लेखक: मनोज श्रीवास्तव

यूपी भाजपा प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी पार्टी के कार्यक्रमों के साथ लगातार नये प्रयोग भी कर रहे हैं।2027 में बड़े अंतर से जीत के लिये वह लीक से हट कर कुछ सकारात्मक संदेश दे रहे हैं। इस क्रम में वह मंगलवार की शाम को पार्टी के प्रदेश पदाधिकारियों के अलावा, कार्यालय कर्मचारियों व व्यवस्था के जिम्मेदारों को भोजन और बुलाया था। इस कार्यक्रम की खासियत यह थी कि इसमें अभियानों में लगे कार्यकर्ताओं को भी बुलाया गया था। मीडिया विभाग, आईटी सेल, सभी मोर्चों व प्रकोष्ठों के प्रमुख भी शामिल थे। प्रदेश अध्यक्ष के आवास में उनके गृह प्रवेश को लेकर यह भोज-भात चल रहा है। उनका यह तरीका उनसे जुड़े लोगों में उत्साह का नया संचार किया है। नहीं तो अध्यक्ष के सरकारी आवास के प्रवेश में चुनिंदा लोगों के अतिरिक्त अन्य लोगों को घुसना मुश्किल हो सकता था। अपनों के इस सत्कार ने कार्यकर्ताओं का चेहरा चमका दिया है।यह आयोजन उन्हें इतना रिचार्ज कर दिया है कि मानों अभी से वह 2027 के रण में कूद गये हों और कह रहे हैं कि 2027 जीतने के बाद ही विश्राम करेंगे। अभी तक पंकज चौधरी बहुत फूंक-फूंक कर चल रहे हैं। उनके सामने सबसे बड़ी चुनौती उनके अपनों ने पैदा कर दिया है। जिस पंकज चौधरी को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की खोज बताया जा रहा है, अपनी दुकान चलाने के लिये कुछ लोग उन्हें अपना शिष्य बता कर प्रचारित कर रहे हैं। पंकज चौधरी के सामने सबसे बड़ी चुनौती नेता पुत्रों और नेता शिष्यों को समायोजित करने की है। कार्यकर्ताओं का समायोजन कैसे हो यह भी यक्ष प्रश्न बनता जा रहा है।

2021 से स्वतंत्रदेव सिंह द्वारा बनाई गई टीम से अभी तक कार्य किया गया। चौधरी भूपेंद्र सिंह प्रदेश अध्यक्ष तो बने लेकिन वह अपनी टीम नहीं बना पाये। स्वतंत्रदेव सिंह के टीम में जिन्हें सरकार या कहीं और स्थान मिल गया था, उनके द्वारा मात्र रिक्त किये गये स्थानों पर समायोजन हुआ था। हालांकि भूपेंद्र चौधरी बहुत भाग्यशाली हैं, मंत्री से हटे तो प्रदेश अध्यक्ष, प्रदेश अध्यक्ष से हटे तो कैबिनेट मंत्री। बता दें कि 2014 में उत्तर प्रदेश की अखिलेश यादव की सरकार थी। डॉ लक्ष्मीकांत वाजपेयी यूपी भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष थे। उनकी जीवटता से समाजवादी पार्टी की सरकार हिल गयी थी। अकेले भाजपा को 71 सीटें मिली थीं। 2 सीटें उसकी सहयोगी अपना दल को मिली थी। इतने बड़े जीत के बाद डॉ लक्ष्मीकांत वाजपेयी बहुत दिनों तक नेपथ्य में डाल दिये गये थे। लेकिन भूपेंद्र सिंह के नेतृत्व में जब यूपी लोकसभा का चुनाव लड़ा गया तो भाजपा 2014 और 2019 के मुकाबले बुरी तरह हारी, सीट घट गयी।लोकसभा में समाजवादी पार्टी यूपी की सबसे बड़ी पार्टी बन कर उभरी। कुछ जानकारों का मानना है कि भूपेंद्र सिंह के मंत्री बनने से भाजपा को तीन राज्यों में लाभ मिलेगा। राजस्थान, हरियाणा और पश्चिमी उत्तर प्रदेश का तो क्या कहने? उपराष्ट्रपति जगदीश धनकड़ के हटने के बाद जाटों में उठी नाराजगी को भूपेंद्र सिंह के मंत्री बनने से दूर होगी। सूत्रों की मानें तो भाजपा नेतृत्व पश्चिमी उत्तर प्रदेश में भूपेंद्र सिंह को उनकी लोकप्रियता के अनुसार ऐसी जगह से चुनाव लड़ायेगी जहाँ इनके लड़ने से 20-25 विधानसभा क्षेत्रों पर सकारात्मक असर दिखेगा।

(लेखक स्वतन्त्र पत्रकार हैं )

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