कि नेटवर्क ब्लैकआउट्स मुख्य लोकतांत्रिक सिद्धांतों को कमजोर करता है।
हक ने कहा कि इस तरह के शटडाउन “बैंकिंग सहित प्रमुख क्षेत्रों को नुकसान पहुंचाते हैं और घरेलू तनाव को बढ़ाते हैं। इसलिए, हमने इस बारे में अपनी चिंताओं को स्पष्ट किया है।
46 वर्षीय नायिन मो ने कहा, “बख्तरबंद वाहनों के साथ गश्त का मतलब है कि वे लोगों को धमका रहे हैं।”
दोपहर तक सू की की नेशनल लीग फ़ॉर डेमोक्रेसी (एनएलडी) पार्टी के शहर मुख्यालय में बड़ी संख्या में पुलिस मौजूद थी।
देश भर में लोगों ने सू की की रिहाई के लिए सोमवार को सड़कों पर उतरना जारी रखा। नैपीडॉ में छात्र समूहों के नेतृत्व में प्रदर्शन हुआ। पुलिस ने दर्जनों युवा प्रदर्शनकारियों को भी गिरफ्तार किया, हालांकि कुछ को बाद में रिहा कर दिया गया।
देश के दूसरे सबसे बड़े शहर मंडले में सुरक्षाबल और लोगों के बीच झड़प हुई, जिसमें कम से कम छह घायल हो गए। पुलिस ने प्रदर्शनकारियों के खिलाफ गुलेल का इस्तेमाल किया और भीड़ पर रबर की गोलियां दागीं। घटनास्थल पर पत्रकारों ने यह भी कहा कि पुलिस ने हाथापाई में उनकी पिटाई की।
मालूम हो कि अमेरिका,भारत,सँयुक्त राष्ट्र संघ समेत दुनियां के तमाम देशों ने म्यांमार में सैन्य तख्तापलट की निंदा करते हुए सू की समेत नेताओं को रिहा करते हुए लोकतांत्रिक सरकार स्थापित करने की बात कही है तो वहीं सेंना ने एक साल में चुनाव कराए जाने की बात कही है।






















