★मुकेश सेठ★
★मुम्बई★
{हाई कोर्ट ने ऑडियो वीडियो रिकॉर्डिंग और खुली सुनवाई करने पर आयोग से माँगा जबाब} [एक्टिविस्ट उर्वशी शर्मा की याचिका पर हुई बड़ी कार्यवाही यूपी सरकार ने दिखाई तेजी]

♂÷महिला उत्पीड़न के मामलों की जांचों के लिए आतंरिक परिवाद समिति बनाए जाने को लेकर दसियों साल से टालमटोल करने वाला उत्तर प्रदेश का राज्य सूचना आयोग सूबे के हाई कोर्ट की जोरदार फटकार पड़ते ही राईट टाइम हो गया है और आयोग ने कुछ घंटों में ही विशाखा समिति का गठन करते हुए सम्बंधित आदेश को 24 घंटों में ही हाई कोर्ट के सामने पेश भी कर दिया है।
बताते चलें कि सूचना आयोग में महिलाओं के अधिकारों के संरक्षण के लिए लम्बे समय से प्रयत्नशील देश की नामचीन समाजसेविका और आरटीआई एक्टिविस्ट उर्वशी शर्मा द्वारा अधिवक्ता शीतला प्रसाद त्रिपाठी और सौरभ कुमार श्रीवास्तव के मार्फत हाई कोर्ट की लखनऊ बेंच में दायर की गई एक याचिका पर सुनवाई करते हुए जस्टिस देवेन्द्र कुमार अरोड़ा और जस्टिस अलोक माथुर की बेंच ने बीती 29 मई को आयोग द्वारा महिला अधिकारों के प्रति उदासीन रवैया रखने की बात सामने आने पर सख्त रुख अख्तियार किया था और यूपी के सूचना आयोग और मुख्य सूचना आयुक्त जावेद उस्मानी को जमकर लताड़ लगाई थी।उर्वशी के अधिवक्ता,शासन के स्थाई अधिवक्ता व सूचना आयोग सहित मुख्य सूचना आयुक्त के अधिवक्ता शिखर आनंद को सुनने के बाद कोर्ट ने आयोग को 24 घंटे का समय देते हुए सुप्रीम कोर्ट के द्वारा विशाखा मामले में दिए गए निर्देशों और महिलाओं का कार्यस्थल पर लैंगिक उत्पीड़न (निवारण प्रतिषेध एवं प्रतितोष) अधिनियम 2013 की धारा 4 के अनुपालन में आयोग में आतंरिक परिवाद समिति गठित करने के सम्बन्ध में की गई कार्यवाही पर जबाब मांगा था और मामले को सुनवाई के लिए अगले दिन फिर से सूचीबद्ध कर दिया था।
बीती 30 मई की सुनवाई में आयोग के अधिवक्ता शिखर आनंद ने बताया कि हाई कोर्ट के आदेश पर आयोग में उसी दिन विशाखा समिति का गठन हो गया है और सम्बंधित आदेश न्यायालय के समक्ष पेश किया जिसे न्यायालय ने रिकॉर्ड में ले लिया।
एक्टिविस्ट उर्वशी के अधिवक्ता शीतला प्रसाद त्रिपाठी और सौरभ कुमार श्रीवास्तव ने बताया कि याचिका में सूचना आयोग की सुनवाइयों की ऑडियो वीडियो रिकॉर्डिंग कराने और आयोग में खुली सुनवाई की व्यवस्था लागू कराने की दो अन्य याचनाएं भी की गईं थीं जिनके सम्बन्ध में पक्ष-विपक्ष की बहस सुनने के बाद जस्टिस देवेन्द्र कुमार अरोड़ा और जस्टिस अलोक माथुर की बेंच ने सरकार, आयोग और मुख्य सूचना आयुक्त से जबाब मांग लिया है और जबाब दाखिल करने के लिए 4 हफ्तों का समय दिया है।
उर्वशी ने बताया कि वे खुश हैं कि हाई कोर्ट के दखल के बाद अब यूपी के राज्य सूचना आयोग में महिलाओं का उत्पीडन होने की दशा में उनको अपनी बात कहकर न्याय पाने के लिए सूचना आयोग में ही एक प्लेटफॉर्म मिल गया है,बकौल उर्वशी महिलाओं को उनका संवैधानिक अधिकार दिलाने के इस नेक काम के लिए देश की आधी आबादी विशाखा समिति का गठन करने का आदेश करने वाली जस्टिस देवेन्द्र कुमार अरोड़ा और जस्टिस अलोक माथुर की बेंच की सदैव आभारी रहेगी।
हाई कोर्ट का आदेश : ->
COURT NO. – 5
CASE :- MISC. BENCH NO. – 15309 OF 2019
PETITIONER :- URVASHI SHARMA
RESPONDENT :- STATE OF U.P. THRU PRIN. SECY. ADMINISTRATIVE REFORMS & ORS.
COUNSEL FOR PETITIONER :- SHITLA PRASAD TRIPATHI,SAURABH KUMAR SRIVASTAVA
COUNSEL FOR RESPONDENT :- C.S.C.,SHIKHAR ANAND
HON’BLE DR. DEVENDRA KUMAR ARORA,J. HON’BLE ALOK MATHUR,J.
HEARD LEARNED COUNSEL FOR THE PARTIES.
AS PER THE EARLIER ORDER OF THIS COURT DATED 29.05.2019 MR. SHIKHAR
ANAND, LEARNED COUNSEL FOR THE RESPONDENT NOS. 2 & 3 HAS PRODUCED THE
ORDER DATED 29.05.2019 WHEREBY THE COMMITTEE UNDER THE PROVISIONS OF
SECTION 4 OF THE SEXUAL HARASSMENT OF WOMEN AT WORKPLACE (PREVENTION,
PROHIBITION AND REDRESSAL) ACT, 2013 HAS BEEN CONSTITUTED.
LEARNED COUNSEL FOR THE RESPONDENTS PRAYS FOR AND IS GRANTED FOUR
WEEKS’ TIME TO FILE COUNTER AFFIDAVIT, THEREAFTER THREE WEEKS’ TIME IS
GRANTED TO THE COUNSEL FOR THE PETITIONER TO FILE REJOINDER AFFIDAVIT.
LIST IMMEDIATELY, THEREAFTER.
PHOTO COPY OF THE ORDER DATED 29.05.2019 IS TAKEN ON RECORD.
ORDER DATE :- 30.5.2019
A.K. SINGH






















