(हसीब सिद्दीकी)
(लखनऊ)
यूपी प्रेस क्लब व उप्र साहित्य सभा के पारंपरिक साहित्यिक समारोह सृजन के 165वें अंक का आयोजन हुआ सम्पन्न
लखनऊ में यू पी प्रेस क्लब व उ प्र साहित्य सभा के पारंपरिक साहित्यिक समारोह ‘सृजन’ के 165 वें अंक का आयोजन आज सम्पन्न हुआ।
सच्चिदानंद शलभ की अध्यक्षता, हसीब सिद्दीकी, शिवशरण सिंह की उपस्थिति में डॉ सुरभि सिंह के संयोजन में रश्मि शरद के संचालन में पूजा श्रीवास्तव की वाणी वंदना से प्रारंभ हुये काव्य समारोह में गणतंत्र दिवस विषयक आधारित रचनाओं का पाठ हुआ। सृजन के संस्थापक सर्वेश अस्थाना ने कहा- गणतंत्र का अर्थ समानता है दीवार नही साहित्यकार को समानता का साम्राज्य स्थापित करना है।
डॉ रुद्रमणि ने पढ़ा-
देवभूमि भारत का गौरव गान सुनाने आया हूँ,
धूमिल जो आदर्श पड़े हैं, या दिलाने आया हूँ।
योगी योगेश ने –
जन जन में देश के हित मधु मंत्र ज़िंदा है
कारण यही कि अब तक गणतंत्र ज़िंदा है।
इसके अतिरिक्त समारोह में रत्ना बापले, प्रो जहाँ आरा,रेनू वर्मा, शकुंतला श्री, दीपिका, पूजा श्रीवास्तव, सीमा मिश्रा, वर्षा श्रीवास्तव, अजिता गुप्ता, प्रो बलवंत सिंह, योगी योगेश शुक्ल, सुभाष रसिया, अरविंद झा, उत्तम शोला, अच्युतानंद जायसवाल, सुनील शर्मा, प्रमोद तिवारी, अतीक कासगंजवी, राम जी ‘प्रवीण’, रजनी बाला, मनस्वी श्वेता, गिरधर खरे, पारसनाथ श्री, हेमलता त्रिपाठी, उमा लखनवी, मधु पाठक मांझी डॉ राकेश प्रताप सिंह, शैलेश सचान, श्याम किशोर वर्मा, शिवा सिंह, शत्रुघ्न, उपमा आर्य, दीनबंधु आर्य, डॉ रुद्रमणि व डॉ अवधि हरि ने शानदार काव्यपाठ किया।




