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(मुकेश सेठ)
(मुंबई)

ट्रेनी आइएएस रही पूजा खेडेकर विवाद के बीच निजी कारण बता अध्यक्ष ने छोड़ा पद

परिवार की मदद के लिए कभी अगरबत्ती तक बेचने वाले डॉ मनोज सोनी वीसी से लेकर UPSC चेयरमैन पोस्ट पर निभाए दायित्व

खेडेकर के बाद और भी कई आइएएस अफसरों पर फ़र्जी दिव्यांगता प्रमाण पत्र लगाने की चर्चा पकड़ रही जोर,गाज गिरना है तय

देश के अति प्रतिष्ठित व गुरुत्तर पद माने जाने वाले UPSC चेयरमैन की कुर्सी को आज डॉक्टर मनोज सोनी ने इस्तीफ़ा देकर छोड़ दिया है।

उन्होंने पद छोड़ने का कारण हालांकि निजी बताया है किन्तु कहा यही जा रहा है कि जिस तरह से पूर्व ट्रेनी आइएएस पूजा खेडेकर के द्वारा फ़र्जी प्रमाण पत्र के जरिये आईएएस परीक्षा उत्तीर्ण करने के हैरतअंगेज मामले महाराष्ट्र ही नहीं बल्कि देश की मीडिया, सोशल मीडिया में गर्माये हुए है जिसके चलते ही आज UPSC के चेयरमैन पद से मोदी सरकार के कहने पर उन्होंने इस्तीफ़ा दिया है।
मालूम हो कि ट्रेनी IAS पूजा खेडेकर के द्वारा भारत की सर्वाधिक प्रतिष्ठापरक यूपीएससी की परीक्षा को उत्तीर्ण करने के लिए जिस तरह से फ़र्जी जाति प्रमाण पत्र, दिव्यांगता प्रमाण पत्र आदि को लगाकर किसी सुपात्र अभ्यर्थी का हक खाते हुए IAS ऑफिसर बन बैठी थी वह बेहद सनसनीखेज ही नही वरन अमिट धब्बा भी लगा दिया है।
हालांकि पूजा खेडेकर के विरुद्ध अनेकों मामले में केस दर्ज हो चुका है, जाँच समिति बनाकर जाँच शुरू हो चुकी है।इससे इतना तो तय है कि सरकार के पास सेवा से बर्खास्त करने और जेल भेजने के सिवा और कोई राह नही बचेगी।
उधर मीडिया पर जिस तरह से पूजा खेडेकर के मामले गर्माये हुए है तो वहीं सोशल मीडिया में इसी तरह से अनेक आइएएस अफसरों की फ़र्जीगिरी के वीडियो सामने आने शुरू हो गये है।
आने वाले दिनों में अनेक ऐसे अफसरों की जांच होनी निश्चित है जिन्होंने दिव्यांगता प्रमाण पत्र लगाकर UPSC की परीक्षा में मिलने वाली विशेष छूट और सहूलियत लेकर आज IAS और IPS बनकर अति महत्वपूर्ण सेवा में बने हुए हैं।
UPSC चेयरमैन के पद से निजी कारण गिना कर रिजाइन कर देने वाले डॉ मनोज सोनी का इस पद को सुशोभित करने तक का सफ़र काफी संघर्षों से भरा हुआ था तो वहीँ कहीं न कहीं सत्ता से राह सुगम भी बन पड़े थे।
डॉ मनोज सोनी गुजरात से ही नरेंद्र मोदी के ख़ास माने जाने वालों में शुमार किये जाते रहे हैं,यहाँ तक कि उनको लोग “छोटे मोदी” तक कहते हैं।
25 वर्षों का शिक्षण अनुभव रखते हैं, डॉ सोनी दो बार कुलपति के रूप में अपनी सेवा दी है।
पहले बदौड़ा के महाराजा सयाजीराव विश्वविधालय में वर्ष २००५ से २००८ फिर फ़िर वर्ष २००९ से २०१५ में डॉ बाबासाहेब आंबेडकर मुक्त विश्वविधालय के कुलपति रहें।
डॉ सोनी भारत में अब तक के सबसे कम उम्र के कुलपति के रूप में पदस्थ होने के लिए जाने जाते हैं ,उन्हें अंतरराष्ट्रीय मामलों के विषेशज्ञ के रूप में भी जाना जाता है।
डॉ मनोज सोनी ने अपनी पीएचडी “शीत युद्ध के बाद अंतरराष्ट्रीय प्रणालीगत संक्रमण और भारत-यूएस संबंध” विषय पर की है।
५ अप्रैल २०२३ को यूपीएससी चेयरमैन के रूप में नियुक्ति के बाद,डॉ सोनी से संबंधित खबरें कई मीडिया संस्थानों में प्रमुखता से प्रकाशित हुईं थी।
उस दौरान टाइम्स ऑफ इंडिया में प्रकाशित लेख का शीर्षक था “उस साधु से मिलिए जो अब यूपीएससी का प्रमुख होगा”।इस खबर में बताया गया है कि कैसे मनोज सोनी ने अपने पिता के निधन के बाद परिवार की मदद के लिए मुंबई के भुलेश्वर् में अगरबत्ती तक बेचीं और बाद में अपनी योग्यता, विद्वता के बूते देश में सबसे कम उम्र के कुलपति बन गए।
द बेटर इंडिया ने अगरबत्ती पर जोर देते हुए एक लेख प्रकाशित किया, जिसका शीर्षक था, “अगरबत्ती बेचने से यूपीएससी अध्यक्ष तक: डॉ मनोज सोनी के बारे में 10 दिलचस्प तथ्य”। आगे लेख में लिखा गया है कि डॉ सोनी का स्वामीनारायण संप्रदाय के अनूपम मिशन से जुड़ाव है और उन्होंने जनवरी 2020 में “निष्कर्म कर्मयोगी (निस्वार्थ कार्यकर्ता)” के रूप में दीक्षा ली।
वर्ष २००७ की एक रिपोर्ट में लिखा गया है कि कैसे बड़ौदा में एमएस विश्वविद्यालय परिसर में डॉ मनोज सोनी को “छोटे मोदी” के नाम से बुलाया जाता था।
डॉ मनोज सोनी जिस स्वामीनारायण संप्रदाय से जुड़े हैं उसे सोखड़ा स्वामीनारायण संप्रदाय कहा जाता है। कुल पांच अलग-अलग संप्रदाय गुजरात में है जो स्वामीनारायण से जुड़े हैं। गुजरात में स्वामीनारायण के पांच अलग-अलग संप्रदाय हैं, जिसमें सबसे बड़ा बोचासनवासी श्री अक्षर पुरुषोत्तम स्वामीनारायण संस्था है।इस संस्था ने पूरे भारत में कई मंदिरों का निर्माण किया है, जिनमें से सबसे प्रसिद्ध गुजरात और दिल्ली में अक्षरधाम मंदिर हैं,इस संप्रदाय के सबसे बड़े अनुयायियों में से एक खुद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी हैं।
प्रमुख स्वामी महाराज, स्वामीनारायण संस्था के प्रमुख थे जिनका वर्ष २०१६ में निधन हो गया।प्रधानमंत्री मोदी का इनसे जुड़ाव का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि महाराज को श्रद्धांजलि देने के लिए वे स्वतंत्रता दिवस के भाषण के तुरंत बाद गुजरात चले गए थे।
बताया जाता है कि मनोज सोनी ने 11वीं और 12वीं आणंद शहर से की है,उन्होंने सबसे पहले 12वीं साइंस संकाय में परीक्षा दिया था जिसमें वह फेल हो गए उसके बाद अगली बार उन्होंने आर्ट संकाय में फिर से परीक्षा दी जिसमें वह पास हुए, इस दौरान कुछ समय के लिए सोनी ने टाइपिस्ट का भी काम किया।
मनोज सोनी ने स्कूली शिक्षा हासिल करने के बाद वडोदरा के एमएस यूनिवर्सिटी से बीए और एमए की पढ़ाई की।
मनोज सोनी ने दो बार यूपीएससी की परीक्षा भी दी है पहले प्रयास में वह असफल हो गए थे तो दूसरी बार में उन्होंने परीक्षा तो पास कर ली लेकिन इंटरव्यू में असफल हो गए।
सोनी, यूपीएससी का सदस्य बनने से पहले वीसी के साथ-साथ ब्रह्म निर्झर पत्रिका का संपादन करते थे इसके अलावा अनुपम मिशन के प्रचारक और अक्षर-पुरुषोत्तम उपासना में कथावचक थे।
कहा जाता है कि जिस वक्त गुजरात दंगों के लिए तत्कालीन मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी को दोषी ठहराने की कोशिश की जा रही थी तो, उस समय में मनोज सोनी की लिखी पुस्तक उनका बचाव कर रही थी।
सोनी ने वर्ष २००२ के गुजरात दंगों को लेकर ‘इन सर्च ऑफ ए थर्ड स्पेस’ किताब लिखी थी,इस किताब में दंगे को ऐसे पेश करने की कोशिश की गई जो हिंदूवादी नजरिए में फिट बैठती थी।
ऐसा माना जाता है कि इस किताब के बाद ही डॉ मनोज सोनी को एनएस यूनिवर्सिटी का वीसी बनाया गया था,सोनी गुजरात फीस रेगुलेशन कमेटी के भी सदस्य थे।
सोनी के साथ एक विवाद साल 2007 में जुड़ा था जब वह एमएस यूनिवर्सिटी के वीसी थे,यूनिवर्सिटी के फाइन आर्ट्स के छात्र श्रीलमंथुला चंद्रमोहन ने परिसर में एक प्रदर्शनी में अपने कुछ चित्रों को प्रदर्शित किया। जिसका हिंदू और ईसाई छात्र गुटों ने यह कहकर विरोध किया कि इन चित्रों ने उनकी धार्मिक भावनाओं को आहत किया है। हिंदू विरोध समूह का नेतृत्व विहिप नेता नीरज जैन ने किया था और ईसाई समूह का नेतृत्व रेव इम्मानुएल कांत ने किया।
डॉ मनोज सोनी ने इस मामले में यूजीसी को एक रिपोर्ट धार्मिक समूहों के पक्ष में लिखकर भेजी और उन्होंने चित्रों को गलत बताया।जिसके बाद एमएसयू फैकल्टी ने उनके पत्र का खंडन किया और कहा कि चित्रों की उनकी व्याख्या में बारीकियों का अभाव है और चंद्रमोहन जो संदेश अपने चित्रों के जरिए देने की कोशिश कर रहे थे, सोनी उसकी गलत व्याख्या कर रहे थे. कला संकाय के कार्यवाहक डीन प्रोफेसर शिवाजी पणिकर को चंद्रमोहन का समर्थन करने पर सोनी ने निलंबित कर दिया था।
नतीजतन, चंद्रमोहन को गुजरात पुलिस की धारा 153 (ए) द्वारा धार्मिक दुश्मनी को बढ़ावा देने और दंगे भड़ाने के आरोप में गिरफ्तार कर लिया गया,चंद्रमोहन को पांच दिन जेल में बिताने पड़े।2018 में, चंद्रमोहन वीसी कार्यालय यह पूछने गए की उन्हें उनकी स्नातकोत्तर डिग्री क्यों नहीं दी जा रही है जो उन्होंने 2007 में पूरी की थी,कोई जवाब नहीं मिलने के बाद उन्होंने वीसी के कार्यालय में आग लगा दी थी।
“यह परिसर में सबको पता है कि सोनी आरएसएस और भाजपा के लोगों को एमएस विश्वविद्यालय के सिंडिकेट और सीनेट में अनुमति देते थे, जो सरकार द्वारा नामित होते थे और वह विश्वविद्यालय के हर निर्णय को प्रभावित करते थे.” यह बात “यंगेस्ट वीसी: द फाइन आर्ट ऑफ भगवा थिंकिंग” शीर्षक से टाइम्स ऑफ इंडिया में लिखे एक लेख में लिखा गया था।
कुल मिलाकर मोदी सरकार ने UPSC चेयरमैन डॉ मनोज सोनी को हटाकर यह संदेश देने की कोशिश की है कि कोई भी हो, जो भी अपने दायित्व का सौ प्रतिशत निर्वहन करने में खरा नहीं उतर पायेगा तो उन्हें कुर्सी छोड़नी ही पड़ेगी।

By Mukesh Seth

Chief Editor

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