(मुकेश सेठ)
(मुम्बई)
माकपा सांसद शिवदासन, पूर्व सांसद महासचिव एम ए बेबी समेत कई नेता लिए गए हिरासत में, विरोध के बाद डीएम ने बातचीत कर सभी को कराया रिहा
गौतम बुद्ध नगर में श्रमिकों के मुद्दों को लेकर आज एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम सामने आया, जब मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) के राष्ट्रीय महासचिव एवं पूर्व सांसद कॉमरेड एम. ए. बेबी सहित पार्टी के वरिष्ठ नेताओं और सांसदों को प्रशासन से निर्धारित मुलाकात से पहले ही पुलिस द्वारा हिरासत में ले लिया गया।
पूर्व निर्धारित कार्यक्रम के तहत कॉमरेड एम. ए. बेबी, पोलित ब्यूरो सदस्य कॉमरेड अरुण कुमार, सांसद कॉमरेड शिवदासन, कॉमरेड ए. ए. रहीम, कॉमरेड जॉन ब्रिटास, कॉमरेड अमर राव सहित अन्य नेताओं का प्रतिनिधिमंडल जिलाधिकारी एवं पुलिस कमिश्नर से श्रमिकों पर हो रहे दमन, मजदूर नेताओं की गिरफ्तारी और लंबित मांगों के मुद्दे पर वार्ता हेतु नोएडा पहुंच रहा था।

लेकिन नोएडा पुलिस ने प्रतिनिधिमंडल को चिल्ला बॉर्डर पर ही रोककर हिरासत में ले लिया और उन्हें पुलिस लाइन सूरजपुर ले जाया गया। इसके बाद उन्हें जिलाधिकारी कार्यालय तथा डीएम कैंप कार्यालय सेक्टर-27 नोएडा ले जाया गया, जहां भी जिलाधिकारी से उनकी मुलाकात नहीं कराई गई।
इसी दौरान, प्रतिनिधिमंडल के स्वागत एवं वार्ता के लिए पहले से डीएम कार्यालय, सूरजपुर पहुंचे सीटू एवं माकपा के कई नेताओं,जिनमें सीटू दिल्ली-एनसीआर राज्य अध्यक्ष कॉमरेड वीरेंद्र गौड़, महासचिव कॉमरेड पी. वी. अनियन, माकपा दिल्ली सचिव मंडल सदस्य कॉमरेड राजीव कुमार, सीटू जिला कमेटी के कॉमरेड जोगेंद्र सैनी सहित दर्जनों कार्यकर्ता शामिल थे को भी पुलिस ने गिरफ्तार कर दनकौर चौकी ले जाकर हिरासत में रखा।
इस घटनाक्रम की जानकारी मिलने पर माकपा नेताओं और सांसदों ने डीएम कैंप कार्यालय, सेक्टर-27 के बाहर धरना शुरू कर दिया। बढ़ते दबाव के बीच पुलिस प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारी मौके पर पहुंचे और प्रतिनिधिमंडल से वार्ता की। जिलाधिकारी से फोन पर बातचीत कराई गई, जिसके बाद गिरफ्तार किए गए सभी नेताओं और कार्यकर्ताओं को रिहा कर दिया गया।
प्रतिनिधिमंडल ने वार्ता के दौरान पिछले 8–9 दिनों से पुलिस निगरानी में घर पर नजरबंद सीटू जिला सचिव कॉमरेड गंगेश्वर दत्त शर्मा को तत्काल रिहा करने की मांग उठाई। साथ ही जेल में बंद सभी निर्दोष मजदूरों की रिहाई का मुद्दा भी प्रमुखता से रखा गया। प्रशासनिक अधिकारियों ने इन मांगों पर शासन स्तर पर विचार कर शीघ्र उचित निर्णय लेने का आश्वासन दिया।
आश्वासन के बाद माकपा नेताओं एवं सांसदों ने अपना धरना समाप्त किया, लेकिन स्पष्ट किया कि यदि श्रमिकों के साथ अन्याय जारी रहा तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा।



