लेखक~डॉ.के. विक्रम राव
♂÷नवाबी लखनऊ में छोटी दीवाली कल (रविवार, 13 नवंबर 2022) फिर मन गई। खूब पटाखे फूटे। दूर ग्यारह हजार किलोमीटर मेलबर्न क्रिकेट स्टेडियम में पाकिस्तान हारा। मगर प्रधानमंत्री (मुस्लिम लीग) मियां मोहम्मद शहबाज शरीफ ने अशिष्टता की। शरीफ के मायने है कुलीन, तमीजदार ! किन्तु कटुता उन्होने ही सर्जायी। उनकी टिप्पणी ओछी थी। इंग्लैंड द्वारा सेमीफाइनल में भारत को हरा देने पर। इसका सटीक जवाब टी. वी. एंकर खान मोहम्मद इरफान खान पठान, बड़ौदावाले, ने दिया : “वजीरे-आजम साहब ! हमें दूसरे की पीड़ा पर दुख होता है। आपको सुख। यही दोनों में फर्क है।” भारतीय तेज बॉलर 32-वर्षीय, अमरोहा में जन्मे, बरेली में पढ़े, मोहम्मद शमी ने भी माकूल जवाब दिया। उस पर पाकिस्तान के पूर्व तेज बॉलर (रावलपिंडी एक्सप्रेस) मियां शोएब अख्तर शमी से नाराज हो गये। पाकिस्तान के करम फूटने वाली शमी की राय पर।
शोएब मियां का विचार था : “इंडिया बहुत गंदा खेला। डिजर्व करता था हारना। जिस तरह से खेला उस हिसाब से बिल्कुल भी जीत का हकदार नहीं था। बड़े गंदे तरीके से पिटाई खाई। टीम को एक भी विकेट नहीं मिला। गेंदबाजी एक्सपोज हो गई। इंडिया के पास कोई फास्ट बॉलर नहीं है। युजवेंद्र चहल उनका मेन स्पिनर है और पता नहीं उनको क्यों नहीं खिलाया ?”
पाकिस्तानी प्रधानमंत्री के ट्वीट पर एक भारतीय यूजर ने जवाब दिया : “आप किसको सपोर्ट करोगे, क्योंकि आपका तथा आपके अग्रज नवाज शरीफ का पैसा तो है इंग्लैंड में ही इन्वेस्ट हुआ है।” कुछ ट्विटर यूजर्स ने लिखा : आप पाकिस्तान के प्रधानमंत्री हैं या फिर पाकिस्तान के प्राइम कॉमेडियन?” भारतीय यूजर्स ने शाहबाज शरीफ को 1971 की लड़ाई की भी याद दिला दी और कहा : “आपका रिकॉर्ड तो 93,000 सैनिकों, (बांग्लादेश युद्ध), बनाम शून्य भारतीय सैनिक वाला है।” पाकिस्तानी यूजर्स ने भी शाहबाज शरीफ को ट्रोल किया और लिखा कि : “मियां जी, वर्ल्ड कप के अलावा मुल्क पर भी फोकस कर लें।” मगर शाहबाज शरीफ का मजाक ज्यादा फूहड़ था। दरअसल उन्होने ने कहा कि रविवार को 152/0 बनाम 170/0 का फाइनल मुकाबला होगा। पिछले टी-20 मैच में भारत ने पाकिस्तान को 10 विकेट से मात दे डाली है। उस वक्त पाकिस्तान का स्कोर 152 था।
कितना अंतर रहा 1992 में पाकिस्तान द्वारा विश्वकप की विजय के अवसर पर ? तब भारत भर में पड़ोसी की विजय हेतु इबादतें हुई थी। कप्तान मोहम्मद इमरान खान ने भारत से याचिका की थी : “एशिया की यूरोप पर फतह की दुआ मांगे।” नतीजे में पाकिस्तान ने इंगलैंड को हराया था। उस वक्त साप्ताहिक “मेइनस्ट्रीम” के वामपंथी संपादक निखिल चक्रवर्ती ने इसके लिए अपील भी की थी। हम सब इंडियन फेडरेशन आफ वर्किंग जर्नलिस्ट (IFWJ) के सदस्यों ने भी पाकिस्तान जीत के लिए अल्लाह ताला से अर्चना की थी। इमरान खान की टीम जीती थी। प्रश्न तो है इसबार इतनी तल्खी क्यों ?
इसी बीच शोएब अख्तर के साथी रहे शोएब मलिक और उनकी हैदराबादी बीवी टेनिस खिलाड़ी सानिया मिर्जा के तलाक की अफवाह है। वजह है पाकिस्तानी मॉडल और फिल्मी अदाकारा आएशा ओमर से उनका इश्क !
इस्लामी पाकिस्तान की फटेहाल हार के इंग्लैंड के मियां आदिल रशीद और मियां मोइन अहमद अली ही शिल्पी हैं। इन दोनों नमाजी अकीदतमंदों ने पाकिस्तान की बधिया बैठा दी थी। मोहम्मद हैरिस को फील्डर आदिल रशीद ने मात्र आठ रन पर आउट कर दिया। खेल की धारा मोड़ दी। कप्तान बाबर आजम ने 32 रन बनाकर जीत को आसान बना दिया था। तब बार्मिंघम में जन्मे कश्मीरी सुन्नी आदिल उस्मान रशीद ने बाबर को गुगली फेंक कर आउट कर दिया। अर्थात बाबर मेलबर्न मैदान को पानीपत नहीं बना पाए। इसके बाद ही खैबर पख्तुनवा के बालर मोहम्मद वसीम वजीर की गेंद पर इंगलैंड के मोइन मुनीर अली ने तीन चौके लगाकर पाकिस्तान को दौड़ के बाहर कर दिया। इंग्लैंड के कप्तान जॉस बटलर ने जीत के जलसे में इन दोनों मुसलमानों को बाहर भेज दिया था क्योंकि वहाँ दारू पार्टी (शेम्पेइन) चल रही थी इस्लाम मे मद्यपान वर्जित है। दोनों के अकीदे का पूरा ख्याल रखा गया। अभी तक इस्लामी जम्हरियाये पाकिस्तान के कठमुल्लों का फतवा नहीं आया हैं कि मोइन और आदिल का काफिर करार दिया गया है। उधर पुराने क्रिकेटर युवराज सिंह ने अपनी ससुराल की टीम को मुबारकबाद दिया। उनकी वाइफ़ श्रीमती हेज़ल कीथ का मायका इंग्लैंड है। इसी भांति कई ब्रिटिश नागरिकों ने कहा कि ऋषि सुनक का इंग्लैंड को यह जीत श्रेष्ठतम उपहार है। पाकिस्तान को बददुआ लगी थी। इंग्लैंड बैटर बेन स्टोक्स हैरतअंगेज अंग्रेज निकला। मामूली पड़ोसी वामनाकार आयरलैंड से हारकर भी इंग्लैंड आगे बढ़ता रहा।
खास बात : पाकिस्तानी दर्शकों ने सारी दर्शकदीर्घा पर सुबह से ही कब्जा जमा लिया था। चांद सितारों का हरा परचम लहरा रहा था। अल्लाहहु अकबर की गूंज के साथ। एक पोस्टर भी लगा था कि : “हिंदुस्तान से हार कर भी फाइनल में हम वापस आ गए।” भारत ने पाकिस्तान को चार विकेट से हराया था। हालांकि चंद भारतीय दर्शकों ने यदाकदा इंगलैंड के बैटर द्वारा चौके लगाने और पाकिस्तानी विकेट गिरने पर तालियाँ बजाई थीं। अल्लाह की इनायत नहीं रही अतः तेज बालर शाहीन शाह अफरीदी चोटिल हो गया था।
भारत की हार पर ही पाकिस्तान दोनों बार फाइनल में पहुंचा था। सन 1992 में इंग्लैंड मे और इस बार मेलबर्न में। जिंबाब्वे से हारकर पाकिस्तान का फाइनल में पहुंचना धूमिल दिख रहा था। वेस्टइंडीज और ऑस्ट्रेलिया दोनों दिग्गजों का शुरुवात मे ही हार जाना एक गजब का संयोग रहा। नीदरलैंड ने साउथ अफ्रीका को हराया तो पराजित पाकिस्तान की लाटरी फिर खुल गई। हालांकि इस्लाम में अंधविश्वास करना गुनाह है किंतु जब कप्तान बेन स्टोक्स की पहली गेंद ही “नो बॉल” निकली तो पाकिस्तानी दर्शकों हर्षित हो गये, क्योंकि कि 1992 मैं इंग्लैंड के डेरिक प्रिंग्ले ने भी पहली बाल “नो बॉल” डाली थी। तभी पाकिस्तान विश्वकप जीता था। इस बार एक नजारा था मैदान पर। निराश पाकिस्तानी बार बार आसमान की ओर ताकते रहे थे कि शायद वर्षा हो जाये। भारत बांग्लादेश को बारिश के कारण ही (2 नवंबर 2022) हरा पाया था। मगर वरुण देवता ने पाकिस्तान का साथ नहीं दिया क्योंकि उन्हे बाबर आजम पूजता नहीं है। अंततः इस्लामी गणराज्य के टीम की हार मंजूरे-मुस्तफा ही थी। बाबर मेलबोर्न को पानीपत नहीं बन सका।

÷लेखक IFWJ के नेशनल प्रेसिडेंट व वरिष्ठ पत्रकार/स्तम्भकार हैं÷






















