【70 साल बाद किसे मिलेंगे हैदराबाद निजाम के 35 मिलियन पाउंड,ब्रिटिश कोर्ट से आएगा जजमेंट】

【70 साल बाद किसे मिलेंगे हैदराबाद निजाम के 35 मिलियन पाउंड,ब्रिटिश कोर्ट से आएगा जजमेंट】

★मुकेश सेठ★
★मुम्बई★
{1948 में हैदराबाद के तत्कालीन निजाम ने लन्दन की बैंक में भेजी थी 1 मिलियन पाउण्ड की रकम,जो अब मय ब्याज़ बढ़कर हुई 3.5 करोड़ पाउण्ड}
[भारत,हैदराबाद के 7वे निज़ाम के वन्शज समेत पाकिस्तान भी लड़ रहा है ब्रिटिश कोर्ट में रक़म की दावेदारी का मुकदमा]
(1965 में अपनी मौत से दो साल पहले ही निज़ाम ने उस रक़म को भारत को सौंपे जाने की लिखित रूप से कोर्ट में कही)

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♂÷70 साल बाद इंग्लैंड एवं वेल्स हाई कोर्ट हैदराबाद के निजाम के पैसों से जुड़े एक एतिहासिक केस पर फैसला सुनाने वाला है। इस केस में भारत, पाकिस्तान और हैदराबाद के 7वें निजाम के वंशज तीनों दावेदार हैं। बात 1948 की है जब हैदराबाद के तत्कालीन निजाम ने 1 मिलियन पाउंड (0.1 करोड़ पाउंड ) की रकम लंदन की एक बैंक को भेजा था। जिसकी आज की संभावित कीमत 35 मिलियन पाउंड ( यानी 3.5 करोड़ पाउंड) आंकी जा रही है। गौरतलब है कि मंगलवार को 1 पाउंड की कीमत करीब 88 रुपये थी।

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किसे मिलेंगे हैदराबाद के निजाम के पैसे
एक रिपोर्ट के मुताबिक जब से यह केस शुरू हुआ है, इसमें कई उतार-चढ़ाव आए हैं। इस रकम पर भारत और हैदराबाद के निजाम के वंशज एक तरफ और दूसरी तरफ पाकिस्तान दावा कर रहा है। पाकिस्तान इस आधार पर दावा करता है कि यह रकम उसकी जनता को गिफ्ट के तौर पर भेजी गई थी या 1948 में हैदराबाद स्टेट को भारत में शामिल किए जाते वक्त उससे वहां की मदद की जानी थी।
इंतजार करते-करते दम तोड़ चुके हैं कई उत्तराधिकारी
इतनी बड़ी रकम के दावेदारों में मुफ्फाखाम जाह और भारत संघ और भारत के राष्ट्रपति शामिल हैं। हैदराबाद के 7वें निजाम ने 1 मिलियन पाउंड की यह रकम लंदन में पाकिस्तान के तत्कालीन राजदूत हबीब इब्राहिम राहिमतूला को इस शर्त पर भेज थी कि वह उसे विश्वास के साथ उसे सुरक्षित रखेंगे। लंदन के नैट वेस्ट बैंक में पड़े इस रकम के साथ लगातार ब्याज जुड़ता गया है। दावेदारों के वकील ने बताया कि 7वें निजाम के उत्तराधिकारी मुकर्रम जाह “और उनके छोटे भाई ने अपने दादा की गिफ्ट मिलने का दशकों तक इंतजार किया। पाकिस्तान ने इसपर 70 वर्षों से अड़ंगा लगा रखा है और हम उम्मीद करते हैं कि हालिया सुनवाई में इसका कोई अंतिम समाधान निकल आएगा।”

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भारत का दावा क्यों है मजबूत
दरअसल, अपनी मौत से दो साल पहले ही 1965 में निजाम ने उन पैसों को भारत को लिखित रूप में सुपूर्द करने की बात कही थी। जबकि, पाकिस्तान उससे भी लगभग दो दशक पहले संभालकर रखने के लिए दी गई उस रकम पर अपना दावा जताने पर लगा हुआ है। जस्टिस मर्कस स्मिथ की अदालत में हाल ही में इस केस का ट्रायल खत्म हो चुका है और माना जा रहा है कि गर्मियों के बाद इस पर फैसला आ जाएगा। इस केस की सुनवाई दशकों तक हाऊस ऑफ लॉर्ड्स समेत ब्रिटेन के कई अदालतों में चल चुकी है। लेकिन, अब जाकर अंतिम फैसला आने की उम्मीद जगी है।

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