(मुकेश शर्मा)
(ग्वालियर)
गजराजा मेडिकल कॉलेज के डीन धाकड़ द्वारा नियम विरुद्ध की गई हितेन्द्र यादव पर मेहरबानी के है आरोप
बेटे ईशान धाकड़ पर बरस रही है ख़ास कृपा!
एक कहावत चरितार्थ है कि “ जब ख़ुदा मेहरबान तो ….. पहलवान”.
यह कहावत ग्वालियर जयारोग्य चिकित्सालय के अधिष्ठाता डॉ आर के एस धाकड़ पर सटीक चरितार्थ हो रही है.
व्यापम के आरोपी रहे डॉ हितेन्द्र यादव को नियम तथा न्यायालय आदेश ताक पर रखते हुए अवैध रूप से प्रतिनियुक्ति देने के गंभीर आरोप लगे हैं.इस आशय की शिकायत मुख्यमंत्री सहित केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय से की गई है साथ ही शिकायती आवेदन में धाकड़ के पुत्र ईशान धाकड़ पर भी रिश्वत लेकर जी.आर. मेडिकल कॉलेज में अवैध नियुक्तियां कराने के आरोप लगाये गए हैं ।
पत्र में डीन धाकड़ एंव डॉ हितेन्द्र यादव द्वारा आपस मे सांठ गांठ कर फर्जी तरीके से पद का दरुपयोग कर करोड़ों की हेरा फेरी कर शासन को करोड़ों की राजस्व हानि पहुंचाने एंव डीन के भतीजे गजेन्द्र धाकड़ की फर्जी नियुक्ति को निरस्त कर दोषियों के खिलाफ कार्यवाही करने की मांग की गई है ।
प्रमाणित दस्तावेज संलग्न कर भेजीगई शिकायत के अनुसार डाक्टर हितेन्द्र मूल रूप से डेमोस्टेटर के पद पर बुंदेलखंड मेडिकल कॉलेज सागर में पदस्थ थे जिनको प्रतिनियुक्ति पर गजराराजा चिकित्सा महाविद्यालय ग्वालियर में एनाटॉमी विभाग में डेमोस्ट्रेटर के पद पर लाकर विना अनुमति के पदस्थ किया गया था जिसके लिये आवश्यक प्रावधान है कि अधिष्ठाता को कार्यकारिणी समिति में अनुमति लेना आवश्यक है जो कि डीन द्वारा अपने पद का दुरुपयोग कर मनमर्जी से प्रतिनियुक्ति की गई तथा कार्यकारिणी समिति की अनुमति नहीं ली गई ।
डीन ग्वालियर मेडिकल कालेज द्वारा डॉक्टर हितेन्द्र यादव के आवेदन से आगामी पी जी की अनापत्ति हेतु अधिष्ठाता बुंदेलखंड मेडिकल कॉलेज सागर को पत्र क्रमांक 32313 दिनांक 25.08.2022 प्रेषित किया था जिसके परिपालन मे अधिष्ठाता बुंदेलखंड मेडिकल कॉलेज सागर के पत्र क्रमांक 5940/स्था / राज / 2022 दिनांक 01.11.2022 के माध्यम से अनापत्ति देने की मना की साथ स्पष्ट किया कि आपको दिनांक 19.05.2014 को निलंवित किया गया एंव दिनांक 23.11.2021 को बहाल किया गया तथा निलंबन अबधि का निराकरण माननीय न्यायालय के निर्णय के बाद किया जावेगा तथा पीजी हेतु डॉ हितेन्द्र यादव की अनापत्ति का आवेंदन नियमानुसार अमान्य कर दिया था । जिसके उपरान्त भी डीन डॉ धाकड़ अपनी मर्जी व विधि को ताक पर रखकर अपने हितेषी डॉ हितेन्द्र को बिना अनापत्ति प्रमाण पत्र के पीजी काउंसिल कराकर ग्वालियर के पी एस एम विभाग मे एडमीसन दिया गया और विना दस्तावेजो की फर्जी रुप से पीजी करायी गई जिससे स्पष्ट है कि कालेज व पी जी के लिये योग्य व्यक्ति के साथ छल व धोखाधडी हुई है तथा डॉ हितेन्द्र व डॉ धाकड की मिली भगत से अवैध रुप से पी.जी की गई है।
अगले बिंदु में उल्लेख है कि डॉक्टर हितेन्द्र यादव द्वारा पी.जी की शिक्षा हेतु अध्ययन अवकाश की मॉग की थी जिसे डीन द्वारा पीजी की शिक्षा हेतु अध्ययन अवकाश देने से मना कर दिया क्योंकि डॉ हितेन्द्र यादव की सेवा अवधि 5 वर्ष पूर्ण नहीं हुई है. इसलिये डॉ हितेन्द्र यादव को अनुमति नहीं दी गई थी. अनुमित ना मिलने पर भी डॉक्टर हितेन्द्र यादव द्वारा बिना अध्ययन अवकाश अनुमति के मनमानी तरीके से शासन को हानि पहुंचाते हुए पीजी करते रहे ओर स्टायपण्ड भी लेते रहे, जो कि सिविल सेवा शतों का उल्लंघन है। जिससे शासन को अत्यधिक हानि हुई है।
अधिष्ठाता बुंदेलखंड मेडिकल कॉलेज सागर के पत्र के द्वारा डॉक्टर की तीन वर्ष की प्रतिनियुक्ति समाप्त कर डॉ हितेन्द्र यादव को एनएमसी के मापदंडों की पूर्ति हेतु बुंदेलखंड मेडिकल कॉलेज सागर में वापस पदस्थ करने हेतु पत्र लिखा गया था। किन्तु डॉ धाकड़ द्वारा समस्त नियमो को दरकिनार करते हुए अपने दरुपयोग कर डॉ हितेन्द्र यादव की तीन वर्ष की प्रतिनियुक्ति अवधि समाप्त होने के उपरान्त भी आज दिनांक तक बुंदेलखंड मेडिकल कॉलेज सागर के लिये कार्यमुक्त नही किया है जिससे स्पष्ट डीन डॉ धाकड, डॉ हितेन्द्र से मिलकर एक दूसरे को अनैतिक लाभ पहुंचा कर शासन को हानि पहुंचा रहे हैं । आदर्श सेवा भर्ती के नियम अनुसार प्रतिनियुक्ति अवधि एक बार में 3 वर्ष के लिए ही की जाती है किंतु हितेंद्र यादव को 3 वर्ष से अधिक होने के उपरांत भी आज दिनांक तक कार्य मुक्त नहीं किया गया है और ना ही प्रतिनियुक्ति की तारीख बढ़ाई गई है. इसलिए कानून को ताक पर रखकर अभी भी पी.एस.एम विभाग मे डॉ हितेन्द्र से जानबूझ कर लाभ पाने उद्देश्य से कार्य कराया जा रहा है।
गजराराजा मेडिकल कॉलेज समूह के अस्पतालो मे भर्ती मरीजों को गुमराह कर अपने प्राईवेट अस्पताल में ईलाज
आरोप है कि डॉक्टर हितेन्द्र यादव, डॉ धाकड के साथ मिलकर एक निजी अस्पताल चलाते हैं जो डॉ धाकड़ के पुत्र ईशान धाकड़ का बताया जाता है, तथा गजराराजा मेडिकल कॉलेज समूह के अस्पतालों में भर्ती मरीजों को गुमराह कर अपने प्राईवेट अस्पताल में मरीजों ईलाज के लिए लेजाते हैं?वर्ष 2023 में गजराराजा चिकित्सा महाविद्यालय के डीन डा आर के एस धाकड़ के भतीजे गजेन्द्र धाकड़ का बायोकेमिस्ट्री विभाग में सहायक प्राध्यापक के पद पर अवैध रूप से चयन किया गया है।आरोप है कि गजेन्द्र धाकड नॉन मेडिको हैं. इन्होंने बायोकेमिस्ट्री विषय में एम.एस सी, पीएचडी किया है. जबकि मेडिकल फैकल्टी हेतु आवश्यक योग्यता एमबीबीएस, एमडी बायोकेमिस्ट्री होती है। एक गंभीर आरोप यह भी है कि गजराराजा चिकित्सा महाविद्यालय के बायोकेमिस्ट्री विभाग में कुल चिकित्सा शिक्षकों की संख्या से 15 प्रतिशत से अधिकारी नॉन मेडिकल फैकल्टी नहीं रखी जा सकती लेकिन धाकड़ ने 30 प्रतिशत नॉन मेडिको फैकल्टी रख रखी हैं।
डीन के बेटे ईशान पर हैं पैसे लेकर नियुक्ति कराने के गंभीर आरोप
शिकायत में डॉक्टर आरकेएस धाकड़ के पुत्र ईशान धाकड द्वारा गजराराजा मेडिकल कॉलेज समूह के अस्पतालों में आउटसोर्स कर्मचारियों की नौकरी लगवाने के नाम पर अवैध वसूली की जा रही है तथा डॉक्टर आरकेएस धाकड़ जब से डीन बने हैं सभी आउटसोर्स कर्मचारी में केवल अपनी जाति व रिस्तेदारों की भर्ती कर रहे हैं साथ में समस्त आउट सोर्स कर्मचारियों , एंबुलेंस,एसआर एवं जे आर से पैसों की वसूली के आरोप हैं जो वसूली डॉक्टर आरकेएस धाकड़ तक पहुंचती है? डॉ धाकड़ के बेटे ईशान धाकड द्वारा आउट सोर्स से नौकरी लगवाने के नाम पर यूपीआई फोन पे के माध्यम से पैसे लिये जाते हैं जिसके पैसों के लेन देन के स्क्रीनशॉट संलग्न हैं।
डॉ धाकड द्वारा संयुक्त संचालक व अधीक्षक रहते हुए एक नये काल्पनिक पद सयुक्त संचालक व अधीक्षक के ओ एस डी के रुप में डॉ हितेन्द्र को पद पदस्थ करने का कार्यलीन आदेश क्रमांक 20388-97/ स्टेनो / 2022 दिनांक 27.09.2022 अवैध रूपसे जारी कर दिया।
इन सभी विषयों पर डॉक्टर आर के एस धाकड़ से चर्चा करने के लिए संपर्क करना चाहा तो उन्होंने मोबाइल नहीं उठाया.
उसके बाद समस्त बिंदु उनके वाट्सअप पर भेजकर जबाब देने का अनुरोध किया लेकिन डॉ धाकड़ द्वारा मैसेज देखने के बाद भी कोई जबाब नहीं दिया।




