★मुकेश सेठ★
★मुम्बई★
{सऊदी इस्लामिक मामलों के मन्त्रालय ने इस मामले पर कहा कि मस्जिद में उपदेशकों को निर्देश दिया गया कि वे लोगों को तब्लीगी जमात के बारे में करे आगाह}
[150 देशों में सक्रिय तब्लीगी जमात के दुनियाभर में हैं 400 मिलियन सदस्य और इसकी स्थापना 1926 में भारत मे हुई थी]
(यूनाइटेड स्टेट्स इंस्टिट्यूट ऑफ पीस ने तब्लीगी जमात को एक इस्लामी पुनरुत्थानवादी संगठन बताया)
♂÷सऊदी अरब ने तबलीगी जमात पर प्रतिबंध लगा दिया है। वह इसे आतंकवाद का दरवाजा कहा है। सऊदी इस्लामिक मामलों के मंत्रालय ने इस मामले पर एक ट्वीट किया। कहा, मस्जिद में उपदेशकों को निर्देश दिया गया है कि वे लोगों को तबलीगी जमात के बारे में आगाह करने के लिए अगले शुक्रवार को उपदेश दें।
तबलीगी जमात समाज के लिए खतरा
मंत्रालय ने कहा कि इस संगठन ने लोगों को अपने पथ से भटकाया है। यह एक खतरे की घोषणा है। यह आतंकवाद के द्वारों में से एक है। भले ही वे कुछ भी दावा करें, लेकिन उनकी सभी गलतियों के बारे में लोगों को बताएं। सरकार ने धार्मिक क्षेत्रों के लोगों से जनता को समझाने के लिए कहा है। उन्हें बताया जाए कि तबलीगी तमाज समाज के लिए खतरा है। बता दें सऊदी सरकार इस मामले को काफी गंभीरता से ले रही है। देश के इस्लामिक मामलों के मंत्रालय ने इस संबंध में कई ट्वीट किए हैं।
गौरतलब है कि तबलीगी जमात 1926 में भारत में अस्तित्व में आया था। यह एक सुन्नी इस्लामिक मिशनरी आंदोलन है। जो मुसलमानों से सुन्नी इस्लाम में लौटने और धार्मिक उपदेश देने का काम करता है। दुनिया भर में इसके करीब 400 मिलियन सदस्य है। यह संगठन दावा करती है कि उनका ध्यान केवल धर्म पर है। वे राजनीतिक गतिविधियों और बहस से सख्ती से बचते हैं।
यूनाइटेड स्टेट्स इंस्टीट्यूट ऑफ पीस ने तबलीगी जमात को एक इस्लामी पुनरुत्थानवादी संगठन बताया है। वहीं भारत में पिछले साल कोविड महामारी की पहली लहर के दौरान दिल्ली के निजामुद्दीन क्षेत्र में एक सामूहिक सभा करने पर संगठन की काफी आलोचना हुई थीं।
इन देशों में संगठन के सदस्य
प्यू रिसर्च सेंटर के अनुसार तबलीगी जमात पश्चिमी यूरोप, अफ्रीका और दक्षिण एशिया सहित दुनिया भर के करीब 150 देशों में सक्रिय है। दक्षिण एशिया में संगठन की बहुत बड़ी संख्या है। खासतौर पर इंडोनेशिया, मलेशिया, बांग्लादेश, पाकिस्तान और थाईलैंड में।






















