★मुकेश सेठ★
★मुम्बई★
{भारत सरकार के मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. आशीष कुमार जायसवाल ने वर्षों गहन शोध उपरांत लिखी पुस्तक”पुरातन भारतीय ग्रँथों में होमियोपैथी चिकित्सा सिद्धांत के दर्शन”में रखे अकाट्य तर्क व तथ्य}
♂÷भारत सरकार के होम्योपैथी में मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉक्टर आशीष कुमार जायसवाल के द्वारा वर्षों के गहन शोध के उपरांत लिखित पुस्तक”पुरातन भारतीय ग्रँथों में होमियोपैथी चिकित्सा के दर्शन” ने दशकों से चले आ रहे कि होमियोपैथी की जन्मस्थली ज़र्मनी होने के दावे पर प्रश्नचिन्ह लगाते हुए इस चिकित्सा पद्धति को हजारों वर्षों से भारतीय चिकित्सा पद्धति होने के बाबत अनेको प्रमाण पुस्तक में देकर भारतीयों को एक बार फ़िर से गौरवान्वित होने का अवसर दिया है।

होम्योपैथी के इतिहास पर हाल ही में प्रकाशित पुस्तक ” पुरातन भारतीय ग्रंथों में होम्योपैथी चिकित्सा सिद्धांत के दर्शन” जहाँ एक ओर होम्योपैथी के इतिहास में एक नए अध्याय का सूत्रपात करती है वहीँ एक बार फिर से अपने गौरवशाली इतिहास पर गर्व करने का हमें स्वर्णिम अवसर प्रदान करती है।एक बार पुनः प्रश्न उत्पन्न होता है कि भारतीय इतिहास का सही मूल्याङ्कन क्यों नहीं होता है?
यह शोधपरक पुस्तक चर्चा का विषय रहा क्योंकि जहाँ होम्योपैथी के विषय में कहा जाता रहा कि यह मूल रूप से जर्मनी में विकसित हुई एवं भारत वर्ष में इसका इतिहास ज्यादा पुराना नहीं है , वहीँ यह पुस्तक इसी बात का खंडन करते हुए भारत में होम्योपैथी के इतिहास को न सिर्फ हजारों वर्ष पूर्व बताती है बल्कि होम्योपैथी का जन्म हिंदुस्तान में ही होने का दावा करती है।
गहन शोधपरक पुस्तक के लेखक डॉ आशीष कुमार जायसवाल देश के जाने – माने होम्योपैथिक विशेषज्ञ हैं एवं वर्तमान में भारत सरकार के मुख्य चिकित्सा अधिकारी के पद पर तैनात भी हैं।
होम्योपैथी में एम डी, एवं पी एच डी डिग्री धारक डॉ जायसवाल कई वर्षों तक राष्ट्रपति भवन एवं संसद भवन में होम्योपैथी चिकित्सा विशेषज्ञ भी रहे एवं राज्यपाल – राजस्थान के निजी होम्योपैथिक चिकित्सक भी हैं। संस्कृत विषय में व्यक्तिगत रूचि रखने वाले इस लेखक ने अपनी पैनी कलम से ऐतिहासिक तथ्यों के आलोक में इस बात को सफलता पूर्वक सिद्ध किया है कि होम्योपैथी के जिन चिकित्सा सूत्रों को अब तक पाश्चात्य देशों में अविष्कृत माना जाता था वास्तव में वो चिकित्सा सूत्र पुरातन भारतीय ग्रंथों में स्पष्ट रूप से मौजूद हैं।
होम्योपैथी के इन चिकित्सा सूत्रों का ऋग्वेद, भागवत पुराण , मीमांसा, आयुर्वेद, अभिज्ञान शाकुंतलम इत्यादि में पहचान करके उसको संकलित करना एक बेहद ही दुष्कर एवं अद्वितीय कार्य था लेकिन इस कार्य को मूर्त रूप देकर लेखक डॉक्टर आशीष कुमार जायसवाल ने जो कार्य किया है उसके लिए वे भूरि – भूरि प्रशंसा व अशेष बधाई के पात्र हैं।
यह पुस्तक होम्योपैथी में भारत के योगदान की दृष्टि से इतिहास एवं दर्शन के क्षेत्र में मील का पत्थर साबित हो रही है।






















